افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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Prophetic Hadeeth Encyclopedia

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#10561HadeethEnc[सह़ीह़]

हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे, इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है!

ज़ैद बिन साबित (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे। इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है! हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों कहा? तो आपने फ़रमाया: क्योंकि दयावान (अल्लाह) क…

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#10562HadeethEnc[सह़ीह़]

जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर डूब जाए तथा सूरज डूबने एवं निकलने का समय देखकर ही नमाज़ न पढ़ो; क्योंकि सूरज शैतान के दो सींगों के बीच में निकलता है

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ त…

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#10563HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे कुछ पत्थर ला दो; उनसे मुझे इस्तिंजा करना है, मगर हड्डी तथा गोबर न लाना

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ वज़ू तथा इस्तिंजा के पानी का बर्तन लेकर चलते थे। एक दिन वह साथ में थे कि आपने फ़रमाया: यह कौन है? उन्होंने कहा: अबू हुरैरा। आपने फ़रमाया: मुझे कुछ पत्थर ला दो; उनसे मुझे इस्त…

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#10564HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ उमर! शैतान तुम से डरता है, मैं बैठा था, तो यह दफ़ बजाती रही, अबू बक्र आए तो बजाती रही, अली आए तो बजाती रही, उसमान आए तो भी बजाती रही, लेकिन ऐ उमर! जब तुम आए तो इसने दफ़ फेंक दिया

बुरैदा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकले। वापस आए तो एक काली- कलौटी दासी आकर कहने लगी: ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने मन्नत मानी थी कि यदि अल्लाह आपको सुरक्षित वापस ले आए, तो मैं आपके सामने दफ़ बजाऊँगी और गाऊँगी। यह स…

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#10566HadeethEnc[सह़ीह़]

उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेता है

साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि उमर (रज़ियल्लाहु अनहु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी। उस समय आपके पास क़ुरैश की कुछ स्त्रियाँ मौजूद थीं, जो आपसे ज़ोर- ज़ोर से बातें कर रही थीं और आपसे अधिक (तवज्जो अथवा नान- न…

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#10567HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरे पास जिन्नों की ओर से एक बुलाने वाला आया था, अतः, मैं उसके साथ गया और उन्हें क़ुरआन सुनाया

आमिर कहते हैं कि मैंने अलक़मा से पूछा: क्या अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) जिन्नों से मुलाक़ात वाली रात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मौजूद थे? उनका कहना है कि अलक़मा ने उत्तर दिया: ख़ुद मैंने अब्दुल्लाह बिन मसऊद से पूछा था कि क्या जिन्नों वाल…

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#10568HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी उम्मत की मौत नेज़े के आघात तथा ताऊन (चेचक) से होगी

अबू मूसा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मेरी उम्मत की मौत नेज़े के आघात तथा ताऊन से होगी। किसी ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! नेज़े का आघात तो हम समझ गए, लेकिन यह ताऊन क्या है? आपने फ़रमाया: जिन्नों में से तुम्हारे दुश्मन…

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#10569HadeethEnc[सह़ीह़]

इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है, फिर अपनी सेनाओं को भेजता है, उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव करने वाला होता है

जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंन…

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#10570HadeethEnc[सह़ीह़]

बनू ज़ुरैक़ के एक व्यक्ति ने, जिसे लबीद बिन आसम कहा जाता था, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जादू कर दिया था, जिसके कारण आपको लगता था कि आपने कोई काम कर लिया है, हालाँकि वह काम नहीं किया होता

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि बनू ज़ुरैक़ के एक व्यक्ति ने, जिसे लबीद बिन आसम कहा जाता था, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जादू कर दिया था, जिसके कारण आपको लगता था कि आपने कोई काम कर लिया है, हालाँकि वह काम नहीं किया होता। यहाँ तक कि एक दिन या एक रात…

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#10571HadeethEnc[सह़ीह़]

इन शौच के स्थानों में शैतान तथा जिन्न उपस्थित रहते हैं, अतः, जब तुममें से कोई शौच के स्थान में आए, तो कहे: मैं नापाक जिन्नों और नापाक जिन्नियों से अल्लाह की शरण में आता हूँ

ज़ैद बिन अरक़म (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इन शौच के स्थानों में शैतान तथा जिन्न उपस्थित रहते हैं। अतः, जब तुममें से कोई शौच के स्थान में आए, तो यह दुआ पढ़े: أعوذُ باللهِ مِنَ الخُبُثِ والخَبَائث अर्थात, मैं नापाक…

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#10572HadeethEnc[सह़ीह़]

जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है, वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया और उसने सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया गया, तो मैंने इनकार कर दिया, अतः मेरे लिए जहन्नम है

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु् अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है। वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया…

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#10573HadeethEnc[सह़ीह़]

हमारे पास अबू जुमुआ अंसारी आए और फ़रमाया: हम लोग दस व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे, जिनमें मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अनहु) भी मौजूद थे, हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या सवाब के मामले में कोई हमसे भी आगे बढ़ सकता है?

इब्ने जुबैर कहते हैं: हमारे पास अबू जुमुआ अंसारी (रज़ियल्लाहु अनहु) आए और फ़रमाया: हम लोग दस व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे, जिनमें मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अनहु) भी मौजूद थे। हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! हम आप पर ईमान लाए और हमने आपका अनुस…

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