افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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विद्यावान तथा विद्यार्थी के आदाब

12 hadeeths in this category
#3005HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया

अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अ…

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#3130HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समय में मैं छोटा च्चा था, और मुझे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कुछ बातें याद होती थीं, परन्तु, उन्हें बयान करने से मुझे केवल यह बात रोकती थी कि मुझसे अधिक आयु वाले लोग भी मौजूद होते थे।

समुरा बिन जुंदुब- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने…

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#3689HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है : एक देहाती अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात…

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#5377HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे भेजें?

अब्दुर रहमान बिन अबू लैला कहते हैं कि काब बिन उजरा मुझसे मिले और कहने लगे : क्या मैं तुम्हें कोई तोहफ़ा न दूँ? अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे…

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#5656HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचा, तो उस समय आप ख़ुतबा दे रहे थे।

अबू रिफ़ाआ तमीम बिन उसैद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचा, तो उस समय आप खुतबा दे रहे थे। मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं एक अजनबी आदमी हूँ, जो अपने धर्म के विषय में ज्ञान अर्जित करने आया है। वह…

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#6262HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त किया, जिससे अल्लाह की खुशी प्राप्त की जाती है

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने ऐसा ज्ञान प्राप्त किया, जिससे अल्लाह की खुशी प्राप्त की जाती है और वह इसे केवल दुनिया प्राप्त करने के लिए सीखता है, तो वह क़यामत के दिन जन्नत की खुश्बू तक नहीं पाएगा…

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#6268HadeethEnc[सह़ीह़]

जिससे ज्ञान से संबंधित कुछ पूछा गया और उस ने उसे छिपा लिया, तो उसे क़यामत के दिन आग की लगाम पहनाई जाएगी

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिससे…

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#6820HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह उस व्यक्ति को ख़ुश व आबाद रखे, जिसने मुझसे कोई बात सुनी और उसे उसी प्रकार दूसरों तक पहुँचा दिया, जिस प्रकार मुझसे सुनी थी। क्योंकि बहुत बार सुनने वाले से वह व्यक्ति अधिक याद रखता है (या अधिक समझदार होता है) जिस तक बात पहुँचाई गई हो।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह उस व्यक्ति को ख़ुश व आबाद रखे, जिसने मुझसे कोई बात सुनी और उसे उसी प्रकार दूसरों तक पहुँचा दिया, जिस प्रकार मुझसे सुनी थी। क्योंकि बहुत बा…

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#8411HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें सूचित किया है कि क्या हो चुका है और क्या होगा। अब हममें अधिक जानकार है जो उन बातों को सबसे अधिक याद रखता है

अबू ज़ैद अम्र बिन अख़तब अंसारी (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें फ़ज्र की नमाज़ पढ़ाई और मिंबर पर चढ़ कर प्रवचन देने लगे, यहां तक कि ज़ुहर का समय हो गया तो उतरे और नमाज़ पढ़ी, फिर मिंबर पर चढ़े और उपदेश देते रहे यहां तक कि…

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#8934HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ लोगो! जिसे किसी बात का ज्ञान हो वह उस बात को कहे और जिसे ज्ञान न हो वह कहे: अल्लाह ही अधिक जानता है, क्योंकि जिसे नहीं जानता उसके बारे में यह कहना कि अल्लाह अधिक जानता है, यह भी ज्ञान है

मसरूक़ कहते हैं कि हम लोग अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास गए, तो उन्होंने फ़रमाया: ऐ लोगो! जिसे किसी बात का ज्ञान हो वह उस बात को कहे और जिसे ज्ञान न हो वह कहे: अल्लाह ही अधिक जानता है, क्योंकि जिसे नहीं जानता उसके बारे में यह कहना कि अल्लाह अधिक जानता है,…

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#10118HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह ज्ञान को लोगों से छीनकर नहीं उठाएगा, बल्कि वह ज्ञान को बंदों से उलेमा को मौत देकर उठाएगा

अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना है: अल्लाह ज्ञान को लोगों से छीनकर नहीं उठाएगा, बल्कि वह ज्ञान को बंदों से उलेमा को मौत देकर उठाएगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम (…

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#11296HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुरआन का सबसे ज़्यादा याद रखता हो वह इमामत करे।

अय्यूब से वर्णित है, वह अबू क़िलाबा से वर्णन करते हैं, वह अम्र बिन सलमा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत करते हैं, अय्यूब कहते हैं कि मुझ से अबू क़िलाबा ने कहा : क्यों नहीं तुम उनसे भेंट कर के उनसे पूछते हो -अर्थात तुम अम्र बिन सलमा रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछो-, वह कहते हैं :…

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