तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “तसबीह (सुबहान…
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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “तसबीह (सुबहान…
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ने कि लिए क़ुबा की ओर निकले। वह (आगे) कहते हैं : आप वहाँ नमाज़ पढ़ रहे थे कि अंसार आपके पास आए तथा उन्होंने आपको सलाम किया। वह कहते हैं : मैंने बिलाल (रज़ियल्लाहु…
अबू क़तादा अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि आप लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे और उमामा बिंत अबुल आस, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुपुत्री ज़ैनब की बेटी थीं, आपके कंधे पर थीं। जब आप रुकू करते, तो…
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “दो काल…
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) ने फ़ज्र होने से पहले…
उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हिशाम बिन हकीम (रज़ियल्लाहु अन्हु) को सूरा फुरक़ान पढ़ते सुना। जब मैंने उनके पढ़ने पर ग़ौर किया, तो मालूम हुआ कि उनके तिलावत करने का अंदाज़ उसस…
उबय बिन काब (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिबरील से मिले तथा कहाः “ऐ जिबरील, मैं एक अनपढ़ समुदाय की ओर भेजा गया हूँ, जिसमें बूढ़ी स्त्रियाँ, बूढ़े पुरुष, बच्चे, बच्चियाँ और ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कभी कोई किताब नहीं पढ़ी है।" ज…
आइशा तथा अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाु अन्हुम) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का…
अब्दुल अज़ीज़ बिन रुफ़ै कहते हैं कि मैं तथा शद्दाद बिन माक़िल अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) के पास आए और शद्दाद बिन माक़िल ने उनसे पूछा : क्या नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (आप लोगों के लिए) कुछ छोड़ा है? उन्होंने उत्तर दिया : आपने उसके सिवा कुछ नहीं छ…
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि हारिस बिन हिशाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! आपके पास वह्य कैसे आती है? रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “कभी तो मेरे पास वह्य घंटी के बजने की तरह आती…
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