افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत एवं इतिहास

12 hadeeths in this category
#58116HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी एक पत्नी का वलीमा दो मुद्द जौ से किया था।

सफिया बिन्त शैबा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी ए…

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#58117HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया। मैंने मुसलमानों को आपके वलीमे के लिए बुलाया, तो उसमें न रोटी थ…

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#58127HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो शेष स्त्रियों के पास भी सात दिन रहूँगा।

उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जब उनसे निकाह किया, तो उनके पास तीन दिन रहे और फ़रमायाः "तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हार…

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#58130HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते और उनके पास बैठते। (एक दिन) आप हफ़सा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पास गए और उनके यहाँ सामान्य से अधिक रुक गए।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मीठी चीज़ें और मधु पसंद करते थे। सामान्यतः जब अस्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो एक-एक कर अपनी पत्नियों के पास जाते और उनके पास बैठते। (एक दिन) आप हफ़सा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पास गए और उनके यहाँ सामान…

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#58131HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी उस बीमारी के दिनों में, जिसमें आपकी मृत्यु हुई, पूछते थेः "मैं कल कहाँ रहूँगा? मैं कल कहाँ रहूँगा?" दरअसल, आप आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के यहाँ ठहरना चाहते थे। अतः, आपकी पत्नियों ने आपको जहाँ चाहें, वहाँ ठहरने की अनुमति दे दी।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी उस बीमारी के दिनों में, जिसमें आपकी मृत्यु हुई, पूछते थेः "मैं कल कहाँ रहूँगा? मैं कल कहाँ रहूँगा?" दरअसल, आप आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के यहाँ ठहरना चाहते थे। अतः, आपकी पत्नियों ने आपको जह…

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#58132HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का वर्णन है, वह कहती हैं कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते। एक युद्ध में क़ुरआ अंदाज़ी की, तो मेरा न…

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#64607HadeethEnc[सह़ीह़]

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) का यह फ़रमान कि मैं पहला व्यक्ति हूँ, जो अत्यंत कृपाशील अल्लाह के सामने झगड़ने के लिए क़यामत के दिन अपने घुटनों के बल बैठेगा।

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, उन्होंने कहाः मैं पहला व्यक्ति हूँ, जो अत्यंत कृपाशील अल्लाह के सामने झगड़ने के लिए क़यामत के दिन अपने घुटनों के बल बैठेगा। क़ैस बिन अब्बाद कहते हैंः इन्हीं लोगों के बारे में यह आयत उतरी हैः (यह दो पक्ष हैं, जो अपने पाल…

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#64627HadeethEnc[ह़सन]

हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ख़ैबर युद्ध में शरीक हुए, जहाँ हमें बकरियाँ मिलीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया।

अब्दुर रहमान बिन ग़न्म कहते हैंः हम शुरहबील बिन सिम्त के साथ क़िन्नसरीन नगर की सीमाओं में तैनात थे। जब उन्होंने उसपर विजय प्राप्त की, तो वहाँ बकरियाँ और गाएँ मिलीं, जिसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया। फिर मैंने मुआज़ बिन जबल (रज़ियल…

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#65050HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, उन्होंने कहा: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में वह्य उतरी। फिर आप तेरह साल तक मक्का में रहे। उसके बाद आपको हिजरत (पलायन) का आदेश हुआ तो आपने मदीना की तरफ हिजरत (पलायन) किया और आप वहाँ…

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#65411HadeethEnc[स़ह़ीह़]

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता

जाबिर बिन समुरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता, और (वर्णनकर्ता ने) कहा : आप अपनी उस जगह से जहाँ सुबह की नमाज़ पढ़ते थे, सूरज निकलने तक नहीं…

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#65789HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, नजाशी और हर बड़े शासक को उच्च एवं महान अल्लाह की ओर बुलाते हुए पत्र लिखा

अनस रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, न…

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#65812HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि और दया बना दे।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि और द…

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