افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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दास मुक्त करना

12 hadeeths in this category
#2966HadeethEnc[सह़ीह़]

एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। तथा एक रिवायत में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पता चला कि एक सहाबी ने अपने दास से कह दिया है कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। हालाँकि उस…

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#2992HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो गुलाम की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को उसकी ओर से उनके हिस्सों की क़ीमत अदा कर दिए जाए, तभी उसकी ओर से पूरा गुलाम मुक्त होगा, अन्यथा उसकी ओर से जितना मुक्त हुआ, सो हुआ

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णन करते हैं कि आपने फ़रमायाः जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो उसकी न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को…

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#2993HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास से प्रयास करने को कहा जाएगा। हाँ, मगर उसे तंग नहीं किया जाएगा

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास स…

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#3600HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर तुमने उसे अपने मामा लोगों को दे दिया होता, तो अधिक सवाब मिलता

मुसलमानों की माता मैमूना बिंत हारिस- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को बताए बिना अपनी एक दासी को मुक्त कर दिया। फिर जब उनकी बारी का दिन आया, जब आप उनके पास आते थे, तो कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आपको पता है कि मैंने…

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#3697HadeethEnc[सह़ीह़]

तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया, दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति, जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे शिष्टाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।

अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया। दूसरा…

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#6159HadeethEnc[सह़ीह़]

आज़ाद किए हुए ग़ुलाम की मृत्यु के पश्चात, उसका उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में, उसके उत्तराधिकारी होने का अधिकार उसे प्राप्त होगा, जिसने उसे आज़ाद किया है।

आइशा बिंत अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहती हैंः बरीरा (रज़ियल्लाहु अनहा) के कारण अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर से तीन तरीके सामने आएः जब वह आज़ाद हो गईं तो आपने उन्हें अपने पति के साथ रहने या न रहने का अख़्तियार दिया। उन्हें कहीं से मांस भेजा गया। मां…

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#6388HadeethEnc[सह़ीह़]

कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।" उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में अबू हुरैरा की जान है, यदि अल्लाह के मार्ग में जिहाद, हज तथा माँ की देख-रेख की ज़िम्मेवारी न होत…

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#6396HadeethEnc[सह़ीह़]

जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके एक-एक अंग के बदले में इसके एक-एक अंग को जहन्नम से मुक्त कर देता है, यहाँ कि उसकी शर्मगाह के बदले इसकी शर्मगाह को मुक्त कर देता है।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके ए…

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#8894HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं बनी मुक़र्रिन का सातवाँ व्यक्ति था। हमारी एक दासी थी, जिसे सबसे छोटे भाई ने एक थप्पड़ मार दिया था, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसे मुक्त करने का आदेश दिया

अबू अली सुवैद बिन मुक़र्रिन (रज़ियल्लाहु अनहु) फ़रमाते हैं कि मैं बनी मुक़र्रिन का सातवाँ व्यक्ति था। हमारी एक दासी थी, जिसे सबसे छोटे भाई ने एक थप्पड़ मार दिया था, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसे मुक्त करने का आदेश दिया। एक रिवायत में है: भाईयो…

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#10650HadeethEnc[सह़ीह़]

यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है।

मुआविया बिन हकम सुलमी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ रहा था कि अचानक हममें से एक आदमी ने छींका और मैंने "यरहमुकल्लाह" (अल्लाह तुझपर रहम करे) कह दिया। इसपर लोग मुझे घूरने लगे, तो मैंने…

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#58081HadeethEnc[सह़ीह़]

'वला' (अर्थात वारिस बनने का अधिकार) उसके लिए है, जिसने मुक्त करने का उपकार किया हो।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का वर्णन है कि उन्होंने बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को कुछ अंसारियों से खरीदा, तो उन्होंने उनके 'वला' (अर्थात उनके वारिस बनने का अधिकार) अपने पास रखने की शर्त लगा दी, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लल्लम) ने फ़रमायाः " 'वला' (अर्थात वारिस…

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