افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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बर्ज़ख़ का जीवन

12 hadeeths in this category
#3010HadeethEnc[स़ह़ीह़]

इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं…

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#3554HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो।

अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो। और अगर सदाचारी नहीं होता, तो कहता है कि हाय मेरा वि…

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#4206HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुसलमान से जब क़ब्र में सवाल होगा तो वह गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।

बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान से जब क़ब्र में सवाल होगा तो वह गवाही देगा कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।" इसी को प्रभुत्वशाली अल्लाह के इस फ़रमान में बय…

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#4929HadeethEnc[सह़ीह़]

दो फूँक मारने के बीच चालीस का अंतराल होगा। लोगों ने कहाः ऐ अबू हुरैरा! क्या चालीस से तात्पर्य चालीस दिन हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस साल मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस महीने मुराद हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा भी नहीं कहता।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः दो फूँक मारने के बीच चालीस का अंतराल होगा। लोगों ने कहाः ऐ अबू हुरैरा! क्या चालीस से तात्पर्य चालीस दिन हैं? उन्होंने कहाः मैं ऐसा नहीं कहता। लोगों ने कहाः चालीस साल मुराद ह…

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#11206HadeethEnc[सह़ीह़]

दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मेरे पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएं आईं और मुझसे कहने लगीं कि क़ब्र वालों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जाता है। मैंने दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि न कर सकी। दोनों चली भी गईं। फिर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरे पास आ…

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#11207HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी ओर वह्य की गई है कि तुम्हें क़ब्रों में कमो-बेश दज्जाल की परीक्षा की भाँति परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।

असमा बिंत अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- खड़े हुए और उस परीक्षा का ज़िक्र किया, जिसका सामना इनसान को अपनी क़ब्र में करना होगा। जब आपने उस परीक्षा का ज़िक्र किया, तो मुसलमान इस क़दर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे कि मैं अल्लाह क…

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#11208HadeethEnc[सह़ीह़]

इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनता हूँ।

अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबंधित इस घटना को मैंने अपनी आँखों से नहीं देखा है, लेकिन मुझे ज़ैद बिन साबि -रज़ियल्लाहु अंहु- ने सुनाया है। वह कहते हैंः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक खच्चर पर सवार हो…

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#11209HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रहा है।"

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#11210HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है। अगर वह जन्नती है, तो जन्नत वालों का और अगर जहन्नमी है, तो जहन्नम वालों का। उससे कहा…

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#11211HadeethEnc[ह़सन]

क़ब्र की कुछ नेमतों और यातनओं का ज़िक्र

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब मुर्दे को -या कहा:तुममें से किसी को- क़ब्र में रखा जाता है, तो उसके पास दो काले-नीले फ़रिश्ते आते हैं। उनमें से एक को 'मुनकर' और दूसरे को 'नकीर' कहा जाता है। दोनों कहते…

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#65005HadeethEnc[स़ह़ीह़]

सुन लो, वह समय आने ही वाला है कि एक व्यक्ति के पास मेरी हदीस पहुँचेगी और वह अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा। हदीस सुनने के बाद वह कहेगा : हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह की किताब है

मिक़दाम बिन मादीकरिब रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "सुन लो, वह समय आने ही वाला है कि एक व्यक्ति के पास मेरी हदीस पहुँचेगी और वह अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा। हदीस सुनने के बाद वह कहेगा : हमारे और तुम्हारे…

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#65021HadeethEnc[स़ह़ीह़]

क़यामत की निशानियों में से कुछ निशानियाँ यह हैं कि ज्ञान उठा लिया जाए, अज्ञान अधिक हो जाए, व्यभिचार अधिक हो जाए, मदिरा पीने का चलन अधिक हो जाए, पुरुष कम हो जाएँ और स्त्रियाँ इतनी अधिक हो जाएँ कि पचास-पचास स्त्रियों का एक ही अभिभावक हो।

अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैं तुमको एक हदीस सुनाऊँगा, जिसे मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुना है और जिसे मेरे सिवा कोई तुम्हें बता नहीं सकता। मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "क़यामत की निशानिय…

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