Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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सीरत एवं इतिहास
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में तेरह वर्षों तक रहे, आपपर क़ुरआन उतरता रहा, तथा मदीने में दस वर्ष।
आइशा तथा अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाु अन्हुम) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का…
“ऐ अंसारियो!” उन्होंने उत्तर दियाः हम उपस्थित हैं ऐ अल्लाह के रसूल! आपने कहाः “तुम लोग कहते हो कि इस व्यक्ति पर अपने वतन का प्रेम हावी हो गया है?” उन्होंने उत्तर दियाः हाँ हमने ऐसा कहा है। आपने कहाः “कतई नहीं! मैं अल्लाह का बंदा तथा उसका रसूल हूँ। मैंने अल्लाह की ओर तथा तुम्हारी ओर हिजरत की है। अब हमारा जीना भी तुम्हारे साथ है और हमारा मरना भी तुम्हारे साथ है।“
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि रमज़ान में मुआविया (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास कई प्रतिनिधि मंडल आए। हममें से कुछ लोग दूसरे लोगों के लिए भोजन तैयार करते थे। चुनांचे अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) अकसर हमें अपने आवास पर बुलाते थे। एक दिन मैंने स…
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बच्चों के साथ खेल रहे थे कि आपके पास जिबरील (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आए और आपको पकड़कर चित लिटा दिया तथा आपके सीने को चीरकर हृदय निकाला, फिर उसमें से जमे हुए रक्त का एक लोथड़ा निकाला और फरमायाः यह आपके शरीर में शैतान का भाग था।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बच्चों के साथ खेल रहे थे कि आपके पास जिबरील (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आए और आपको पकड़कर चित लिटा दिया तथा आपके सीने को चीरकर हृदय निकाला, फिर उसमें से जमे हुए रक्त का एक लोथड़…
ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके लिए मस्जिद में एक ख़ेम लगा दिया था, ताकि निकट से उनकी देखभाल कर सकें।
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल…
"जाने भी दो अबू बक्र! ये ईद के दिन हैं।" मालूम रहे कि वे मिना के दिन थे।
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि मिना के दिनों में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) उनके पास आए। उस समय उनके यहाँ दो लड़कियाँ डफ़ बजा रही थीं तथा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने शरीर को एक कपड़े से ढाँपकर लेटे हुए थे। अबू बक्र ने उन दोनों को डाँटा, तो आपने चेहरे…
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँव पर, उसके काटे जाने के समय ,थूका, तो वह ठीक हो गए।
बुरैदा-रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँ…
हुनैन में हमने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के संग ग़ज़वा (युद्ध) किया, जब शत्रु से हमारी मुठभेड़ हुई तो मैं एक टीले पर चढ़ गया, शत्रुओं में से एक आदमी मेरे सामने आया, तो मैंने उसको तीर मारा किंतु वह मुझ से छुप गया, फिर मुझे पता नहीं उस का क्या हुआ।
सलमा बिन अकवा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है, वह कहते हैं कि हुनैन में हमने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के संग ग़ज़वा (युद्ध) किया, जब शत्रु से हमारी मुठभेड़ हुई तो मैं एक घाटी पर चढ़ गया, शत्रुओं में से एक आदमी मेरे सामने आया, तो मैंने उसको तीर मारा किं…
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपना हाथ मेरे मुख पर फेरा तथा मेरे लिए दुआ की, तो वह एक सौ बीस साल तक जीवित रहे और उन के सिर में केवल कुछ ही बाल सफेद थे।
मुझे कभी आँख आई (नेत्र-शोथ हुई) और न ही कभी सिर में दर्द हुआ जब से अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे चेहरे को पोंछा था, और मेरी आँखों में थुका था (और ऐसा) ख़ैबर के दिन (हुआ था) जब आप ने मुझे झंडा दिया था।
अली बिन अबू तालिब- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैंः मुझे कभी आँख आई (नेत्र-शोथ हुई) और न ही कभी सिर में दर्द हुआ जब से अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे चेहरे को पोंछा था, और मेरी आँखों में थुका था (और ऐसा) ख़ैबर के दिन (हुआ था) जब आप ने मुझ…
मैं क़तादा बिन मिलह़ान के पास उनकी मृत्यु के समय था उसी समय उनके घर के काफी दूर से एक व्यक्ति गुजरा, तो मैंने उस व्यक्ति के गुजरने को क़तादा के चेहरे में देखा,जब मैंने उनको देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उन के मुख पर तेल मल दिया गया हो।
अबुल अला बिन उमैर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं क़तादा बिन मिलह़ान के पास उनकी मृत्यु के समय था उसी समय उनके घर के काफी दूर से एक व्यक्ति गुजरा, तो मैंने उस व्यक्ति के गुजरने को क़तादा के चेहरे में देखा, जब मैंने उनको देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उनके मुख पर तेल मल…
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आत्मा उस समय निकाली गई जब आप का सिर मेरी गोद व सीने के बीच में था, जब आप की रूह निकली उस समय निकलने वाली सुगंध से उत्तम सुगंध की अनुभूति मेैंने कभी नहीं पाया।
आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से वर्णित है वह कहती हैं किः अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आत्मा…

