“न हानि स्वीकार्य है, न किसी की हानि करना उचित है।”
अबू सईद सअद बिन मालिक बिन सिनान अल् ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाह…
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अबू सईद सअद बिन मालिक बिन सिनान अल् ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाह…
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार करने वाले…
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने बरकत वाले और महानरब से रिवायत करते हुए फ़रमाया है : "बेशक अल्लाह ने नेकियों और गुनाहों को लिख लिया है। "फिर उसका विस्तार करते हुए फ़रमाया : "जिसने किसी सत्कर्म का…
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “अल्लाह तआला का फ़रमान है : जिसने मेरे किसी ‘वली’ से दुश्मनी की, उससे मेरी ओर से युद्ध का ऐलान है। मेरा बंदा जिन चीज़ों के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करता है, उनमें…
अबू मुहम्मद अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि…
अबू बुरदा अपने पिता अबू मूसा अशरी -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत करते हैं कि : नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको यमन की ओर भेजा और उन्होंने आपसे कुछ पीने की चीज़ों के बारे में पूछा जो वहाँ बनाई जाती थीं, तो आपने फ़रमाया : “वह क्या हैं?” उन्होंने कहा : बित्अ तथा मिज़्…
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “चार बातें ऐसी हैं कि जिस व्यक्ति के अंदर यह बातें होंगी, वह मुनाफ़िक़ होगा तथा यदि उसके अंदर उनमें से कोई एक बात होगी, तो उसके अंदर निफ़ाक़ की एक विश…
उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अगर तुम अल्लाह पर वैसा ही भरोसा करने लगो, जैसा भरोसा होना चाहिए, तो वह तुम्हें उसी तरह रोज़ी दे, जैसे चिड़ियों को रोज़ी देता है; वह सुबह को खाली पेट निकलती हैं और…
नव्वास बिन समआन -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “नेकी उत्तम आचरण है, तथा गुनाह वह है जो तुम्हारे हृदय में खटकता रहे और तुम यह नापसंद करो कि लोग उसे जानें।” वाबिसा बिन माबद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहत…
अब्दुल्लाह बिन बुस्र -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास एक व्यक्ति आया और कहने लगा कि : ऐ अल्लाह के रसूल, इसलाम के अहकाम तो हमारे लिए बहुत हैं। अतः! आप हमें कोई ऐसा व्यापक कार्य बताएँ, जिसे हम मज़बूती से पकड़ लें। आपने फ़रमाय…
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