ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे और मुझपर दया कर तथा मुझे रफ़ीक़-ए- आला (नबियों, शहीदों, सिद्दीक़ों तथा नेक लोगों) से मिला दे।
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आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) फ़रमाती हैं कि मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को उस समय यह दुआ पढ़ते हुए सुना, जब आप मेरे शरीर पर टेक लगाए हुए थेः “ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ़ कर दे और मुझपर दया कर तथा मुझे रफ़ीक़-ए-आला (नबियों, शहीदों, सिद्दीक़ों तथा नेक लोगों) से मिला दे।”
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