तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।
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Hadeeth text
इम्रान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।" इम्रान कहते हैं : मुझे नहीं पता कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बाद में दो ज़माने के लोगों का ज़िक्र किया या तीन ज़माने के लोगों का। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम्हारे बाद ऐसे लोग आएँगे, जो ख़यानत करेंगे और भरोसे के पात्र समझे नहीं जाएँगे, गवाही देने के लिए बुलाए नहीं जाएँगे फिर भी गवाही देंगे, मन्नत मानकर उसे पूरा नहीं करेंगे और उनके अंदर मोटापा आम हो जाएगा।"
Explanation
Benefits
इब्न-ए-हजर कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि सहाबा ताबेईन से अफ़ज़ल थे और ताबेईन तबा-ताबेईन से अफ़ज़ल। लेकिन यह उत्कृष्टता सामूहिक रूप से है या व्यक्तिगत रूप से, यह शोध का विषय है और दूसरा मत जमहूर का है।
इस बात का इशारा कि इस्लाम के आरंभित तीन तबक़ों का अनुसरण ज़रूरी है। क्योंकि जिन लोगों का ज़माना अल्लह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के युग से निकट था, वे ज्ञान, प्रतिष्ठा तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के अनुसरण में कहीं आगे थे।
नज़्र : शरई आदेशों एवं निषेधों को मानने के पाबंद व्यक्ति का अपने ऊपर नेकी का कोई ऐसा काम अनिवार्य कर लेना, जिसे शरीयत ने अनिवार्य न किया हो, किसी ऐसे कथन द्वारा जो इसका संकेत देता हो।
ख़यानत, मन्नत पूरी न करने और दुनिया से दिल लगाए रहने की निंदा।
गवाही के निवेदन के बिना गवाही देना उस समय निंदनीय है, जब हक़ वाले को पता हो कि अमुक व्यक्ति के पास मुझसे जुड़े हुए मामले की जानकारी है। अगर उसे पता न हो, तो बिना अनुरोध के दी गई गवाही इस हदीस में दायरे में आएगी : "क्या मैं तुम्हें न बताऊँ कि सबसे अच्छा गवाह कौन है? वह व्यक्ति जो गवाही देने के अनुरोध से पहले गवाही दे।" इस हदीस को इमाम मुस्लिम ने रिवायत किया है।
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