افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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शरई आदाब

12 hadeeths in this category
#3689HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है : एक देहाती अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात…

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#3706HadeethEnc[स़ह़ीह़]

एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्…

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#3757HadeethEnc[सह़ीह़]

हम दूध में से अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का हिस्सा उठाकर रख लेते थे। आप रात को आते और धीरे से सलाम करते ताकि सोने वाला तो न जागे, परन्तु जागने वाला सुन ले।

मिक़दाद- रज़ियल्लाहु अन्हु- अपनी वर्णित एक लंबी हदीस में कहते हैंः हम दूध में से अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का भाग उठाकर रख लेते थे। आप रात को आते और धीरे से सलाम करते ताकि सोने वाला तो न जागे, परन्तु जागने वाला सुन ले। अतः, अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि…

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#4192HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि उसने मानो, मुझे जागते में देखा क्योंके शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिस…

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#4209HadeethEnc[सह़ीह़]

देखो, यदि इसने बिस्मिल्लाह कहा होता तो यह खाना तुम्हारे लिए काफ़ी होता।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने कुछ साथियों के साथ खाना खा रहे थे कि एक देहाती आया और उसे दो निवालों में चट कर गया। यह देख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः देखो, यदि इसने बिस्मिल्लाह कहा होता तो…

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#4212HadeethEnc[ह़सन]

एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।

वहशी बिन हर्ब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथियों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! हम खाते हैं लेकिन संतुष्ट नहीं होते? आपने कहाः शायद तुम अलग-अलग खाते हो? उन्होंने कहाः हाँ! फ़रमायाः एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम ल…

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#4219HadeethEnc[सह़ीह़]

दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो खुजूरों को एक साथ मुँह में डालने से मना किया है। फिर कहने लगेः हाँ, यदि साथ में खाने वाला अपने भाई को अनुमति दे दे तो कोई बात नहीं है।

जबला बिन सुहैम कहते हैं कि एक बार हमें अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर के साथ अकाल का सामना करना पड़ा। इसी बीच हमें खाने को कुछ खुजूरें दी गईं। हम खाने लगे तो अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- हमारे आस-पास टहलने लगे और कहने लगेः दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंक…

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#4243HadeethEnc[स़ह़ीह़]

सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।" जबकि सहीह बुख़ारी में है : "छोटा बड़े को सलाम…

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#4294HadeethEnc[सह़ीह़]

यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनुमति दो तो ठीक है, वरना वापस हो जाएगा। उसने कहाः अल्लाह के रसूल! बल्कि मैं उसे अनुमति देता हूँ।

अबू मसऊद बदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अन्य चार आदमियों के साथ खाने को बुलाया। (जाते समय) एक आदमी उनके पीछे हो लिया। जब दरवाज़े तक पहुँचे, तो आपने फ़रमायाः यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनु…

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