افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़

12 hadeeths in this category
#10641HadeethEnc[ह़सन]

हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। रात अंधेरी थी और हमें पता न चल सका कि क़िबला किधर है। अतः, हममें से हर व्यक्ति ने अपने विवेक के अनुसार क़िबला का चयन कर नमाज़ पढ़ ली। सुबह जब हमने इसका ज़िक्र नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपपर यह आयत उतरी: {فأينما تولوا فثم وجه الله} [सूरा अल-बक़राः 115] (तुम जिस ओर भी रुख़ करोगे, उधर ही अल्लाह का मुख है।)

आमिर बिन रबीआ (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि हम लोग नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। रात अंधेरी थी और हमें पता न चल सका कि क़िबला किधर है। अतः, हममें से हर व्यक्ति ने अपने विवेक के अनुसार क़िबला का चयन कर नमाज़ पढ़ ली। सुबह जब हम…

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#10643HadeethEnc[सह़ीह़]

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी सवारी पर नफ़ल नमाज़ पढ़ लेते थे, चाहे वह जिधर जा रही हो। लेकिन, जब फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने का इरादा फ़रमाते, तो उतरकर क़िबले की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ते।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी सवार…

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#10644HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब यात्रा कर रहे होते और नफ़ल नमाज़ पढ़ने का इरादा फ़रमाते, तो अपनी ऊँटनी का रुख़ क़िबला की ओर कर लेते और तकबीर कहकर नमाज़ पढ़ने लगते, चाहे आपकी सवारी आपको जिधर ले जा रही होती।

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#10648HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से कोई मस्जिद आए, तो ठीक से देख ले। यदि जूतों में गंदगी या नापाकी दिखाई दे, तो उसे रगड़कर साफ कर ले और उन्हें पहनकर नमाज़ पढ़ ले।

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि एक बार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने साथियों को नमाज़ पढ़ा रहे थे कि अचानक अपने जूते उतारकर अपनी बाईं ओर रख दिए। जब लोगों ने आपको ऐसा करते देखा, तो उन्होंने भी अपने जूते उतार दिए। जब अल्लाह के रसूल (स…

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#10650HadeethEnc[सह़ीह़]

यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है।

मुआविया बिन हकम सुलमी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ रहा था कि अचानक हममें से एक आदमी ने छींका और मैंने "यरहमुकल्लाह" (अल्लाह तुझपर रहम करे) कह दिया। इसपर लोग मुझे घूरने लगे, तो मैंने…

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#10652HadeethEnc[सह़ीह़]

तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “तसबीह (सुबहान…

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#10653HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नमाज़ पढ़ते समय देखा कि आपके सीने से रोने के कारण चक्की के चलने की तरह आवाज़ निकल रही है। आपपर अल्लाह की कृपा हो और शांति की धारा बरसे।

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#10655HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ने कि लिए क़ुबा की ओर निकले।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ने कि लिए क़ुबा की ओर निकले। वह (आगे) कहते हैं : आप वहाँ नमाज़ पढ़ रहे थे कि अंसार आपके पास आए तथा उन्होंने आपको सलाम किया। वह कहते हैं : मैंने बिलाल (रज़ियल्लाहु…

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