افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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अक़ीदा

12 hadeeths in this category
#11222HadeethEnc[सह़ीह़]

क़यामत उस समय तक नहीं आ सकती, जब तक तुम तुर्कों से युद्ध न कर लो, जिनकी आँखें छोटी-छोटी, चेहरे लाल और नाक छोटी तथा चिपटी होगी, तथा उनके चेहरे ऐसे मालूम होंगे जैसे चमड़े चढ़ी हुई ढालें हों। तथा क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम एक ऐसे समुदाय से युद्ध न कर लो, जिनके जूते बालों के होंगे।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "क़यामत उस समय तक नहीं आ सकती, जब तक तुम तुर्कों से युद्ध न कर लो, जिनकी आँखें छोटी-छोटी, चेहरे लाल और नाक छोटी तथा चिपटी होगी, तथा उनके चेहरे ऐसे मालूम होंग…

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#11223HadeethEnc[सह़ीह़]

क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम ख़ूज़ और किरमान के ग़ैरअरब लोगों से युद्ध न कर लो, जिनके चेहरे लाल, नाक चिपटी और आँखें छोटी-छोटी होंगी। उनके चेहरे चमड़े चढ़ी हुई ढालों की तरह प्रतीत होंगे। उनके जूते बालों से बने होंगे।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम ख़ूज़ और किरमान के ग़ैरअरब लोगों से युद्ध न कर लो, जिनके चेहरे लाल, नाक चिपटी और आँखें छोटी-छोटी होंगी। उनके चेहरे चमड़े चढ़ी हुई ढालों की तरह…

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#11227HadeethEnc[सह़ीह़]

\उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क़त्ल किया गया।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को पता नहीं होगा कि उसे किस बात पर क…

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#58210HadeethEnc[सह़ीह़]

याद रहे, रक्त एवं धन से संबंधित जाहिलियत के समय की वह सारी बातें जो गौरवपूर्ण तरीक़े से बयान की जाती हैं और जिनके दावे किए जाते हैं, मेरे पाँव तले हैं, सिवाय हाजियों को पानी पिलाने एवं काबा की सेवा के कार्य के।

अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मक्का विजय के दिन खुतबा (भाषण) दिया तथा फ़रमाया : “याद रहे, रक्त एवं धन से संबंधित जाहिलियत के समय की वह सारी बातें जो गौरवपूर्ण तरीक़े से बयान की जाती हैं और जिनके दा…

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#58238HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़नाने मर्द और मर्दानी औरतों पर लानत फरमाई है तथा आपने फ़रमाया : “उन्हें अपने घरों से निकाल दो।”

अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़नाने मर्द और मर्दानी औरतों पर लानत फरमाई है तथा आपने फ़रमाया : “उन्हें अपने घरों से निकाल दो।” अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि अल्लाह के…

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#58266HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ ख़ालिद, मेरे बाद बहुत-सी घटनाएँ, फ़ितने और मतभेद उत्पन्न होंगे। अतः, यदि तुमसे हो सके कि तुम अल्लाह के मारने वाले बंदे की बजाय मरने वाले बंदे बनो, तो ऐसा ज़रूर करना।

ख़ालिद बिन उरफ़ुता (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मुझसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "ऐ ख़ालिद, मेरे बाद बहुत-सी घटनाएँ, फ़ितने और मतभेद उत्पन्न होंगे। अतः, यदि तुमसे हो सके कि तुम अल्लाह के मारने वाले बंदे की बजाय मरने वाले बंदे बनो, तो ऐसा ज़र…

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#64600HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं हर उस मुसलमान से बरी हूँ, जो काफ़िरों के बीच में रहता हो।

जरीर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़सअम क़बीले की ओर एक सैन्यदल भेजा। (युद्ध के दौरान) उनमें से कुछ लोग बचाव के लिए सजदे में गिर पड़े, लेकिन मुसलमानों ने देर किए बिना उन्हें क़त्ल कर डाला। वर्णनकर्ता का कह…

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#64601HadeethEnc[सह़ीह़]

हिजरत उस समय तक बंद नहीं होगी, जब तक काफ़िरों से युद्ध जारी रहेगा।

अब्दुल्लाह बिन वक़दान सादी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैंः हम एक प्रतिनिधि मंडल के साथ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचे। हममें से हर एक अपनी ज़रुरत लेकर आया था। मैं सबसे अंत में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के निकट पहुँच…

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#64605HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम वापस जाओ, मैं किसी मुश्रिक की मदद हरिगज़ नहीं लूँगा।

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बद्र की ओर निकले। जब 'हर्रा अल-वबरा' में पहुँचे, तो एक व्यक्ति आपसे मिला, जिसकी जुर्रत और बहादुरी के ख़ूब चर्चे थे। उसे देख अल्लाह के रसूल (स…

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#64607HadeethEnc[सह़ीह़]

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) का यह फ़रमान कि मैं पहला व्यक्ति हूँ, जो अत्यंत कृपाशील अल्लाह के सामने झगड़ने के लिए क़यामत के दिन अपने घुटनों के बल बैठेगा।

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, उन्होंने कहाः मैं पहला व्यक्ति हूँ, जो अत्यंत कृपाशील अल्लाह के सामने झगड़ने के लिए क़यामत के दिन अपने घुटनों के बल बैठेगा। क़ैस बिन अब्बाद कहते हैंः इन्हीं लोगों के बारे में यह आयत उतरी हैः (यह दो पक्ष हैं, जो अपने पाल…

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#64625HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं यहूदियों और ईसाइयों को ज़रूर अरब द्वीप से निकाल दूँगा, यहाँ तक कि मुसलमानों के सिवा किसी को नहीं छोड़ूँगा।

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#64673HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के सौ से एक कम निन्यानवे नाम हैं। जिसने उनको याद किया तथा उनके तक़ाज़ों पर अमल किया, वह जन्नत में दाख़िल होगा।

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