افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#66184[स़ह़ीह़]
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अगर वो उस आग में घुस जाते तो क़यामत तक उससे निकल न पाते। अनुसरण केवल शरीअत सम्मत कार्यों में किया जाएगा।

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01

Hadeeth text

अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, उसका सेनापति एक अन्सारी व्यक्ति को नियुक्त किया तथा लोगों को आदेश दिया कि उसका अनुसरण करें। (एक बार सेनापति को) ग़ुस्सा आ गया। उसने लोगों से पूछा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने तुम्हें मेरा अनुसरण करने का आदेश नहीं दिया है? लोगों ने उत्तर दिया : अवश्य दिया है। उसने कहा : तुम मेरे लिए लकड़ियाँ जमा करो। लोगों ने (लकड़ियाँ) जमा कर दीं। उसने कहा : आग सुलगाओ। लोगों ने आग सुलगा दी। फिर उसने कहा : उसमें कूद जाओ। लोगों ने कूदने का इरादा कर लिया, लेकिन फिर एक-दूसरे को रोकने लगे और कहने लगे : हम तो आग से ही भागकर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए हैं। वे इसी कशमकश में थे कि आग बुझ गई और उसका गुस्सा भी ठंडा पड़ गया। फिर जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक यह बात पहुँची, तो आपने फ़रमाया : "अगर वो उस आग में घुस जाते तो क़यामत तक उससे निकल न पाते। अनुसरण केवल शरीअत सम्मत कार्यों में किया जाएगा।"
02

Explanation

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, एक अन्सारी व्यक्ति को उसका सेनापति नियुक्त कर दिया और सभी को उसका अनुसरण करने का आदेश दिया। एक बार सेनापति को उनपर ग़ुस्सा आ गया। ग़ुस्से में उनसे कहा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने तुम्हें मेरा अनुसरण करने का आदेश नहीं दिया है? सभी ने कहा : अवश्य दिया है। उसने कहा : मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि लकड़ियाँ जमा करो, आग जलाओ और फिर उसमें कूद जाओ। चुनाँचे, उन्होंने लकड़ियाँ जमा कीं और आग जलाई। फिर जब उसमें प्रवेश करना चाहा, तो एक-दूसरे को देखने लगे। कहने लगे : हमने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण तो केवल इसी आग से बचने के लिए किया है। ऐसे में क्या हमें इसमें कूदना चाहिए? वे यही सोच रहे थे कि आग के शोले बुझ गए और सेनापति का ग़ुस्सा ठंडा हो गया। इसकी सूचना जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मिली, तो फ़रमाया : यदि वे सेनापति की आज्ञा का पालन करते और उसके द्वारा जलाई गई आग में कूद जाते, तो वे वही यातना सहते रहते और दुनिया के अंत तक उससे बाहर निकल नहीं पाते। सृष्टिकर्ता की अवज्ञा वाले कार्यों में किसी सृष्टि की आज्ञा का पालन नहीं किया जाएगा। आज्ञा का पालन तो केवल नेकी के कामों में करना है, गुनाह के कामों में नहीं।
03

Benefits

इस बात का बयान कि अनुसरण केवल नेकी में होता है, अवज्ञा में नहीं, भले ही आदेश देने वाला कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसका अनुसरण करना वाजिब है।
अवज्ञाकारी एकेश्वरवादी को आग की चेतावनी दी गई है, जबकि अल्लाह चाहे तो उसे माफ़ भी कर सकता है।
ग़ज़वा में, और इसी तरह यात्रा में, अमीर (नेतृत्वकर्ता) नियुक्त करने का शरीयत सम्मत होना।

Attribution

[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

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