افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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दुनिया के माया-मोह से दूरी तथा परहेज़गारी

12 hadeeths in this category
#3141HadeethEnc[सह़ीह़]

निर्धन वह नहीं, जो एक या दो खजूर तथा एक या दो निवाला पा कर लौट जाए। असल निर्धन वह है, जो माँगने से बचता हो।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः निर…

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#3584HadeethEnc[सह़ीह़]

दुनिया मोमिन के लिए कारागार और काफ़िर के लिए जन्नत है

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "दुनिया…

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#3850HadeethEnc[सह़ीह़]

यदि मेरे पास उहुद पर्वत के बराबर सोना हो जाए तो मुझे यह अच्छा नहीं लगेगा कि उसका कुछ भी भाग मेरे पास तीन दिन तक बाकी रहे, सिवाय उसके जिसे मैंने क़र्ज़ चुकाने के लिए बचा रखा हो।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यदि मेरे पास उहुद पर्वत के बराबर सोना हो जाए तो मुझे यह अच्छा नहीं लगेगा कि उसका कुछ भी भाग मेरे पास तीन दिन तक बाकी रहे, सिवाय उसके जिसे मैंने क़र्ज़ चुकाने के लिए बचा र…

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#3880HadeethEnc[सह़ीह़]

यह व्यक्ति उस तरह के धरती भर लोगों से उत्तम है।

सह्ल बिन सअद साइदी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के निकट से एक व्यक्ति गुज़रा तो आपने अपने पास बैठे एक अन्य व्यक्ति से कहाः इस आदमी के बारे में तेरी क्या राय है? उसने कहाः यह एक सज्जन व्यक्ति है। इस लायक है कि यदि निकाह का पैग…

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#4189HadeethEnc[सह़ीह़]

कौन मुझे इस बात की गारंटी देगा कि लोगों से कुछ नहीं माँगेगा और मैं उसे जन्नत की गारंटी दे दूँ?

सौबान- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः कौन है जो मुझे इस बात की गारंटी देगा कि लोगों से कुछ नहीं माँगेगा और मैं उसे जन्नत की गारंटी दे दूँ? मैंने कहा कि मैं ऐसा करूँगा। उस दिन के बाद उन्होंने कभी किसी से कुछ नहीं माँग…

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#4205HadeethEnc[सह़ीह़]

हम अपनी झोपड़ी ठीक कर रहे थे कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वहाँ से गुज़रे।

अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि हम अपनी एक झोपड़ी ठीक कर रहे थे कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वहाँ से गुज़रे। आपने पूछाः यह क्या हो रहो है? हमने कहाः झोपड़ी कमज़ोर हो गई है, इसलिए हम इसे ठीक कर रहे हैं। आपने कहाः मैं देखता हूँ…

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#4307HadeethEnc[अल्लामा नववी रह़िमहुल्लाह कहते हैं : ह़दीस़ ह़सन है।]

दुनिया के मोह से आज़ाद रहो, अल्लाह का प्यारा बन जाओगे और लोगों के पास जो कुछ है, उसका लोभ न करो, लोग भी तुम्हें प्यार देंगे।

अबुल अब्बास सह्ल बिन साद साइदी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और बोला : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे कोई ऐसा कार्य बताइए कि मैं उसे करूँ, तो अल्लाह का प्यारा हो जाऊँ और लोगों का भी प्यारा हो जाऊँ। आपने कहा : "…

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#5810HadeethEnc[सह़ीह़]

"उसका कितना भाग कितना भाग बचा हुआ है?" लोगों ने उत्तर दिया : केवल उसका कंधा बचा हुआ है। आपने कहा : "कंधे के सिवा पूरा बचा हुआ है।"

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि लोगों ने एक बकरी ज़बह किया, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पूछा…

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#5840HadeethEnc[ह़सन]

तुममें से जो व्यक्ति इस अवस्था में सुबह करे कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, उसकी जान सुरक्षित हो और उसके पास दिन भर के खाने की वस्तु हो, तो यह ऐसा है, जैसे उसे पूरी दुनिया दे दी गई हो।

अब्दुल्लाह बिन मिहसन अंसारी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से जो व्यक्ति इस अवस्था में सुबह करे कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, उसकी जान सुरक्षित हो और उसके पास दिन भर के खाने की वस्तु हो,…

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#6187HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास एक गुलाम था, जो उन्हें प्रत्येक दिन अपनी कमाई का कुछ भाग दे दिया करता था और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) उसमें से खाया करते थे।

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास एक गुलाम था, जो उन्हें प्रत्येक दिन अपनी कमाई का कुछ भाग दे देता था और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) उसमें से खाते थे। एक दिन वह कोई वस्तु लाया और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) ने उसमें से खा लिया। इतने…

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#65075HadeethEnc[ह़सन]

{ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ}

ज़ुबैर बिन अव्वाम रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : जब यह आयत : {ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ} (फिर निश्चय तुम उस दिन नेमतों के बारे में अवश्य पूछे जाओगे।) [सूरा अल-तकासुर : 8] उतरी, तो ज़ुबैर रज़ियल्लाहु अनहु ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम…

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#65815HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता था।

मोमिनों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर…

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