افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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जिहाद

12 hadeeths in this category
#8889HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने तुम लोगों को आदेश दिया था कि अमुक और अमुक को जला दो लेकिन अल्लाह के सिवा कोई आग से यातना नहीं दे सकता, इसलिए यदि तुम उन्हें पाओ तो क़त्ल कर दो

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, उन्होंने कहा कि हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किसी लश्कर (फ़ौज) के साथ भेजा और हमसे फ़रमाया: जब तुम क़ुरैश के अमुक और अमुक आदमी को पाओ तो उन्हें आग में जला देना। आपने उनका नाम भी लिया था। अबू हुरैरा (रज़ियल…

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#8892HadeethEnc[सह़ीह़]

किसी के लिए उपयुक्त नहीं कि आग से सज़ा दे, सिवाये आग के रब के

इब्ने मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के संग एक यात्रा में थे, तो आप किसी आवश्यकता के लिए गए। हमने एक चिड़िया देखा, जिसके दो बच्चे थे। हमने उसके बच्चे पकड़ लिए, तो चिड़िया आई और उनके ऊपर उड़ने लगी। इसी बीच अल्लाह के न…

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#8901HadeethEnc[सह़ीह़]

मुजाहेदीन की पत्नियाँ, जिहाद में न जाने वालों के लिए उनकी अपनी माताओं के समान हराम हैं

बुरैदा (रज़ियल्ल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: अल्लाह के रास्ते में जिहाद में जाने वालों की पत्नियाँ, जिहाद में न जाने वालों के ऊपर उनकी अपनी माताओं के समान हराम हैं। जो भी किसी मुजाहिद के परिवार की देख- भाल की ज़िम्मेवारी…

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#11221HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अलैहिमस्सलाम- का साथ देगा।

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के मुक्त किए हुए दास सौबान -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि आपने फ़रमायाः "मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अल…

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#58187HadeethEnc[सह़ीह़]

उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने सेनाओं के सेनापतियों के नाम उन लोगों के विषय में पत्र लिखकर आदेश जारी किया, जो अपनी पत्नियों से दूर रहते थे कि वे उन्हें उपस्थित करके कहें कि या तो (अपनी पत्नियों को) खर्च दें या उनको तलाक़ दे दें। फिर, यदि तलाक़ देते हैं तो जितने दिनों तक उन्हें अपने विवाह में रखा है, उतने दिनों का खर्च भेज दें।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है कि उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने सेनाओं के सेनापतियों के नाम उन लोगों के विषय में पत्र लिखकर आदेश जारी किया, जो अपनी पत्नियों से दूर रहते थे कि वे उन्हें उपस्थित करके कहें कि या तो (अपनी पत्नियों को) खर्च दे…

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#58198HadeethEnc[सह़ीह़]

मोमिनों का रक्त समान है तथा वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध एक हाथ के समान हैं। उनके दिए गए सुरक्षा-वचन का पालन सबको करना पड़ेगा। सुन लो, किसी मोमिन को किसी काफ़िर के बदले में क़त्ल नहीं किया जाएगा और न किसी संधि के तहत रह रहे व्यक्ति को संधि काल के भीतर क़त्ल किया जाएगा। जिसने कोई अपराध किया उसका गुनाह उसी के ऊपर है। जिसने कोई अपराध किया या किसी अपराधी को पनाह दी, उसके ऊपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की तथा तमाम लोगों की लानत है।

क़ैस बिन अब्बाद से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं तथा अश्तर, अली -रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास गए तथा हमने कहा : क्या अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आपको कोई ऐसी बात बताई है, जो आम लोगों को न बताई हो? उन्होंने फ़रमाया : नहीं, सिवाय उसके जो मेरी इस पुस्तिका में…

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#58224HadeethEnc[सह़ीह़]

जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपने घर वालों की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपनी जान की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी शहीद है और जो अपने धर्म की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी शहीद है।

सईद बिन ज़ैद -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपने घर वालों की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपनी जान की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी श…

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#64598HadeethEnc[सह़ीह़]

मुसलमानों की माता आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जिहाद में निकलने की अनुमति माँगी, तो आपने फ़रमायाः "तुम्हारा जिहाद हज है।"

मुसलमानों की माता आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जिहाद म…

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#64603HadeethEnc[सह़ीह़]

अकसर ऐसा होता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकलने का इरादा करते, तो किसी और दिशा में निकलने का संकेत देते। परन्तु तबूक युद्ध में ऐसा नहीं किया।

काब बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अकसर ऐसा होता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकलने का इरादा करते, तो किसी और दिशा में निकलने का संकेत देते। परन्तु तबूक युद्ध में ऐसा नहीं किया। यह युद्ध आपने सख़्त गर्मी के मौसम में किया, लम्बे…

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#64605HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम वापस जाओ, मैं किसी मुश्रिक की मदद हरिगज़ नहीं लूँगा।

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बद्र की ओर निकले। जब 'हर्रा अल-वबरा' में पहुँचे, तो एक व्यक्ति आपसे मिला, जिसकी जुर्रत और बहादुरी के ख़ूब चर्चे थे। उसे देख अल्लाह के रसूल (स…

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