افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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जिहाद

12 hadeeths in this category
#4181HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए एक घोड़ा सुरक्षित रखा तथा ऐसा अल्लाह पर ईमान और उसके वचन को सच मानते हुए किया तो क़यामत के दिन उसे उसके खाने, पीने और पेशाब तथा गोबर, हर चीज़ का प्रतिफल मिलेगा।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए एक घोड़ा सुरक्षित रखा तथा ऐसा अल्लाह पर ईमान और उसके वचन को सच मानते हुए किया तो क़यामत के दिन उसे उसके खाने, पीने और पेशाब तथा गोबर,…

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#4193HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अबू सईद! जो अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद के रसूल होने से संतुष्ट हो गया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई।

अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "ऐ अबू सईद! जो अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद के रसूल होने से संतुष्ट हो गया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई।" आपकी इस बात से अबू सईद -रज़ियल्लाहु अन्हु…

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#4200HadeethEnc[सह़ीह़]

जिस मुसलमान ने अल्लाह के मार्ग में तनिक समय तक भी अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई और जो अल्लाह की राह में ज़ख़्मी हुआ या चोट खाई, उसके ज़ख़्म से क़यामत के दिन भारी मात्रा में रक्तस्राव हो रहा होगा, जिसका रंग केसर के जैसा होगा और सुगंध कस्तूरी जैसी।

मुआज़- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिस मुसलमान ने तनिक समय तक भी अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई और जो अल्लाह की राह में ज़ख़्मी हुआ या चोट खाई, उसके ज़ख़्म से क़यामत के दिन भारी मा…

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#4227HadeethEnc[सह़ीह़]

आपका क्या ख़याल है कि यदि मैं अल्लाह के मार्ग में जिहाद करते हुए मारा जाऊँ तो मेरे गुनाह माफ़ हो जाएँगे?

अबू क़तादा हारिस बिन रिबई- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके बीच खड़े हुए और बताया कि अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना और अल्लाह पर ईमान लाना सबसे उत्तम कार्य हैं। यह सुन एक व्यक्ति खड़ा हुआ और कहने लगा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आ…

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#4238HadeethEnc[सह़ीह़]

कदापि नहीं, मैंने उसे एक धारीदार कपड़े अथवा चोगे के कारण जहन्नम की आग में जलते हुए देखा है, जिसे उसने ग़नीमत के धन से, बँटवारे से पहले ले लिया था।

उमर बिन ख़त्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि जब ख़ैबर के दिन अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथी आकर कहने लगे कि अमुक शहीद है और अमुक शहीद है, यहाँ तक कि एक आदमी के निकट से गुज़रे और उसके बारे में कह दिया कि अमुक शहीद है तो अल्लाह के नबी (सल्लल्ला…

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#4440HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का विजय के वर्ष मक्का में दाखिल हुए तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास आकर कहा कि ख़तल का बेटा काबा के पर्दों से चिमटा हुआ है। सो, आपने फ़रमायाः उसका वध कर दो।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का विजय के वर्ष मक्का में प्रवेश किया तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास आकर कहा कि ख़तल का बेटा काबे के पर्दों से चिमटा हुआ है। सो, आपने फ़र…

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#4458HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अंसारियो! क्या मैंने तुम्हें सत्य की राह से भटका हुआ नहीं पाया तो अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा सीधा रास्ता दिखाया? तुम बिखरे हुए नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा आपस में जोड़ दिया? तुम कंगाल नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा धनी बनाया?

अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम कहते हैं कि जब हुनैन के दिन अल्लाह ने अपने रसूल को गनीमत का धन प्रदान किया तो उसे लोगों और नए-नए इस्लाम ग्रहण करने वालों के बीच बाँट दिया और अंसार को कुछ नहीं दिया। इससे अंसार ने अपने दिलों में कुछ नाराज़गी महसूस की; क्योंकि लोगों को जो कुछ…

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#4945HadeethEnc[सह़ीह़]

वह जहन्नम में है। अतः, लोग उसे देखने गए, तो पाया कि उसने ग़नीमत के मााल का एक काली धारियों वाला कपड़ा चुरा रखा था।

अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किरकिरा नामी एक व्यक्ति को सामान की देख-भाल के लिए रखा था। जब वह मर गया, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया कि वह जहन्नम में है। अतः, लोग उसे देखने गए, तो पाया कि…

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#4971HadeethEnc[सह़ीह़]

शहीद पाँच हैं; ताऊन (प्लेग) से मरने वाला, पेट की बीमारी से मरने वाला, डूबकर मरने वाला, किसी गिरने वाली वस्तु के नीचे दबकर मरने वाला और अल्लाह के रास्ते में शहीद होने वाला।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "शहीद पाँच हैं; ताऊन (प्लेग) से मरने वाला, पेट की बीमारी से मरने वाला, डूबकर मरने वाला, किसी गिरने वाली वस्तु के नीचे दबकर मरने वाला और अल्लाह के रास्ते में शहीद होने वाला।"…

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#5001HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख बनाया।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख बनाया। जब वह लोग उसफ़ान एवं मक्का के बीच हदआ नामी स्थान तक पहूँचे, तो उनके पहुँ…

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