افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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Prophetic Hadeeth Encyclopedia

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#5940HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़ज्र की अंतिम रकात में, रुकू से सिर उठाने और 'سَمِعَ الله لمن حَمِدَه رَبَّنا ولك الحَمْدُ' कहने के बाद कहतेः ऐ अल्लाह, अमुक, अमुक और अमुक पर लानत कर। इसी पर अल्लाह तआला ने यह आयत उतारीः (لَيْسَ لَكَ مِنَ الأَمْرِ شَيْءٌ) (ऐ रसूल! आपका इसमें कुछ बस नहीं)।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़ज्र की अंतिम रकात में, रुकू से सिर उठाने और 'سَمِعَ الله لمن حَمِدَه رَبَّنا ولك الحَمْدُ' कहने के बाद कहते हुए सुनाः ऐ अल्लाह! अमुक, अमुक और अमुक पर लानत कर। इ…

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#5941HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत के लिए उसके सुब्ह के समय में बरकत प्रदान कर।

सख़्र बिन वदाआ ग़ामिदी (रज़ियल्लाहु अंहु) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत के लिए उसके सुब्ह के समय में बरकत प्रदान कर। तथा आप जब कोई छोटा या बड़ा सैन्य-दल भेजते तो दिन के प्रथम भाग में भेजते। ख़ुद सख़्र (…

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#5942HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या तुम जानते हो कि झूठ तथा मिथ्यारोपन क्या है? यह लोगों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करते फिरना है।

अबदुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाय…

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#5946HadeethEnc[सारी रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़]

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने लिखा थाः हर जादूगर पुरुष एवं स्त्री को क़त्ल कर दो।

बजाला बिन अबदा कहते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने लिखा थाः हर जादूगर पुरुष एवं स्त्री को क़त्ल कर दो। वह कहते हैंः अतः, हमने तीन जादूगरनियों को मार डाला। और अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि हफ़सा (रज़ियल्लाहु अंहा) को उनकी दासी ने जा…

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#5948HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम्हारा इन घाटियों और वादियों में अलग-अलग फैल जाना शैतान की ओर से है।

अबू सालबा ख़ुशनी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि लोग जब यात्रा के दौरान किसी स्थान पर उतरते तो पहाड़ की घाटियों और वादियों में फैल जाते थे। अतः, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुम्हारा इन घाटियों और वादियों में अलग-अलग फैल जाना शैतान की ओर से है। इ…

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#5949HadeethEnc[सह़ीह़]

दीनार के बंदे का विनाश हो। दिरहम के बंदे का सर्वनाश हो। रेशमी कपड़े के बंदे का विनाश हो। रुएँदार कपड़े के बंदे का विनाश हो। अगर दिया गया तो प्रसन्न और न दिया गया तो अप्रसन्न। वह हलाक हो और नाकाम हो। अगर किसी परेशानी में पड़े तो कोई उसे सहारा देने वाला न हो।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः दीनार के बंदे का विनाश हो। दिरहम के बंदे का विनाश हो। रेशमी कपड़े के बंदे का विनाश हो। रुएँदार कपड़े के बंदे का विनाश हो। अगर दिया गया तो प्रसन्न और न दिया गया तो अप्रसन्न…

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#5951HadeethEnc[सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़)]

तीन आदमी जन्नत में प्रवेश नहीं करेंगेः शराब का रसिया, रिश्ते-नाते को काटने वाला और जादू को सच मानने वाला।

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#5952HadeethEnc[सह़ीह़]

तीन व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे अल्लाह न बात करेगा और न उन्हें गुनाहों से पवित्र करेगा तथा उनके लिए दुखदायी यातना हैः बूढ़ा व्यभिचारी, कंगाल अभिमानी और ऐसा व्यक्ति जिसने अल्लाह को अपना सामान बना लिया हो; उसी की क़सम खाकर ख़रीदता हो और उसी की क़सम खाकर बेचता हो।

सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तीन व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे अल्लाह न बात करेगा और न उन्हें गुनाहों से पवित्र करेगा तथा उनके लिए दुखदायी यातना हैः बूढ़ा व्यभिचारी, कंगाल अभिमानी और ऐसा व्यक्ति जिसने अल्…

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#5954HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक़दीर पर ईमान न रखो और इस बात पर विश्वास न रखो कि जो चीज़ तुम्हें मिलने वाली है, वह तुम्हारे हाथ से निकल नहीं सकती और जो तुम्हें नहीं मिलने वाली, वह तुम्हारे हाथ लग नहीं सकती। अगर तुम इसके सिवा किसी और आस्था पर मरोगे तो जहन्नम में प्रवेश करने वालों में शामिल हो जाओगे।

इब्ने दैलमी कहते हैंः मैं उबै बिन काब के पास आकर बोला कि मेरे दिल में तक़दीर के बारे में थोड़ी-सी खटक है। मुझे कोई हदीस सुनाइए कि अल्लाह इस खटक को मेरे दिल से निकाल दे। उन्होंने कहाः अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक…

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#5956HadeethEnc[सह़ीह़]

सबसे अच्छे साथी चार हैं, सबसे अच्छा सैन्य-दल चार सौ का है और सबसे अच्छी सेना चार हज़ार की है और बारह हज़ार की सेना कम संख्या के कारण पराजित नहीं हो सकती।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़…

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#5961HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुम हरियाली के दिनों में यात्रा करो तो ऊँट को धरती में चरने का उसका हक़ प्रदान करो और जब सुखाड़ के दिनों में यात्रा करो तो उसपर सवार होकर तेज़-तेज़ चलो तथा उसकी शक्ति ख़त्म होने से पहले मंज़िल तक पहुँच जाओ।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जब तुम हरियाली के दिनों में यात्रा करो तो ऊँट को धरती में चरने का उसका हक़ प्रदान करो और जब सुखाड़ के दिनों में यात्रा करो तो उसपर सवार होकर तेज़-तेज़ चलो तथा उसकी शक्ति ख़…

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