افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत एवं इतिहास

12 hadeeths in this category
#3447HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह पर भरोसा रखने के अनिवार्य होने तथा इस बात का उल्लेख कि अल्लाह अपने नबियों तथा औलिया का ख़ास ख़याल रखता है।

अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि जब हम ग़ार में थे और मुश्रिक हमें ढूँढते हुए हमारे सर के ऊपर पहुँच चुके थे, तो मैंने उनके पाँव देख लिए। ऐसे में, मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अगर उनमें से किसी ने अपने पाँव के नीचे नज़र डाली, तो हमें देख लेगा। यह सुन आपने…

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#3448HadeethEnc[सह़ीह़]

लेकिन मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के भेद को सामने लाना नहीं चाहता था। यदि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसे छोड़ देते, तो मैं स्वीकार कर लेता।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से रिवायत है कि जब उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) की बेटी हफ़सा विधवा हो गई, तो उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) का कहना है कि मैंने उसमान बिन अफ़्फ़ान (रज़ियल्लाहु अंहु) से भेंट करके हफ़सा का पैग़ाम दिया और कहाः यदि, आप चाहें, तो मैं आपकी शादी अपन…

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#3450HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह की क़समः मैंने तो अभी तक अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ी है। वर्णनकर्ता कहते हैं कि फिर हम लोग बुतहान की ओर निकले, आपने नमाज़ के वज़ू किया, हमने भी वज़ू किया, फिर सूरज डूबने के बाद अस्र की नमाज़ पढ़ी और उसके बाद मग़रिब की नमाज़ पढ़ी।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि ख़ंदक़ के दिन सूरज डूबने के बाद उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और क़ुरैश के काफ़िरों को बुरा-भला कहने लगे तथा कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा,…

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#3463HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।

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#3476HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जुंबी होते और एक ही बर्तन से स्नान कर लेते थे। मैं माहवारी में होती और आपके आदेश से लंगोटा बाँध लेती, फिर आप मुझसे मुबाशिरत करते।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मैं तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जुंबी होते और एक ही बर्तन से स्नान कर लेते थे। मैं माहवारी में होती और आपके आदेश से लंगोटा बाँध लेती, फिर आप मुझसे मुबाशिरत करते। इसी तरह, आप ऐतिकाफ़ में ह…

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#3483HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे याद आया कि हमारे पास सोने का एक टुकड़ा रखा हुआ है। अतः, मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि मेरा ध्यान उसी में अटका रहे। सो, मैंने उसे बाँटने का आदेश दे दिया।

उक़बा बिन हारिस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने मदीने में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे अस्र की नमाज़ पढ़ी। जब आपने सलाम फेरा तो जल्दबाज़ी में खड़े हुए और लोगों की गर्दनें फलांगते हुए अपनी किसी पत्नी के कमरे में गए। आपकी जल्दी देखकर लोग घबरा गए।…

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#3484HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुर रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कमरे में दाख़िल हुए। उस समय मैंने आपको अपने सीने से सहारा दे रखा था। अब्दुर रहमान एक हरी मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। आप देर तक उसकी ओर देखते रहे।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अब्दुर रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कमरे में दाख़िल हुए। उस समय मैंने आपको अपने सीने से सहारा दे रखा था। अब्दुर रहमान, एक हरी मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। आप देर तक उ…

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#3530HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- वज़ू का पानी लेकर निकले तो कोई आपके शरीर के अंगों से गिरने वाले पानी को अपने ऊपर छिड़क रहा था और कोई ले रहा था।

अबू जुहैफ़ा वह्ब बिन अब्दुल्लाह सुवाई- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु- वज़ू का बचा हुआ पानी लेकर निकले तो कोई आपके शरीर…

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#3537HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सिर से पानी टपक रहा था और फ़रमायाः यदि मेरी उम्मत पर कठिन नही होत तो मैं इसी समय इस नमाज़ का आदेश देता।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अनहुमा- से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः आप घर से नकले, इस हाल में कि आप के सर से पानी टपक रहा था और…

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#3570HadeethEnc[सह़ीह़]

इसने कार्य थोड़ा किया और प्रतिफल बड़ा प्रदान किया गया।

बरा बिन आज़िब- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लोहे का कवच पहना हुआ एक व्यक्ति आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं युद्ध करूँ या इस्लाम ग्रहण करूँ? फ़रमायाः "इस्लाम ग्रहण करो, फिर युद्ध करो।" अतः, वह मुसलमान हो गया और उसके…

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#3628HadeethEnc[सह़ीह़]

उसे दे दो, क्योंकि तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे तरीके से उधार चुकाने वाला हो

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास अपने क़र्ज़ का तकाजा करने के लिए आया और आपके साथ अशिष्ट व्यवहार कर डाला। उसका व्यवहार देख सहाबा ने उसे मारने का इरादा कर लिया। परन्तु, अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलै…

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#3696HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तबूक युद्ध से वापस आए, तो लोगों ने आपकी अगवानी की और मैंने बच्चों के साथ सनीयतुल वदा पर आपकी अगवानी की

साइब बिन यज़ीद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तबूक युद्ध से वापस आए, तो लोगों ने आपकी अगवानी की और मैंने बच्चों के साथ सनीयतुल वदा पर आपकी अगवानी की। तथा बुखारी की रिवायत में हैः वह कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अ…

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