افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
Islamic Reads · HadeethEnc

Prophetic Hadeeth Encyclopedia

Search and read verified Prophetic hadeeth translations, explanations, benefits, categories and source attribution. Page 85.

Content source:HadeethEnc.com·Version 1.58.0
2,313hadeeths
Advanced search

Search the Hadeeth Encyclopedia

Smart instant results tolerate minor spelling mistakes, with every filter in one place.

1,143hadeeths
Clear filters
Categories

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

12 hadeeths in this category
#58258HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह ने वह आयत उतारी, जिसमें शराब को हराम क़रार दिया है, तो उस समय मदीने में प्रयोग होने वाली सारी शराबें खजूर की होती थीं।

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#58259HadeethEnc[स़ह़ीह़]

हर नशे वाली वस्तु शराब है और हर नशे वाली वस्तु हराम है। जिसने दुनिया में शराब पी और इसी लत के साथ तौबा किए बिना मर गया, वह आख़िरत में उससे वंचित रहेगा।

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "हर नशे वाली वस्तु शराब है और हर नशे वाली वस्तु हराम है। जिसने दुनिया में शराब पी और इसी लत के साथ तौबा किए बिना मर गया, वह आख़िरत में उससे वंचित रहेग…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#58261HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए चमड़े के बर्तन में किशमिश की नबीज़ बनाई जाती थी, जिसे आप उस दिन तथा दूसरे और तीसरे दिन पीते थे। जब तीसरे दिन की शाम होती खुद पीते और अन्य लोगों को पिला देते। फिर भी अगर कुछ बच जाता, तो बहा देते थे।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए चमड़े के बर्तन में किशमिश की नबीज़ बनाई जाती थी, जिसे आप उस दिन तथा दूसरे और तीसरे दिन पीते थे। जब तीसरे दिन की शाम होती खुद पीते और अन्य लोगों को पि…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#58263HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से शराब के बारे में पूछा गया, तो आपने उन्हें शराब बनाने से मना किया (या शराब बनाने को नापसंद किया।) उन्होंने कहाः मैं तो शराब केवल दवा के लिए बनाता हूँ। आपने कहाः "यह दवा नहीं, बल्कि ख़ुद बीमारी है।"

वाइल हज़रमी का वर्णन है कि तारिक़ बिन सुवैद जोअ़फ़ी (रज़ियल्लाहु अंहु) ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से शराब के बारे में पूछा, तो आपने उन्हें शराब बनाने से मना किया (या शराब बनाने को नापसंद किया।) उन्होंने कहाः मैं तो शराब केवल दवा के लिए बनाता हूँ। आपने कहाः "यह दव…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#58265HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर मैं किसी को शरई हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो मुझे कोई अफ़सोस न होगा। लेकिन अगर शराबी को हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो उसकी दियत (हरजाना) दूँगा। क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके बारे में कोई ख़ास हद मुक़र्रर नहीं फरमाई है।

अली बिन अबी तालिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि अगर मैं किसी को शरई हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो मुझे कोई अफ़सोस न होगा। लेकिन अगर शराबी को हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो उसकी दियत (हरजाना) दूँगा। क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#64598HadeethEnc[सह़ीह़]

मुसलमानों की माता आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जिहाद में निकलने की अनुमति माँगी, तो आपने फ़रमायाः "तुम्हारा जिहाद हज है।"

मुसलमानों की माता आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जिहाद म…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#64603HadeethEnc[सह़ीह़]

अकसर ऐसा होता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकलने का इरादा करते, तो किसी और दिशा में निकलने का संकेत देते। परन्तु तबूक युद्ध में ऐसा नहीं किया।

काब बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अकसर ऐसा होता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकलने का इरादा करते, तो किसी और दिशा में निकलने का संकेत देते। परन्तु तबूक युद्ध में ऐसा नहीं किया। यह युद्ध आपने सख़्त गर्मी के मौसम में किया, लम्बे…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#64605HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम वापस जाओ, मैं किसी मुश्रिक की मदद हरिगज़ नहीं लूँगा।

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बद्र की ओर निकले। जब 'हर्रा अल-वबरा' में पहुँचे, तो एक व्यक्ति आपसे मिला, जिसकी जुर्रत और बहादुरी के ख़ूब चर्चे थे। उसे देख अल्लाह के रसूल (स…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share
#64620HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि सफ़र के आरंभ में दुश्मन पर धावा बोलने वालों को,उनके भाग के अतिरिक्त (ख़ुम्स निकालने के बाद ग़नीमत के धन का) एक चौथाई भाग दिया और सफ़र से लौटते समय धावा बोलने वालों को उनके भाग के अतिरिक्त एक तिहाई दिया।

हबीब बिन मसलमा फ़ेहरी कहते हैंः मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि सफ़र के आरंभ में दुश्मन पर धावा बोलने वालों को,उनके भाग के अतिरिक्त (ख़ुम्स निकालने के बाद ग़नीमत के धन का) एक चौथाई भाग दिया और सफ़र से लौटते समय धावा बोलने वालों को उनके भाग के अतिरिक्त एक…

Read hadeeth 0Views 0Cards 0Shares
Share

Shopping Basket

Loading...