افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मृत्यु

12 hadeeths in this category
#3139HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियाँ आपके पास मौजूद थीं। इतने में फ़ातिमा- रज़ियल्लाहु अन्हा- चलती हुई आईं। उनके चलने का अंदाज़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के चलने के अंदाज़ से कुछ भी अलग नहीं था।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियाँ आपके पास मौजूद थीं। इतने में फ़ातिमा- रज़ियल्लाहु अन्हा- चलती हुई आईं। उनके चलने का अंदाज़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के चलने के अंदाज़ से कुछ भी अलग नहीं था। आपने उन्हें देखा…

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#3306HadeethEnc[सह़ीह़]

आज के बाद तेरे पिता को कोई बेचैनी नहीं होगी।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीमारी अधिक बढ़ गई, तो आपपर बेचैनी छाने लगी। यह देख, फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहाः हाय मेरे पिता की बेचैनी! तो आपने फ़रमायाः "आज के बाद तेरे पिता को कोई बेचैनी नहीं…

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#3484HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुर रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कमरे में दाख़िल हुए। उस समय मैंने आपको अपने सीने से सहारा दे रखा था। अब्दुर रहमान एक हरी मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। आप देर तक उसकी ओर देखते रहे।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अब्दुर रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कमरे में दाख़िल हुए। उस समय मैंने आपको अपने सीने से सहारा दे रखा था। अब्दुर रहमान, एक हरी मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। आप देर तक उ…

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#4179HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू बक्र से कहो कि लोगों को नमाज़ पढ़ाएँ।

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीमारी अधिक बढ़ गई और आपसे नमाज़ के बारे में कहा गया तो फ़रमायाः अबू बक्र से कहो कि लोगों को नमाज़ पढ़ाएँ। इसपर आइशा - रज़ियल्लाहु अन्हा- ने कहाः अबू बक्र एक नर्म दिल व्यक…

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#10959HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आत्मा उस समय निकाली गई जब आप का सिर मेरी गोद व सीने के बीच में था, जब आप की रूह निकली उस समय निकलने वाली सुगंध से उत्तम सुगंध की अनुभूति मेैंने कभी नहीं पाया।

आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से वर्णित है वह कहती हैं किः अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आत्मा…

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#10962HadeethEnc[सह़ीह़]

जब उन्होंने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को स्नान कराया तो उस चीज की खोज शुरू की जो आम तौर से मृत व्यक्ति के शरीर से निकलती है (अर्थात पैशाब पैखाना इत्यादि) पर उन्होंने कुछ भी नहीं पाया तो बोलेः आप पर मेरे बाप कुर्बान जाएं, आप जीवित थे तब भी पाक थे और मृत्युप्राप्त हुए तब भी पाक हैं।

अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है, वह कहते हैं कि जब उन्होंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को स्नान कराया तो उस चीज की खोज शुरू जो आम तौर से मृत व्यक्ति के शरीर से निकलती है (अर्थात पैशाब पैखाना इत्यादि) और उन्होंने कुछ भी नहीं पाया तो बोलेः आप पर मेर…

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#10976HadeethEnc[सह़ीह़]

सबसे अंतिम दृष्टि जो मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर डाली थी वह यह थी कि आप ने पर्दा हटाया जब्कि लोग अबू बकर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पीछे पंक्तियों में खड़े थे।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि सबसे अंतिम दृष्टि जो मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर डाली थी वह यह थी कि आप ने पर्दा हटाया जब्कि लोग अबू बकर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पीछे पंक्तियों में खड़े थे, तो अबू बकर ने चाहा कि पीछे हट जाएं,…

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#10979HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं किसी की आसान मृत्यु पर रश्क नहीं करती थी जब से मैंने अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर मृत्यु की सख़्ती देखी।

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#10980HadeethEnc[सह़ीह़]

जब नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु हुई, तो सहाबा ने कहाः आपको कहाँ दफ़न किया जाए? तब अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- ने कहाः उसी स्थान में जहाँ आपकी मृत्यु हुई है।

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#10982HadeethEnc[ह़सन]

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु के पश्चात अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- आपके पास आए, आपकी दोनों आँखों के बीच बोसा दिया, आपकी दोनों कंपटियों पर दोनों हाथ रखे और फ़रमायाः हाय मेरे नबी! हाय मेरे परम मित्र! हाय मेरे ख़ालिस दोस्त!

आइशा -रज़ियल्लाहु अंहा- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु के पश्चात अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- आपके पास आए, आपकी दोनों आँखों के बीच बोसा दिया, आपकी दोनों कंपटियों पर दोनों हाथ रखे और फ़रमायाः हाय मेरे नबी! हाय मेरे परम मित्र! हाय मेरे ख़ालिस दोस्त…

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#10983HadeethEnc[सह़ीह़]

जिस दिन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने में क़दम रखा, तो उसकी हर चीज़ चमक उठी और जिस दिन आपकी मृत्यु हुई, उसकी हर चीज़ पर अंधेरा छा गया।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि जिस दिन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने में क़दम रखा, तो उसकी हर चीज़ चमक उठी और जिस दिन आपकी मृत्यु हुई, उसकी हर चीज़ पर अंधेरा छा गया। जब हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दफ़न करके हाथ झा…

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