افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
Islamic Reads · HadeethEnc

Prophetic Hadeeth Encyclopedia

Search and read verified Prophetic hadeeth translations, explanations, benefits, categories and source attribution. Page 16.

Content source:HadeethEnc.com·Version 1.59.0
2,314hadeeths
Advanced search

Search the Hadeeth Encyclopedia

Smart instant results tolerate minor spelling mistakes, with every filter in one place.

213hadeeths
Clear filters
Categories

सीरत एवं इतिहास

12 hadeeths in this category
#11171HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह, मैं इससे मुहब्बत करता हूँ, तू भी इससे मुहब्बत कर और हर उस व्यक्ति से मुहब्बत कर, जो इससे मुहब्बत करे।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि मैं मदीने के किसी बाज़ार में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ था। आप वापस हुए, तो मैं भी वापस हो गया। आप (फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अंहु का घर पहुँचे और) बोलेः "बच्चा कहाँ है? -आपने यह बात तीन बार कही- हसन बिन अली को ब…

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#11175HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़दीजा की सहेलियों को भेजो।"

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#11176HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तक ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अन्हा- जीवित रहीं, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने दूसरा निकाह नहीं किया।

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#11178HadeethEnc[सह़ीह़]

"ऐ आइश! यह जिबरील हैं, जो तुम्हें सलाम कहते हैं।" तो मैंने यूँ जवाब दियाः "व अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु। आप वह देखते हैं, जो मैं नहीं देखती।"

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि एक दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे फरमाया: "ऐ आइश! यह जिबरील हैं, जो तुम्हें सलाम कहते हैं।" तो मैंने यूँ जवाब दियाः "व अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु। आप वह देखते हैं, जो मैं नहीं देखती।" उन्होंने यह -देखने की-…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#11179HadeethEnc[सह़ीह़]

पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइशा का वही स्थान है, जो सारे खानों में सरीद का है।

अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइशा का वही स्थान है, जो सा…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#11180HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं निश्चित रूप से जानता हूँ कि कब तुम मुझ से ख़ुश रहती हो और कब मुझ से नाराज़ रहती हो।

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मैं निश्चित रूप से जानता हूँ कि कब तुम मुझ से ख़ुश रहती हो और कब मुझ से नाराज़ रहती हो।" मैंने कहाः "आप को इसका ज्ञान कैसाहोता है?" आपने फरमाया: "जब तुम मुझसे ख़ुश होती हो,…

Read hadeeth 1Views 0Cards 0Shares
Share
#11188HadeethEnc[सह़ीह़]

इबराहीम मेरा बेटा है। उसकी मृत्यु दूध पीने की अवस्था में हुई है। उसे दो दूध पिलाने वाली दाईयां प्राप्त होंगी, जो जन्नत में उसे दूध पिलाने का कार्य संपन्न करेंगी।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैंः मैंने कोई ऐसा व्यक्ति नहीं देखा, जो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक अपने परिवार पर कृपा करता हो। वह कहते हैंः -आपके पुत्र- इबराहीम मदीने के निकट की एक बस्ती में दूध पी रहे था। आप उन्हें देखने ज…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#11189HadeethEnc[सह़ीह़]

जब इबराहीम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु हुई, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "जन्नत में उसके लिए एक दूध पिलाने वाली निर्धारित कर दी गई है।"

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#11268HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ आइशा ! मेरी आंखें तो सो जाती हैं मगर मेरा दिल नहीं सोता।

अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान से रिवायत है, वह बताते हैं कि उन्होंने आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से पूछा कि रमज़ान में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ कैसी होती थी? उन्होंने फ़रमाया : “रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमज़ान में और रमज़ान के अलावा दिनों में ग्य…

Read hadeeth 5Views 0Cards 0Shares
Share
#11282HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई अमल पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि कहीं लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।

आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है, वह फ़रमाती हैं : “रअल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई अमल पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि कहीं लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए। चुनांचे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चाश्त की…

Read hadeeth 1Views 0Cards 0Shares
Share
#11294HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या आप मुझ से अल्लाह के -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के रोग के संबंध में नहीं बताएंगीं? उन्होंने कहाः क्यों नहीं, जब आप बीमार थे तो आप ने पूछाः क्या लोगों ने नमाज़ पढ़ लिया? हम ने कहाः नहीं, (बल्कि) लोग आप की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- के पास गया और कहा : क्या आप मुझे अल्लाह के -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की बीमारी के संबंध में नहीं बताएंगीं? उन्होंने कहा : क्यों नहीं, जब आप सख़्त बीमार थे तो आप ने पूछा : “क्या…

Read hadeeth 1Views 0Cards 0Shares
Share
#58102HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी-कभी) सारी स्त्रियों के पास जाने के पश्चात एक ही दफा अंत में ग़ुस्ल (स्नान) करते थे।

Read hadeeth 5Views 0Cards 0Shares
Share

Shopping Basket

Loading...