افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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#2959HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे के द्वार पर झगड़ने वालों की आवाज़ सुनी

उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे के द्वार पर कुछ झगड़ने वालों की आवाज़ सुनी, तो निकलकर उनके पास आए और फ़रमायाः "सुनो, मैं भी एक इनसान हूँ। मेरे पास झगड़ने वाले आते हैं। संभव है कि तुम में से कोई दूसरे…

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#2960HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है और कहा है : "मन्नत कोई भलाई नहीं लाती। इसके द्वारा केवल कंजूस का धन निकाला जाता है।

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#2961HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जहाँ तक मेरी बात है, तो अल्लाह की क़सम, अगर अल्लाह ने चाहा, तो जब भी मैं किसी बात की क़सम खाऊँगा और दूसरी बात को उससे बेहतर देखूँगा, तो अपनी क़सम का कफ़्फ़ारा अदा कर दूँगा और वही करूँगा, जो बेहतर हो।

अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैं अल्लाह के रसूल सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अशअर क़बीले के कुछ लोगों के साथ पहुँचा। मैंने आपसे सवारी माँगी, तो आपने कहा : "अल्लाह की क़सम, मैं तुम्हें सवारी नहीं दे सकता और न मेरे पास कोई सवारी है, जो तुम…

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#2963HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर एक सैन्यदल भेजा। उसमें अब्दुल्लाह बिन उमर भी शामिल थे।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर एक सैन्यदल भेजा। उसमें मैं भी शामिल था। हमें ऊँट और बकरियाँ प्राप्त हुईं। हमारे हिस्से में बारह-बारह ऊँट आए तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें…

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#2965HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम उसके धन में से उतना लो, जो साधारणतः तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के लिए काफ़ी हो।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अबू सुफ़यान की पत्नी हिंद बिन्त उतबा अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आईं और कहने लगीं : ऐ अल्लाह के रसूल! अबू सुफ़यान एक कंजूस व्यक्ति हैं। वह मुझे इतना खर्च नहीं देते, जो मेरे तथा मेर…

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#2966HadeethEnc[सह़ीह़]

एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। तथा एक रिवायत में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पता चला कि एक सहाबी ने अपने दास से कह दिया है कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। हालाँकि उस…

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#2967HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के मार्ग में एक दिन की पहरेदारी दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से बेहतर है

सह्ल बिन साद साइदी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : अल्लाह के मार्ग में एक दिन की पहरेदारी दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से बेहतर है जन्नत में तुम में से किसी एक के कोड़ा के रखने के बराबर स्थान दुनिया और उसकी सारी…

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#2968HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस दासी के बारे में पूछा गया, जो व्यभिचार में लिप्त हो गई हो और शादीशुदा न हो?

अबू हुरैरा और ज़ैद बिन खालिद जुहनी (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि नबी (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस दासी के बारे में पूछा गया, जो व्यभिचार में लिप्त हो गई और शादीशुदा न हो? तोआप ने फ़रमायाः यदि वह व्यभिचार करे, तो उसे कोड़े लगाओ। फिर व्यभिचार करे, तो फिर कोड़े लगाओ…

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#2969HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है।

अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया, जो बहादुरी दिखाने के लिए लड़ता हो, तथा उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो अपनी क़ौम या देश के बचाव के लिए लड़ता हो एवं उस व्यक्ति के बारे में…

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#2970HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुर रहमान बिन औफ़ और ज़ुबैर बिन अव्वाम (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किसी युद्ध के दौरान जूँ की पीड़ा की शिकायत की

अनस बिन मालिक से वर्णित है कि अब्दुर रहमान बिन औफ़ और ज़ुबैर बिन अव्वाम (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किसी युद्ध के दौरान जूँ की पीड़ा की शिकायत की, तो आपने दोनों को रेशमी कुर्ता पहनने की इजाज़त दी और मैंने उन दोनों के शरीर पर रेश…

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