افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#64627HadeethEnc[ह़सन]

हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ख़ैबर युद्ध में शरीक हुए, जहाँ हमें बकरियाँ मिलीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया।

अब्दुर रहमान बिन ग़न्म कहते हैंः हम शुरहबील बिन सिम्त के साथ क़िन्नसरीन नगर की सीमाओं में तैनात थे। जब उन्होंने उसपर विजय प्राप्त की, तो वहाँ बकरियाँ और गाएँ मिलीं, जिसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया। फिर मैंने मुआज़ बिन जबल (रज़ियल…

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#65050HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, उन्होंने कहा: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में वह्य उतरी। फिर आप तेरह साल तक मक्का में रहे। उसके बाद आपको हिजरत (पलायन) का आदेश हुआ तो आपने मदीना की तरफ हिजरत (पलायन) किया और आप वहाँ…

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#65411HadeethEnc[स़ह़ीह़]

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता

जाबिर बिन समुरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता, और (वर्णनकर्ता ने) कहा : आप अपनी उस जगह से जहाँ सुबह की नमाज़ पढ़ते थे, सूरज निकलने तक नहीं…

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#65789HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, नजाशी और हर बड़े शासक को उच्च एवं महान अल्लाह की ओर बुलाते हुए पत्र लिखा

अनस रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, न…

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#65812HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि और दया बना दे।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि और द…

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#65815HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता था।

मोमिनों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर…

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#65816HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व…

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#65820HadeethEnc[स़ह़ीह़]

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का बिस्तर चमड़े का था और उसकी भराई खजूर की छाल की थी। जबकि मुस्लिम की रिवायत में है : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का तकिया, जिस पर आप टेक लगाते थे, चमड़े…

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#65821HadeethEnc[स़ह़ीह़]

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई चीज़, सिवाय अपने सफेद ख़च्चर, अपने हथियार और एक ज़मीन के, जिसे आप सदक़ा कर चुके थे।

अम्र बिन हारिस, जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साले और उम्मुल मोमिनीन जुवैरिया बिन्ते हारिस के भाई हैं, -रज़ियल्लाहु अन्हुम- का वर्णन है, : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई…

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#66184HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अगर वो उस आग में घुस जाते तो क़यामत तक उससे निकल न पाते। अनुसरण केवल शरीअत सम्मत कार्यों में किया जाएगा।

अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक सेना भेजी, उसका सेनापति एक अन्सारी व्यक्ति को नियुक्त किया तथा लोगों को आदेश दिया कि उसका अनुसरण करें। (एक बार सेनापति को) ग़ुस्सा आ गया। उसने लोगों से पूछा : क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि…

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#66272HadeethEnc[स़ह़ीह़]

बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि कहा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! मुश्रिकों के विरुद्ध…

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#66303HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर वह्य की शुरूआत सच्चे ख़्वाबों की शक्ल में हुई। आप जो कुछ ख़्वाब में देखते, वह सुबह की रोशनी की तरह प्रकट होता। फिर आपको तन्हाई पसन्द हो गई। फिर आप ग़ार-ए-हि…

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