افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़ की शर्तें

12 hadeeths in this category
#3009HadeethEnc[सह़ीह़]

लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत उतरी है और आपको क़िब्ला बदलने का आदेश दिया गया है, अतः तुम काबे की ओर मुँह कर लो

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़िल्लाहु अनहु) कहते हैंः लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत उतरी है और आपको क़िब्ला बदलने का आदेश दिया गया है, अतः तुम काबे की ओर मु…

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#3148HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- काबा के अंदर गए। उसामा बिन ज़ैद, बिलाल और उस्मान बिन तलहा- रज़ियल्लाहु अन्हुम- साथ थे।

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैंः अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- काबा के अंदर गए। उसामा बिन ज़ैद, बिलाल और उस्मान बिन तलहा साथ थे। उन्होंने द्वार बंद कर लिया। जब द्वार खोले, तो सबसे पहले मैं ही दाखिल हुआ। मैं बिलाल से मिला और पूछा कि क्या अल्…

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#3450HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह की क़समः मैंने तो अभी तक अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ी है। वर्णनकर्ता कहते हैं कि फिर हम लोग बुतहान की ओर निकले, आपने नमाज़ के वज़ू किया, हमने भी वज़ू किया, फिर सूरज डूबने के बाद अस्र की नमाज़ पढ़ी और उसके बाद मग़रिब की नमाज़ पढ़ी।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि ख़ंदक़ के दिन सूरज डूबने के बाद उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और क़ुरैश के काफ़िरों को बुरा-भला कहने लगे तथा कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा,…

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#3516HadeethEnc[सह़ीह़]

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ज़ुहर की नमाज़ तेज़ धूप में पढ़ते थे, अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते थे जब सूरज साफ़ और रौशन रहता था, मगरिब की नमाज सूरज डूबने के बाद पढ़ते थे।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी कहते हैं कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ज़ुहर की नमाज़ तेज़ धूप में पढ़ते थे, अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते थे जब सूरज साफ़ और रौशन रहता था, मगरिब की नमाज सूरज डूबने के बाद पढ़ते थे, इशा की नमाज़ कभी जल्दी तो कभी देर से पढ़ते थे; जब देखते थे क…

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#3537HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सिर से पानी टपक रहा था और फ़रमायाः यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होत तो मैं इसी समय इस नमाज़ का आदेश देता।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अनहुमा- से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सर से पानी टपक रहा था और…

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#3539HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फज्र की नमाज़ पढ़ते तो आप के साथ मोमिन महीलाएँ, चादर ओढ़ कर नमाज़ के लिए आती थीं। फिर जब वापस जातीं तो कोई भी अंधेरा होने के कारण उन्हें नहीं पहचान पाता था।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फज्र की नमाज़ पढ़ते , तो आप…

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#5217HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम) के सामने सोए रहती और मेरे दोनों पैर आपके किबले की ओर होते। जब आप सजदे में जाते, तो धीरे से मेरे शरीर पर ऊँगली चुभाते और मैं अपने पैर समेट लेती। फिर जब खड़े होते, तो मैं पैर फैलाते लेती। उन दिनों घरों में दिए नहीं होते थे।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम) के सामने सोए रहती और मेरे दोनों पैर आपके किबले की ओर होते। जब आप सजदे में जाते, तो धीरे से मेरे शरीर पर ऊँगली चुभाते और मैं अपने पैर समेट लेती। फिर जब खड़े होते, तो मैं पैर फैलाते लेती। उन…

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#6365HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अपने पिता के साथ अबू बरज़ा असलमी के पास गया। मेरे पिता ने उनसे पूछा कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़र्ज़ नमाज़ कैसे पढ़ते थे?

अबुल मिनहाल सय्यार बिन सलामा कहते हैं कि मैं अपने पिता के साथ अबू बरज़ा असलमी के पास गया। मेरे पिता ने उनसे पूछा कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़र्ज़ नमाज़ कैसे पढ़ते थे? तो फ़रमायाः आप ज़ोहर की नमाज़ सूरज ढलने के बाद पढ़ते और अस्र की नमाज़ ऐसे समय में पढ़ते कि उसके…

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#10421HadeethEnc[सह़ीह़]

जिबरील (अलैहिससलाम) उतरे और मेरी इमामत की, तो मैंने उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी और फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी

इब्ने शिहाब कहते हैं कि उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने अस्र की नमाज़ में कुछ विलंब किया, तो उरवा ने उनसे कहा: सुनिए, जिबरील उतरे और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के इमाम की हैसियत से नमाज़ पढ़ाई। इस पर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहा: ऐ उरवा! आप जो कह रहे हैं उस पर स…

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#10596HadeethEnc[सह़ीह़]

ज़ुहर का समय, सूरज ढलने से आदमी का साया उसके क़द के बराबर होने यानी अस्र का समय प्रवेश करने तक रहता है, अस्र का समय सूरज में पीलापन आने तक रहता है, मग़रिब की नमाज़ का समय क्षितिज से लालिमा के दूर होने तक रहता है, इशा की नमाज़ का समय आधी रात तक रहता है और सुबह की नमाज़ का समय फ़ज्र से सूरज निकलने तक रहता है

अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जुहर का समय, सूरज के ढलने से आदमी का साया उसके क़द के बराबर होने यानी अस्र का समय प्रवेश करने तक रहता है, अस्र का समय सूरज में पीलापन आने तक रहता है, मग़रिब की…

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#10599HadeethEnc[सह़ीह़]

हम अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मगरिब की नमाज़ पढ़ते थे और जब हममें से कोई वापस जाता (और तीर फैंकता) तो वह तीर के गिरने की जगहों को देख लेता

राफे बिन ख़दीज (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)…

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