افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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शरई राजनीति

12 hadeeths in this category
#3004HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे

अब्दुर्रहमान बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ऐ अब्दुल रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे, तथा यदि बिना माँगे सत्ता दिए गए, तो उसके निर्वा…

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#3011HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह तआला, शासक या अधिकारी के साथ भलाई का इरादा करता है, तो उसे सच्चा सहायक प्रदान करता है, जो भूलने पर याद दिलाता है और याद रहने पर सहायता करता है। परन्तु, जब इसके विपरीत इरादा करता है, तो उसे बुरा सहायक प्रदान करता है, जो न भूलने पर याद दिलाता है, न याद रहने पर सहायता करता है

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से मरफ़ूअन वर्णन करते हुए कहती हैं कि जब अल्लाह तआला किसी शासक या अधिकारी के साथ भलाई का इरादा करता है, तो उसे सच्चा सहायक प्रदान करता है, जो भूलने पर याद दिलाता है और याद रहने पर सहायता करता है। परन्तु, ज…

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#3012HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह ने जितने भी नबी भेजे और जितने भी शासक बनाए, सबके दो प्रकार के सलाहकार होते हैं; एक वह सलाहकार जो भलाई का आदेश देता है और उसकी प्रेरणा देता है। दूसरा वह सलाहकार जो बुराई का आदेश देता है और उसी का प्रोत्साहन देता है

अबू सईद ख़ुदरी और अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहुमा) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णन करते हुए कहते हैंः अल्लाह ने जितने भी नबी भेजे और जितने भी शासक बनाए, सबके दो प्रकार के सलाहकार होते हैं; एक वह सलाहकार जो भलाई का आदेश देता है और उसकी प्रेरणा देता है। द…

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#3061HadeethEnc[स़ह़ीह़]

हमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कठिनाई और आसानी में, चुस्ती और सुस्ती में और हमारे ऊपर तरजीह दिए जाने की अवस्था में भी सुनेंगे और अनुसरण करेंगे

उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : हमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कठिनाई और आसानी में, चुस्ती और सुस्ती में और हमारे ऊपर तरजीह दिए जाने की अवस्था में भी सुनेंगे और अनुसरण करेंगे। और इस बात पर बैअत की कि हम शासकों से शासन के माम…

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#3123HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर बहरैन का धन आया, तो मैं तुम्हें इस तरह, इस तरह और इस तरह दूँगा।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझसे कहा थाः "अगर बहरैन का धन आया, तो मैं तुम्हें इस तरह, इस तरह और इस तरह दूँगा।" परन्तु, बहरैन का धन आने से पहले ही नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु हो गई। बाद में जब बहरैन का…

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#3154HadeethEnc[सह़ीह़]

एक अल्लाह की इबादत करो, किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा उन बातों को छोड़ दो जो तुम्हारे बाप-दादा कहते हैं। तथा हमें नमाज़ एवं सत्य का आदेश देते हैं।

अबू सुफ़यान बिन सख़्र बिन हर्ब से रिवायत है कि हिरक़्ल ने कहाः वह- अर्थात्, नबी - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- तुम्हें किन बातों का आदेश देते हैं? अबू सुफ़यान ने कहा कि मैं बोलाः वह कहते हैं कि एक अल्लाह की इबादत करो, किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा उन बातों को छोड़ दो ज…

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#3155HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भली बात का आदेश दें और अज्ञानियों से मुँह फेर लें।) और यह अज्ञानियों में हैं।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैंः उययना बिन हिस्न आया और अपने भतीजे हुर्र बिन क़ैस के पास ठहरे। हुर्र बिन क़ैस उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- अपने निकट रखा करते थे। उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास बैठने वाले उलमा ही हुआ करते थे…

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#3156HadeethEnc[स़ह़ीह़]

आने वाले समय में वरीयता दिए जाने के मामले और ऐसी बातें सामने आएँगी, जो तुम्हें बुरी लगेंगी।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! तो आप हमें क्या आदेश देते हैं? फ़रमाया : "तुम अपनी ज़िम्मेवारियाँ अदा करते रहना और अपना हक़ अल्लाह से माँगना।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "आने वाले समय में वरीयता दिए जाने के मामले और ऐसी बातें सामने आएँगी, जो तुम्हें बुरी लगेंगी।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! तो आप हमें क्या आदेश देते हैं? फ़रमाया…

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#3311HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अबूज़र, में तुमको कमज़ोर समझता हूँ, तथा तुम्हारे लिए भी वही बात पसंद करता हूँ, जो मैं अपने लिए पसंद करता हूँ; दो व्यक्तियों का भी अमीर न बनना और न किसी अनाथ के धन का वाली (संरक्षक) बनना।

अबूज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे फरमायाः "ऐ अबूज़र, में तुमको कमज़ोर समझता हूँ, तथा तुम्हारे लिए भी वही बात पसंद करता हूँ, जो मैं अपने लिए पसंद करता हूँ; दो व्यक्तियों का भी अमीर न बनना और न किसी…

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#3467HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अबूज़र, तुम एक दुर्बल व्यक्ति हो और यह पद एक अमानत है और यह क़यामत के दिन अपमान तथा शर्मिंदगी का सामान भी है। यह और बात है कि कोई उसे उसके हक़ के साथ प्राप्त करे और उसके बारे में उसके ऊपर जो ज़िम्मेवारियाँ आती हैं, उन्हें अदा करे।

अबूज़र (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आप मुझे कोई प्रशासनिक पद नहीं देंगे? तो आपने अपना हाथ मेरे कंधों पर मारकर फ़रमायाः "ऐ अबूज़र, तुम एक दुर्बल व्यक्ति हो और यह पद एक अमानत है और यह क़यामत के दिन अपमान तथा शर्मिंदगी का सामान भी है। यह…

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#3481HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुमपर ऐसे शासक नियुक्त हो जाएँगे, जिनके कुछ काम तुम्हें अच्छे लगेंगे और कुछ बुरे। ऐसे में जो (उनके बुरे कामों को) बुरा जानेंगे, वह बरी हो जाएँगे और जो खंडन करेंगे, वह सुरक्षित रहेंगे। परन्तु जो उनको ठीक जानेंगे और शासकों की हाँ में हाँ मिलाएँगे (वह विनाश के शिकार होंगे)।

मुसलमानों की माता उम्म-ए-सलमा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुमपर ऐसे शासक नियुक्त हो जाएँगे, जिनके कुछ काम तुम्हें अच्छे लगेंगे और कुछ बुरे। ऐसे में जो (उनके बुरे कामों को) बुरा जानेंगे, वह बरी हो जाएँगे और जो खंड…

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#3483HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे याद आया कि हमारे पास सोने का एक टुकड़ा रखा हुआ है। अतः, मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि मेरा ध्यान उसी में अटका रहे। सो, मैंने उसे बाँटने का आदेश दे दिया।

उक़बा बिन हारिस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने मदीने में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे अस्र की नमाज़ पढ़ी। जब आपने सलाम फेरा तो जल्दबाज़ी में खड़े हुए और लोगों की गर्दनें फलांगते हुए अपनी किसी पत्नी के कमरे में गए। आपकी जल्दी देखकर लोग घबरा गए।…

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