Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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शरई आदाब
लोगों को पिलाने वाला सबसे अंत में पीता है।
मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ज़मज़म का पानी पिलाया और आपने खड़े-खड़े पी लिया।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ज़मज़म का पानी पिलाया और आपने खड़े होकर पी लिया। नज़्ज़ाल बिन सबरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अली- रज़ियल्लाहु अन्हु- रहबा द्वार में आए और खड़े होकर पानी पिया…
किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़र…
शैतान आदम की संतान की रगों में लहू की तरह दौड़ता है। इसलिए मुझे डर हुआ कि शैतान तुम्हारे दिलों में कोई गलत ख़्याल न डाल दे।
सफ़िय्या बिंत हुयय- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐतिकाफ़ की हालत में थे कि मैं रात के समय आपसे मिलने गई। आपसे बात करने के बाद जब वापस होने के लिए खड़ी हुई, तो आप भी मुझे छोड़ने के लिए खड़े हुए। (उन दिनों सफ़िय्या का निवास उसामा…
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हम लोग चलते-फिरते खा लेते थे और खड़े होकर पी लेते थे।
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने…
मुसलमान का तहबंद आधी पिंडली तक होना चाहिए और यदि आधी पिंडली एवं टखने के बीच हो, तो भी कोई हर्ज (अथवा गुनाह) नहीं है। हाँ, जो दोनों टखनों से नीचे होगा, वह जहन्नम में होगा, तथा जो अपना तहबंद अभिमान के तौर पर लटकाएगा, अल्लाह उसपर अपनी नज़र नहीं डालेगा।
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "मुसलमान का तहबंद आधी पिंडली तक होना चाहिए और यदि आधी पिंडली एवं टखने के बीच हो, तो भी कोई हर्ज (अथवा गुनाह) नहीं है। हाँ, जो दोनों टखनों से नीचे होगा…
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी किसी खाने में ऐब नहीं निकाला। यदि इच्छा हुई, तो खाया और यदि इच्छा नहीं हुई, तो छोड़ दिया।
जब तुममें से किसी को जमाही आए, तो अपना हाथ मुँह पर रखकर उसे रोके। क्योंकि शैतान अंदर दाख़िल हो जाता है।
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने…
क्या तुम जानते हो कि ग़ीबत (चुग़लखोरी-पिशुनता) क्या है?" सहाबा ने कहा : अल्लाह और उसका रसूल अधिक जानते हैं। फ़रमाया : "तेरा अपने भाई की चर्चा ऐसी बात से करना, जो उसे पसंद न हो
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या तुम जानते हो कि ग़ीबत (चुग़लखोरी-पिशुनता) क्या है?" सहाबा ने कहा : अल्लाह और उसका रसूल अधिक जानते हैं। फ़रमाया : "तेरा अपने भाई की चर्चा ऐसी बात से करना, जो उसे पसंद न ह…
जब तुम तीन व्यक्ति एक साथ रहो, तो दो लोग अलग से कानाफूसी न करें, यहाँ तक कि तुम अन्य लोगों से घुल-मिल जाओ।
एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार करो, जब तुमसे शुभचिंतन की आशा रखे तो उसका शुभचिंतक बनो, जब छींकने के बाद अल्लाह की प्रशंसा करे तो 'यरहमुकल्लाह' कहो, जब बीमार हो तो उसका हाल जानने जाओ और जब मर जाए तो उसके जनाज़े में शामिल हो।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार…

