افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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अक़ीदा

12 hadeeths in this category
#11208HadeethEnc[सह़ीह़]

इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनता हूँ।

अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबंधित इस घटना को मैंने अपनी आँखों से नहीं देखा है, लेकिन मुझे ज़ैद बिन साबि -रज़ियल्लाहु अंहु- ने सुनाया है। वह कहते हैंः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक खच्चर पर सवार हो…

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#11209HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रहा है।"

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#11210HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है। अगर वह जन्नती है, तो जन्नत वालों का और अगर जहन्नमी है, तो जहन्नम वालों का। उससे कहा…

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#11211HadeethEnc[ह़सन]

क़ब्र की कुछ नेमतों और यातनओं का ज़िक्र

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब मुर्दे को -या कहा:तुममें से किसी को- क़ब्र में रखा जाता है, तो उसके पास दो काले-नीले फ़रिश्ते आते हैं। उनमें से एक को 'मुनकर' और दूसरे को 'नकीर' कहा जाता है। दोनों कहते…

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#11213HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने के एक क़िले के ऊपर चढ़कर नीचे की ओर देखा और फ़रमायाः "क्या तुम वह देख रहे हो, जो मैं देख रहा हूँ?" सहाबा ने कहाः नहीं! तो फ़रमायाः "मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे घरों के बीच फ़ितने ऐसे उतर रहे हैं, जैसे (तेज़) बारिश बरसती हो।"

उसामा बिन ज़ैद -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने के एक क़िले के ऊपर चढ़कर नीचे की ओर देखा और फ़रमायाः "क्या तुम वह देख रहे हो, जो मैं देख रहा हूँ?" सहाबा ने कहाः नहीं! तो फ़रमायाः "मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे घरों…

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#11214HadeethEnc[सह़ीह़]

क़यामत से पहले छह निशानियाँ सामने आएँगी, उन्हें गिन लो।

औफ़ बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं तबूक युद्ध के मौक़े पर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के यहाँ पहुँचा। उस समय आप चमड़े के एक ख़ेमे में तशरीफ फरमा थे। आपने फ़रमायाः "क़यामत से पहले छह निशानियाँ सामने आएँगी, उन्हें गिन लोः मेरी मृत्यु, फि…

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#11215HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है।" यह कहते समय आपने अपनी दोनों उँगलियों को फैलाकर उनसे इशारा किया।

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#11218HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी उम्मत के अंतिम ज़माने में एक ख़लीफ़ा होगा, जो गिने बिना लप भर-भरकर लोगों को माल देगा।

अबू नज़रा का वर्णन है, वह कहते हैं कि हम जाबिर बिन अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के पास बैठे थे कि उन्होंने कहाः शीघ्र ही ऐसा होगा कि इराक़ के लोग के पास क़फ़ीज़ और दिरहम आना बंद होजाए । हमने कहाः इसका ज़िम्मेवार कौन होगा? फ़रमायाः ऐसा करने में ग़ैर-अरबों का हाथ होगा…

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#11219HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम अरब उपमहाद्वीप के काफ़िरों से युद्ध करोगे और अल्लाह इस क्षेत्र में तुम्हें विजय प्रदान करेगा, फिर फ़ारस क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षेत्र में भी अल्लाह विजय प्रदान करेगा, फिर तुम रूम क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षेत्र को भी अल्लाह तुम्हारे अधीन कर देगा और फिर तुम दज्जाल से युद्ध करोगे और अल्लाह उसे परास्त करेगा।

नाफ़े बिन उतबा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः हम एक युद्ध में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पश्चिम की ओर से कुछ लोग आए, जो ऊनी वस्त्र धारण किए हुए थे। वे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से एक टीले…

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#11220HadeethEnc[स़ह़ीह़]

यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस धर्म को दाख़िल न कर दे। इस प्रकार, सम्मानित व्यक्ति को सम्मान मिलेगा और अपमानित व्यक्ति का अपमान होगा। ऐसा सम्मान, जो अल्लाह इस्लाम के आधार पर प्रदान करेगा तथा ऐसा अपमान जिससे अल्लाह कुफ़्र की बिना पर दोचार करेगा।

तमीम दारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह फरमाते हुए सुना है : "यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस ध…

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#11221HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अलैहिमस्सलाम- का साथ देगा।

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के मुक्त किए हुए दास सौबान -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि आपने फ़रमायाः "मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अल…

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