افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत एवं इतिहास

9 hadeeths in this category
#65815HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता था।

मोमिनों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर…

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#65816HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व…

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#65820HadeethEnc[स़ह़ीह़]

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी। जबकि मुस्लिम की रिवायत में है : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का तकिया, जिस पर आप टेक लगाते थे, चमड़े…

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#65821HadeethEnc[स़ह़ीह़]

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई चीज़, सिवाय अपने सफेद ख़च्चर, अपने हथियार और एक ज़मीन के, जिसे आप सदक़ा कर चुके थे।

अम्र बिन हारिस, जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साले और उम्मुल मोमिनीन जुवैरिया बिन्ते हारिस के भाई हैं, -रज़ियल्लाहु अन्हुम- का वर्णन है, : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई…

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#66184HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अगर वो उस आग में घुस जाते तो क़यामत तक उससे निकल न पाते। अनुसरण केवल शरीअत सम्मत कार्यों में किया जाएगा।

अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, उसका सेनापति एक अन्सारी व्यक्ति को नियुक्त किया तथा लोगों को आदेश दिया कि उसका अनुसरण करें। (एक बार सेनापति को) ग़ुस्सा आ गया। उसने लोगों से पूछा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि…

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#66272HadeethEnc[स़ह़ीह़]

बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि कहा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! मुश्रिकों के विरुद्ध…

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#66303HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई। आप जो कुछ ख़्वाब में देखते, वह सुबह की रोशनी की तरह प्रकट होता। फिर आपको तन्हाई पसन्द हो गई। फिर आप ग़ार-ए-हि…

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#66304HadeethEnc[स़ह़ीह़]

(नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि) "मैं चल रहा था कि मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। सर उठाया तो देखा कि वही फ़रिश्ता जो मेरे पास हिरा में आया था

अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान से रिवायत है कि जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने वह़्य के रुक जाने के बारे में बयान करते हुए अपनी हदीस में कहा है : (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि) "मैं चल रहा था कि मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। सर उठाया तो देखा…

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#66359HadeethEnc[स़ह़ीह़]

नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना।

अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु का समय आ गया, तो आपने सबसे ज़्यादा जिस बात की वसीयत की, वह यह थी : "नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना। नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़…

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