افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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अक़ीदा

12 hadeeths in this category
#2945HadeethEnc[स़ह़ीह़]

सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ

उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ।" उमर रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : अल्लाह की क़सम, जिस दिन से मैं…

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#2997HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जिसने हमपर हथियार उठाया, वह हममें से नहीं है।

अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसन…

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#3005HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया

अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अ…

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#3010HadeethEnc[स़ह़ीह़]

इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं…

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#3016HadeethEnc[सह़ीह़]

आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर दी जाएगी। केवल फफोले की तरह उसका निशान बाक़ी रह जाएगा

हुज़ैफ़ा बिन यमान (रज़ियल्लाहु अहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें दो बातें बताई थीं। एक मैंने देख ली है और दूसरी की प्रतीक्षा में हूँ। आपने हमें बताया कि अमानत लोगों के दिलों की जड़ में उतरी। फिर क़ुरआन उतरा और लोगों ने उसे क़ुरआन और सुन्…

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#3024HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।

उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित है कि वह हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फ़रमाया : मैं अच्छी तरह जानता हू…

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#3028HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि एक व्यक्ति नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठा हुआ था कि एक और व्यक्ति उसके पास से गुज़रा। तो उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं इससे मोहब्बत करता हूँ। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या तुमने उसे बताया है?"…

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#3035HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं इसलिए नहीं रो रही हूँ कि मुझे यह मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है, बल्कि इसलिए रो रही हूँ कि आकाश से वह्य उतरने का सिलसिला बंद हो गया है। इस तरह, उन्होंने दोनों को रोने पर विवश कर दिया और वह भी उनके साथ रोने लगे।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु के बाद अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) से कहाः आओ, हम उम्मे ऐमन के पास चलें। उन्हें देखने जाएँ, जैसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन्हें द…

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#3038HadeethEnc[सह़ीह़]

आप हमारे पास जितनी बार आते हैं, उससे अधिक क्यों नहीं आते?

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जिबरील से कहा कि आप हमारे पास जितनी बार आते हैं, उससे अधिक क्यों नहीं आते? तो यह आयत उतरीः "وَمَا نَتَنَزَّل إِلاَّ بِأَمْرِ رَبِّكَ لَهُ مَا بَيْنَ أَيدِينَا وَمَا خَلْفَنا وَمَ…

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#3042HadeethEnc[सह़ीह़]

जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात तथा अतिथि सत्कार तीन दिन है। जो इससे अधिक हो वह अतिथि के ऊपर सदक़ा है।

अबू शुरैह खुवैलिद बिन अम्र खुज़ाई कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायः "जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमायाः एक दिन और एक रात…

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#3069HadeethEnc[सह़ीह़]

तो क्या तुम मुझसे अरब क़बीलों के बारे में पूछ रहे हो? उनमें से जो लोग जाहिलियत काल में श्रेष्ठ थे, वे इसलाम में भी श्रेष्ठ हैं, जब इसलाम का ज्ञान प्राप्त कर लें।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि किसी ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, सबसे उत्तम व्यक्ति कौन है? आपने फ़रमायाः "जो सबसे अधिक अल्लाह का भय खाने वाला हो।" लोगों ने कहाः हम आपसे इसके बारे में नहीं पूछ रहे रहैं। आपने फ़रमायाः तो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) हैं, जो अल्लाह के नबी…

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