افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

12 hadeeths in this category
#10019HadeethEnc[ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)]

इन्होंने उसे मार डाला है, अल्लाह इनका विनाश करे! जब इन्हें पता नहीं था, तो इन्होंने किसी से पूछ क्यों नहीं लिया? क्योंकि न जानने का इलाज पूछना ही है। उसके लिए तो बस इतना काफ़ी था कि तयम्मुम कर लेता और अपने ज़ख़्म पर एक कपड़े का टुकड़ा (या पट्टी) बाँध लेता और फिर उसपर मसह कर लेता और पूरे शरीर को धो लेता

जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि हम एक यात्रा में निकले हुए थे कि हममें से एक व्यक्ति को एक पत्थर आ लगा और उसका सर ज़ख़्मी हो गया। फिर उसे स्वप्नदोष हो गया। ऐसे में, उसने अपने साथियों से पूछा कि क्या तुम मेरे लिए तयम्मुम करने की छूट पाते हो? उन्होंन…

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#10022HadeethEnc[सह़ीह़]

तुमने सुन्नत को पा लिया और तुम्हारी नमाज़ तुम्हारे लिए काफ़ी हो गई

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं: दो व्यक्ति एक यात्रा में निकले। नमाज़ का समय आया तो उनके साथ पानी नहीं था। अतः, पवित्र मिट्टी से तयम्मुम करके नमाज़ पढ़ ली। फिर नमाज़ के समय के अंदर ही पानी मिल गया, तो दोनों में से एक ने वज़ू करके नमाज़ दोहरा…

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#10023HadeethEnc[सह़ीह़]

पवित्र मिट्टी मुसलमान के लिए वज़ू का साधन है, चाहे दस साल ही क्यों न हो जाए। फिर जब तुझे पानी मिल जाए, तो उसे अपने शरीर पर बहा ले, क्योंकि यही उत्तम है

अबू ज़र जुनदुब बिन जुनादा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास कुछ ग़नीमत का माल जमा हुआ, तो आपने फ़रमाया: इन्हें लेकर देहात की ओर चले जाओ। फिर मैं रबज़ा चला आया। यहाँ मैं जुंबी (नापाक) होता तो (पानी उपलब्ध न होने के कारण) पाँच…

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#10025HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी सहायता रोब के द्वारा की गई है, मुझे धरती की कुंजियाँ दी गई हैं, मुझे अहमद नाम दिया गया है, मेरे लिए मिट्टी को पवित्रता प्राप्त करने का साधन बनाया गया है और मेरी उम्मत को सबसे उत्तम उम्मत बनाया गया है

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मुझे वह कुछ दिया गया है, जो मुझसे पहले किसी नबी को नहीं दिया गया। हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! वह क्या है? आपने फ़रमाया: मेरी सहायता रोब के द्वारा की गई है, मुझे धरती…

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#10026HadeethEnc[सह़ीह़]

हमें लोगों पर तीन बातों में फ़ज़ीलत दी गई है। हमारी सफ़ों को फ़रिश्तों की सफ़ों की तरह बनाया गया है, हमारे लिए पूरी ज़मीन को मस्जिद बनाया गया है तथा जब पानी न मिले तो उसकी मिट्टी को हमारे लिए पवित्रता प्राप्त करने का साधन बनाया गया है

हुज़ैफ़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः हमें लोगों पर तीन बातों में फ़ज़ीलत दी गई है। हमारी सफ़ों को फ़रिश्तों की सफ़ों की तरह बनाया गया है, हमारे लिए पूरी ज़मीन को मस्जिद बनाया है तथा जब पानी न मिले तो उसकी मिट्टी…

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#10030HadeethEnc[सह़ीह़]

नहीं, तुम्हारे लिए बस इतना काफ़ी है कि अपने सर पर तीन चुल्लू पानी डाल लो और फिर अपने शरीर पर पानी बहा लो, इससे तुम पवित्र हो जाओगी

उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मैं अपने सर के बालों को मज़बूती से बाँधती हूँ, तो क्या मैं जनाबत [और एक रिवायत में है: और माहवारी से] स्नान के लिए उन्हें खोलूँ? आपने फ़रमाया: नहीं, तुम्हारे लिए बस इतना काफ़ी है कि अपने सर पर तीन चु…

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#10031HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए स्नान का पानी रखा

मैमूना (रज़ियल्लाहु अनहा) से वर्णित है, वह कहती हैं: मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए स्नान का पानी रखा, तो आपने अपने दाएँ हाथ से बाएँ हाथ पर पानी उंडेलकर दोनों हाथों को धोया, फिर अपनी शर्मगाह को धोया, फिर अपने हाथ को धरती पर मारा और उसे मिट्टी पर र…

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#10032HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब जनाबत का स्नान करते तो पहले दोनों हाथों को धोते, फिर दाएँ हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते और अपनी शर्मगाह को धोते। फिर नमाज़ के वज़ू की तरह वज़ू करते

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब जनाबत (संभोग के बाद) का स्नान करते तो पहले दोनों हाथों को धोते, फिर दाएँ हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते और अपनी शर्मगाह को धोते। फिर नमाज़ के वज़ू की तरह वज़ू करते, फिर पानी लेकर बालों की जड़ो…

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#10033HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से कोई अपनी पत्नी से एक बार संभोग करने के बाद दोबारा करना चाहे, तो दोनों के बीच वज़ू कर ले

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब तुममें से कोई अपनी पत्नी से एक बार संभोग करने के बाद दोबारा करना चाहे, तो दोनों के बीच वज़ू कर ले। हाकिम की एक रिवायत में है: इससे दोबारा संभोग करने की प्रबल इच्छाशक…

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#10036HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जुमे के दिन हर व्यस्क व्यक्ति पर स्नान करना अनिवार्य है तथा यह कि वह दातुन करे और मिल सके तो ख़ुशबू भी लगाए।

अम्र बिन सुलैम अंसारी कहते हैं : मैं गवाही देता हूँ कि अबू सईद ने कहा है और उन्होंने गवाही दी है कि अल्लाह…

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