افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

12 hadeeths in this category
#10932HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक मास तक रुकू के बाद क़ुनूत (नाज़िला) पढ़ा, (इस में) आप बनू सुलैम के कुछ क़बीलों- पर बद्दुआ करते थे।

आस़िम से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से क़ुनूत के विषय में पूछा, तो उन्होंने कहा किः यह रुकू के पूर्व है, तो मैंने कहा कि अमूक व्यक्ति का कथन है कि आप कहते हैं कि (क़ुनूत) रुकू के पश्चात है, तो उन्हों ने कहाः उसने झूठ कहा, फिर उन्होंने हम से…

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#10970HadeethEnc[सह़ीह़]

उन लोगों के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस से घृणा करते हैं।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि उन लोगों (सहाबा) के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस…

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#10971HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरी देखभाल के लिए तशरीफ लाये । न ख़च्चर पर सवार थे, और न घोड़े पर (बल्कि पैदल तशरीफ लाये) ।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, उन्होंने फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरी देखभाल क…

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#10974HadeethEnc[सह़ीह़]

आप न तो अपशब्द बोलने वाले थे न ही अश्लील बातें करने वाले और न ही बाजारों में जा कर हल्ला करने वाले, आप बुराई का बदला बुराई से नहीं देते थे, बल्कि आप माफ कर देते तथा नजरअंदाज कर देते।

अबू अब्दुल्लाह अल जदली से वर्णित है वह कहते हैं किः मैंने आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के स्वभाव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा किः आप न तो अपशब्द बोलने वाले थे न ही अश्लील बातें करने वाले और न ही बाजारों में जा कर हल्ला करने व…

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#11148HadeethEnc[स़ह़ीह़]

कोई ऐसा व्यक्ति जहन्नम हरगिज़ नहीं जाएगा, जो बद्र एवं हुदैबिया में शामिल रहा हो।

जाबिर -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़र…

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#11161HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अबू बक्र और उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से फ़रमाया : "यह दोनों नबियों और रसूलों को छोड़ तमाम अगले और पिछले अधेड़ उम्र जन्नतियों के सरदार हैं।

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#11164HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह ने सत्य को उमर की ज़ुबान और दिल में रख दिया है।

अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अंहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "अल्लाह ने सत्य को उमर की ज़ुबान और दिल में रख दिया है।" अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा -कहते हैंः जब भी लोगों के सामने कोई मामला आता और लोग उसके बारे म…

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#11168HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़ातिमा मेरा अंग है, जिसने उसे नाराज़ किया, उसने मुझे नाराज़ किया।

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#11177HadeethEnc[सह़ीह़]

जिबरील एक हरे रंग के रेशमी कपड़े में आइशा का चित्र लेकर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहाः यह दुनिया तथा आख़िरत में आपकी पत्नी है।

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#11188HadeethEnc[सह़ीह़]

इबराहीम मेरा बेटा है। उसकी मृत्यु दूध पीने की अवस्था में हुई है। उसे दो दूध पिलाने वाली दाईयां प्राप्त होंगी, जो जन्नत में उसे दूध पिलाने का कार्य संपन्न करेंगी।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैंः मैंने कोई ऐसा व्यक्ति नहीं देखा, जो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक अपने परिवार पर कृपा करता हो। वह कहते हैंः -आपके पुत्र- इबराहीम मदीने के निकट की एक बस्ती में दूध पी रहे था। आप उन्हें देखने ज…

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#11190HadeethEnc[सह़ीह़]

हर उम्मत का एक 'अमीन' (जिसे अमानतदारी के कारण अन्य लोगों के मुक़ाबले में अधित ख्याति प्राप्त हो) होता है, और हमारी इस उम्मत का 'अमीन' अबू उबैदा बिन जर्राह (रज़ियल्लाहु अन्हु) है।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हुए कहते हैंः "हर उम्मत का एक 'अमीन' (जिसे अमानतदारी के कारण अन्य लोगों के मुक़ाबले में अधित ख्याति प्राप्त हो) होता है, और हमारी इस उम्मत का 'अमीन' अबू उबैदा बिन जर्राह (रज़ियल्लाहु अन्हु) ह…

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#11191HadeethEnc[ह़सन]

उहुद युद्ध के दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- दो-दो कवच पहने हुए थे। आप एक चट्टान पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन चढ़ नहीं पा रहे थे। ऐसे में, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तलहा -रज़ियल्लाहु अन्हु- को अपने नीचे बिठाया, उनके ऊपर चढ़े और चट्टान पर सीधे खड़े हो गए। वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः " तलहा (जन्नत का हक़दार बन गया।"

ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि उहुद युद्ध के दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- दो-दो कवच पहने हुए थे। आप एक चट्टान पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन चढ़ नहीं पा रहे थे। ऐसे में, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तलहा (रज़ियल्लाहु अन्हु) को अपने नीच…

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