افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

12 hadeeths in this category
#11192HadeethEnc[सह़ीह़]

हर नबी का एक हवारी (निष्ठावान सहायक) होता है और मेरा हवारी ज़ुबैर है।

जाबिर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अहज़ाब युद्ध के दिन फरमायाः "मेरे पास दुश्मन की ख़बर कौन लाएगा?" ज़ुबैर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहाः मैं लाऊँगा। आपने फिर फ़रमायाः "मेरे पास दुश्मन की ख़बर कौन लाएगा?" ज़ुबैर -रज़ि…

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#11205HadeethEnc[ह़सन]

क़ब्र आख़िरत का पहला पड़ाव है। यदि बंदा यहाँ बच गया, तो बाद के पड़ाव इससे आसान हैं। और अगर यहाँ न बच सका, तो बाद के पड़ाव इससे कठिन हैं।

उसमान के आज़ाद किए हुए ग़ुलाम हानी कहते हैंः उसमान -रज़ियल्लाहु अन्हु- जब किसी क़ब्र के पास ख़ड़े होते, तो इतना रोते कि उनकी दाढ़ी भीग जाती। उनसे कहा गया कि आप जन्नत और जहन्नम का ज़िक्र करते हैं, तो नहीं रोते, लेकिन इससे रोते हैं? तो फ़रमायाः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु…

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#11206HadeethEnc[सह़ीह़]

दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मेरे पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएं आईं और मुझसे कहने लगीं कि क़ब्र वालों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जाता है। मैंने दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि न कर सकी। दोनों चली भी गईं। फिर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरे पास आ…

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#11212HadeethEnc[सह़ीह़]

बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अन्हु- की हदीस के आलोक में क़ब्र की नेमतों और यातनओं का वर्णन

बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ एक अनसारी के जनाज़े में निकले। हम क़ब्र के पास पहुँचे। अभी मुर्दे को दफ़न करने का कार्य संपन्न नहीं हुआ था। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बैठ गए और हम भी आपके आस…

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#11296HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुरआन का सबसे ज़्यादा याद रखता हो वह इमामत करे।

अय्यूब से वर्णित है, वह अबू क़िलाबा से वर्णन करते हैं, वह अम्र बिन सलमा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत करते हैं, अय्यूब कहते हैं कि मुझ से अबू क़िलाबा ने कहा : क्यों नहीं तुम उनसे भेंट कर के उनसे पूछते हो -अर्थात तुम अम्र बिन सलमा रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछो-, वह कहते हैं :…

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#11300HadeethEnc[सह़ीह़]

"ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे नीचे नूर रख दे, मेरे सामने नूर रख दे, मेरे पीछे नूर रख दे और मेरे लिए नूर बना दे।"

इब्ने अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह रिवायत करते हैं कि मैंने मैमूना (रज़ियल्लाहु अन्हा) के यहाँ रात बिताई, तो नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- (नींद से उठ कर) खड़े हुए, अपनी आवश्यकता की पूर्ती की, अपना मुख व हाथ धोया, फिर आप सो गए, फिर आप (नींद से उठ कर) ख…

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#58112HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से किसी को दावत-ए-वलीमा के लिए बुलाया जाए, तो उसमें ज़रूर शरीक हो।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फर…

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#58113HadeethEnc[सह़ीह़]

सबसे बुरा खाना वलीमे का वह खाना है, जिसमें धनवानों को बुलाया जाए और निर्धनों को छोड़ दिया जाए और जिसने दावत छोड़ दी, उसने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की नाफ़रमानी की।

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#58114HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से किसी को (वलीमे की दावत में) बुलाया जाए, तो वह दावत क़बूल करे। अगर रोज़ेदार हो, तो दुआ दे और अगर रोज़े से न हो, तो खाए।

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#58120HadeethEnc[स़ह़ीह़]

बच्चे, बिस्मिल्लाह पढ़ लिया करो, दाहिने हाथ से खाया करो और अपने सामने से खाया करो।

उमर बिन अबू सलमा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं बच्चा था और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की देख-रेख में था। (खाना खाते समय) मेरा हाथ बर्तन में चारों ओर घूमा करता था। इसलिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझसे फ़रमाया : "बच्चे, बि…

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