Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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जिहाद
तेरे लिए इसके बदले में क़यामत के दिन सात सौ नकेल लगी हुई ऊँटनियाँ हैं।
अबू मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि एक व्यक्ति नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक नकेल लगी हुई ऊँटनी लेकर आया और बोला कि यह अल्लाह के मार्ग में है, तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तेरे लिए इसके बदले में क़यामत के दिन सात सौ नकेल लगी हुई ऊँटनिया…
सबसे अधिक अच्छा व्यक्ति कौन है ऐ अल्लाह के रसूल?
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफ़ूअन वर्णित है कि एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! सबसे अधिक अच्छा व्यक्ति कौन है? आपने फ़रमायाः "वह मोमिन, जो प्राण तथा धन के साथ अल्लाह के रास्ते में जिहाद करता है।" उसने कहाः फिर कौन? फ़रमायाः "फिर वह व्यक्ति, जो एकांत में…
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी व्यक्ति को किसी सेना अथवा उसकी छोटी टुकड़ी का नेतृत्व प्रदान करते तो उसे अल्लाह के भय तथा मुसलमान साथियों के साथ अच्छा व्यवहार करने का आदेश देते थे।
बुरैदा बिन हुसैब असलमी (रज़ियल्लाहु अंहु) वर्णन करते हुए कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी व्यक्ति को किसी सेना अथवा उसकी छोटी टुकड़ी का नेतृत्व प्रदान करते तो उसे अल्लाह के भय तथा मुसलमान साथियों के साथ अच्छा व्यवहार करने का आदेश देते हुए कह…
ऐसे कोई दिन नहीं हैं, जिनमें नेकी के काम करना अल्लाह के निकट इन (दस) दिनों में नेकी के काम करने से अधिक प्रिय हों।" आपकी मुराद ज़ुल-हिज्जा महीने के शुरू के दस दिन हैं
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "ऐसे कोई दिन नहीं हैं, जिनमें नेकी के काम करना अल्लाह के निकट इन (दस) दिनों में नेकी के काम करने से अधिक प्रिय हों।" आपकी मुराद ज़ुल-हिज्जा महीने के…
सबसे बेहतर जीवन उस व्यक्ति का है, जो अल्लाह के रास्ते में घोड़े की लगाम पकड़े रहता है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाह अनहु) से वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः सबसे बेहतर जीवन उस व्यक्ति का है, जो अल्लाह के रास्ते में घोड़े की लगाम पकड़े रहता है और जब भी कोई शोर अथवा जंग का बिगुल सुनता है, उसकी पीठ पर क़त्ल करने अथवा शहीद होने के…
तुममें से जो भी (जिहाद में) जाने वाले के घर वालों तथा उसके माल की अच्छी तरह ज़िम्मेवारी निभाएगा, उसे (जिहाद में) निकलने वाले के बराबर नेकी मिलेगी।
अबू सईद खुदरी -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बनू लेहयान की ओर एक सेना भेजी और फ़रमाया : "हर दो व्यक्तियों में से एक व्यक्ति उठे और नेकी दोनों को मिलेगी।" एक रिवायत में है : "प्रत्येक दो व्यक्तियों में से एक व्यक्ति…
युद्ध से वापसी भी युद्ध के समान है।
जो सेना जिहाद करते हुए माले-ग़नीमत प्राप्त करती है और मौत से सुरक्षित रहती है, उसे दो तिहाई प्रतिफल मिल जाता है और जो सेना माले-ग़नीमत से वंचित रहती है और शहीद हो जाती है, उसे पूरा-पूरा प्रतिफल मिल जाता है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जो सेना जिहाद करते हुए माले-ग़नीमत प्राप्त करती है और मौत से सुरक्षित रहती है, उसे दो तिहाई प्रतिफल मिल जाता है और जो सेना माले-ग़नीमत से वंचित रहती है और शहीद हो जाती है, उसे पूरा-पूरा प्रतिफल…
जिसने तीर अंदाज़ी सीखी, फिर उसे छोड़ दिया, वह हममें से नहीं है या उसने नाफ़रमानी की।
जिसने जिहाद नहीं किया अथवा किसी मुजाहिद को तैयार नहीं किया अथवा किसी मुजाहिद के पश्चात उसके घर वालों की देख-रेख नहीं की, अल्लाह उसे क़यामत से पहले ही किसी न कसी आपदा में ग्रस्त कर देगा।
जो जिहाद किए बिना अथवा जिहाद के इरादे के बिना ही मर गया, वह मुनाफ़िक़ ही अवस्था में मरा।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जो जिहाद किए बिना अथवा जिहाद के इरादे के बिना ही मर…

