افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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#66268HadeethEnc[स़ह़ीह़]

“अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।” पूछा गया कि ऐ अल्लाह के रसूल! यह बात आप किसके बारे में कह रहे हैं? आपने उत्तर दिया : “जिसका पड़ोसी उसके कष्ट से सुरक्षित नहीं रहता।”

अबू शुरैह -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।” पूछा गया कि ऐ अल्लाह के रसूल! यह बात आप…

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#66271HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जिस व्यक्ति ने अपने भाई से 'ऐ काफ़िर' कहा, उसके द्वारा प्रयोग किए गए इस शब्द का हक़दार उन दोनों में से एक बन गया। अगर उसकी बात सही है, तो ठीक है। अगर सही नहीं है, तो उसकी कही हुई बात उसी की ओर लौट आएगी।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिस व्यक्ति ने अपने भाई से 'ऐ काफ़िर' कहा, उसके द्वारा प्रयोग किए गए इस शब्द का हक़दार उन दोनों में से एक बन गया। अगर उसकी बात सही है, तो ठीक ह…

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#66272HadeethEnc[स़ह़ीह़]

बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि कहा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! मुश्रिकों के विरुद्ध…

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#66284HadeethEnc[स़ह़ीह़]

सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आदम की संतान मुझे कष्ट देती है। वह ज़माने को गाली देती है। जबकि मैं ही ज़माने (का मालिक) हूँ। मामला मेरे हाथ में है, मैं ही रात और दिन को पलटता हूँ।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आदम की संतान मुझे कष्ट देती है। वह ज़माने को गाली देती है। जबकि मैं ही ज़माने (का मालिक) हूँ। मामला मेरे हाथ मे…

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#66294HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ जाए, जिस प्रकार के अज़ाब का सामना उन्हें करना पड़ा है।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम लोग अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हिज्र से गुज़रे, तो अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हम लोगों से फ़रमाया : "तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने…

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#66303HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई। आप जो कुछ ख़्वाब में देखते, वह सुबह की रोशनी की तरह प्रकट होता। फिर आपको तन्हाई पसन्द हो गई। फिर आप ग़ार-ए-हि…

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#66304HadeethEnc[स़ह़ीह़]

(नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि) "मैं चल रहा था कि मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। सर उठाया तो देखा कि वही फ़रिश्ता जो मेरे पास हिरा में आया था

अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान से रिवायत है कि जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने वह़्य के रुक जाने के बारे में बयान करते हुए अपनी हदीस में कहा है : (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि) "मैं चल रहा था कि मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। सर उठाया तो देखा…

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#66359HadeethEnc[स़ह़ीह़]

नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना।

अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु का समय आ गया, तो आपने सबसे ज़्यादा जिस बात की वसीयत की, वह यह थी : "नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना। नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़…

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#66370HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।

इम्रान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।" इम्रान कहते हैं : मुझे नहीं पता कि अल्लाह के र…

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#66382HadeethEnc[स़ह़ीह़]

फ़ितने दिलों पर चटाई की तीलियों की तरह एक के बाद एक आते रहते हैं

हुज़ैफ़ा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम लोग उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास मौजूद थे कि इसी दौरान उन्होंने पूछा : आपमें से किसने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़ितनों का ज़िक्र करते हुए सुना है? कई लोगों ने कहा : हमने आपको ऐसा कहते हुए सुन…

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#66383HadeethEnc[स़ह़ीह़]

निश्चय ही बहुत-से फ़ितने सामने आएँगे। सुन लो, फिर एक फ़ितना ऐसा सामने आएगा कि उसके प्रकट होने के बाद बैठा हुआ व्यक्ति उसमें चलने वाले से बेहतर होगा और चलने वाला व्यक्ति उसकी ओर दौड़ने वाले से बेहतर होगा।

उस्मान शह्हाम का वर्णन है, वह कहते हैं : मैं और फ़रक़द सबख़ी, मुस्लिम बिन अबू बकरा के पास उनके देश गए। हमने उनके यहाँ प्रवेश किया और उनसे पूछा : क्या आपने अपने पिता को फ़ितनों के बारे में कोई हदीस बयान करते हुए सुना है? उन्होंने उत्तर दिया : हाँ, मैंने अबू बकरा को यह हद…

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