افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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जिहाद के अहकाम तथा मसायल

12 hadeeths in this category
#2934HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने विशेष रूप से तैयार किए गए घोड़ों के बीच (जिन्हें खूब खिलाया जाता है फिर उस की खोराक कम कर दी जाती है ताकि उसे शक्ति मिले और तेज़ हो) हफ़या से सनीयतुल वदा तक घुड़दौड़ कराई।

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-ने युद्ध के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए घोड़ों के बीच हफ़या से सनीयतुल वदा तक घुड़दौड़ कराई और बिना तैयार किए गए घोड़ों के बीच सनीया से बनू ज़ुरैक़ की मस्जिद तक घुड़दौड़ कराई। अब्दुल्ला…

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#2939HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक यात्रा में थे कि आपके पास मुशरिकों का एक जासूस आया।

सलमा बिन अकवा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक यात्रा में थे कि आपके पास मुश्रिकों का एक जासूस आया। उसने सहाबा के साथ बैठकर बात की, फिर बड़ी तेज़ी से निकल गया। तो नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसे ढूंढकर क़त्ल कर दो।" चुनां…

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#2978HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ग़नीमत के माल से घोड़े के लिए दो और आदमी के लिए एक भाग दिया

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) न…

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#2982HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन लोगों को जंगों में भेजते थे, उन में से कुछ लोगों को विशेष रुप से कुछ ग़नीमत का माल देते थे। यह सेना के आम सदस्यों के भाग से अलग होता था

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन लो…

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#2983HadeethEnc[सह़ीह़]

बनू नजीर से प्राप्त धन अल्लाह ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम) को बिना किसी युद्ध के प्रदान किया था और उसके लिए मुसलमानों ने घोड़े और ऊँट नहीं दौड़ाए थे

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि बनू नजीर से प्राप्त धन अल्लाह ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बिना किसी युद्ध के प्रदान किया था और उसके लिए मुसलमानों ने घोड़े और ऊँट नहीं दौड़ाए थे। अतः, वह अल्लाह के रसूल के लिए खास था। उसमें आप अपने परिवार के…

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#2998HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने किसी को क़त्ल किया और उसके पास उसका प्रमाण भी हो, तो उसे उससे छीना हुआ सारा सामान मिलेगा

अबू क़तादा अंसारी (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हुनैन गए। (फिर उन्होंने एक घटना सुनाई।) तो आपने फ़रमायाः जिसने किसी को क़त्ल किया और उसके पास उसका प्रमाण भी हो, तो उसे उससे छीना हुआ सारा सामान मिलेगा। आपने यह बात…

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#3288HadeethEnc[सह़ीह़]

दरअसल, हमसे पहले किसी समुदाय के लिए ग़नीमत का धन हलाल नहीं किया गया था। फिर अल्लाह ने जब हमारी दुर्बलता तथा असमर्थता देखी, तो उसे हमारे लिए हलाल कर दिया।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफूअन रिवायत है किः "नबियों में से किसी नबी (अल्लाह का दरुद व सलाम उनपर नाज़िल हो) ने जिहाद किया, तो अपनी क़ौम से कहाः मेरे साथ कोई ऐसा व्यक्ति न आए, जिसने अभी विवाह किया है तथा वह अपनी पत्नी से मिलना चाह रहा है, लेकिन अभी तक मिला नहीं…

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#3743HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह मूसा पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया

अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हुनैन के दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ग़नीमत के धन के बँटवारे के समय कुछ लोगों को वरीयता दी। इसी क्रम में अक़रा बिन हाबिस को सौ ऊँट दिए, उययना बिन हिस्न को भी इतने ही ऊँट दिए और इनके अलावा कई अरब सर…

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#4238HadeethEnc[सह़ीह़]

कदापि नहीं, मैंने उसे एक धारीदार कपड़े अथवा चोगे के कारण जहन्नम की आग में जलते हुए देखा है, जिसे उसने ग़नीमत के धन से, बँटवारे से पहले ले लिया था।

उमर बिन ख़त्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि जब ख़ैबर के दिन अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथी आकर कहने लगे कि अमुक शहीद है और अमुक शहीद है, यहाँ तक कि एक आदमी के निकट से गुज़रे और उसके बारे में कह दिया कि अमुक शहीद है तो अल्लाह के नबी (सल्लल्ला…

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#4440HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का विजय के वर्ष मक्का में दाखिल हुए तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास आकर कहा कि ख़तल का बेटा काबा के पर्दों से चिमटा हुआ है। सो, आपने फ़रमायाः उसका वध कर दो।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का विजय के वर्ष मक्का में प्रवेश किया तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास आकर कहा कि ख़तल का बेटा काबे के पर्दों से चिमटा हुआ है। सो, आपने फ़र…

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#4458HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अंसारियो! क्या मैंने तुम्हें सत्य की राह से भटका हुआ नहीं पाया तो अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा सीधा रास्ता दिखाया? तुम बिखरे हुए नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा आपस में जोड़ दिया? तुम कंगाल नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा धनी बनाया?

अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम कहते हैं कि जब हुनैन के दिन अल्लाह ने अपने रसूल को गनीमत का धन प्रदान किया तो उसे लोगों और नए-नए इस्लाम ग्रहण करने वालों के बीच बाँट दिया और अंसार को कुछ नहीं दिया। इससे अंसार ने अपने दिलों में कुछ नाराज़गी महसूस की; क्योंकि लोगों को जो कुछ…

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