एक रात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी जिसमें आपने सूरा बक़रा पढ़ना शुरू किया।
हुज़ैफ़ा बिन यमान- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि एक रात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी। आपने सूरा बक़रा पढ़ना शुरू किया। मैंने सोचा, शायद सौ आयतों के बाद रुकू करेंगे, लेकिन पढ़ना जारी रखा। मैंने सोचा, शायद इसे एक रकअत में पढ़ेंगे, प…

