افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़ में ग़लती, तिलावत तथा शुक्र के सजदे

12 hadeeths in this category
#3089HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उन्हें ज़ुहर की नमाज़ पढ़ाते समय दो रकअतों के बाद बैठने के बजाय खड़े हो गए, तो लोग भी आपके साथ खड़े हो गए, यहाँ तक कि जब नमाज़ पूरी कर ली और लोग आपके सलाम फेरने की प्रतीक्षा करने लगे, तो बैठकर ही "अल्लाहु अकबर" कहा और सलाम फेरने से पहले दो सजदे किए, फिर सलाम फेरा।

अब्दुल्लाह बिन बुहैना- रज़ियल्लाहु अन्हु- जो अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सहाबी थे का वर्णन है कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उन्हें ज़ुहर की नमाज़ पढ़ाते समय दो रअतों के बाद बैठने के बजाय खड़े हो गए, तो लोग भी आपके सााथ खड़े हो गए, यहाँ तक कि जब नमाज…

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#4853HadeethEnc[सह़ीह़]

सजदा सह्व के बारे में ज़ुल यदैन की हदीस।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें ज़ुहर अथवा अस्र की नमाज़ पढ़ाई। (इब्ने सीरीन कहते हैं कि अबू हुरैरा ने नमाज़ का नाम लेकर बताया था, लेकिन मुझे याद नहीं रहा) वह कहते हैं कि आपने हमें दो रकअत पढ़ाकर सलाम फेर दिया…

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#10572HadeethEnc[सह़ीह़]

जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है, वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया और उसने सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया गया, तो मैंने इनकार कर दिया, अतः मेरे लिए जहन्नम है

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु् अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है। वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया…

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#11229HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़ुहर अथवा अस्र की नमाज़ -मुहम्मद बिन सीरीन कहते हैं कि मुझे यही लगता है कि वह अस्र की नमाज़ थी- दो रकात पढ़ी और सलाम फेर दिया। उसके बाद मस्जिद के अगले भाग में गड़ी हुई एक लकड़ी के पास गए और उस पर अपना हाथ रखा।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने जुहर अथवा अस्र की नमाज़ -मुहम्मद बिन सीरीन कहते हैं कि मुझे यही लगता है कि वह अस्र की नमाज़ थी- दो रकात पढ़ी और सलाम फेर दिया। उसके बाद मस्जिद के अगले भाग में गड़ी हुई एक लकड़ी के पास गए और उस…

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#11231HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जब तुममें से किसी को नमाज़ में संदेह हो जाए और याद न रहे कि कितनी रकात पढ़ी है, तीन अथवा चार? तो संदेह को परे डाल दे और जिस पर यक़ीन हो, उसे आधार बनाए। फिर सलाम फेरने से पहले दो सजदे कर ले।

अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी को नमाज़ में संदेह हो जाए और याद न रहे कि कितनी रकात पढ़ी है, तीन अथवा चार? तो संदेह को परे डाल दे और जिस पर यक़ीन हो, उसे आधार बनाए।…

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#11232HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर नमाज़ के बारे में कोई नया आदेश आया होता, तो मैं तुम्हें ज़रूर बता देता। लेकिन मैं भी तुम्हारी तरह एक इनसान हूँ, जिस तरह तुम भूलते हो, मैं भी भूलता हूँ। इसलिए जब मैं भूल जाऊँ, तो मुझे याद दिला दिया करो। और तुममें से जिसे अपनी नमाज़ में शक हो, वह सोचकर यह जानने का प्रयास करे कि सही मायने में कितनी रकात पढ़ी है, फिर उसी के अनुसार अपनी नमाज़ पूरी करे। फिर सलाम फेरे और दो सजदे कर ले।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने नमाज़ पढ़ी। -इबराहीम कहते हैंः मुझे नहीं मालूम कि आपने नमाज़ में कुछ इज़ाफा कर दिया था या कमी कर दी थी।- जब सलाम फेरा, तो आपसे कहा गयाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्…

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#11234HadeethEnc[सह़ीह़]

हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को ऐसा ही करते देखा है, जैसा मैंने किया है।

ज़ियाद बिन अलाक़ा कहते हैं कि हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः…

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#11237HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें नमाज़ पढ़ाते समय सूरा «إذا السماء انْشَقَّتْ» पढ़ी और तिलावत का सजदा किया। जब नमाज़ पढ़ चुके, तो उन्होंने बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने भी इस सूरा में सजदा किया है।

अबू राफ़े का वर्णन है, वह कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें नमाज़ पढ़ाते समय सूरा «إذا ا…

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#11238HadeethEnc[सह़ीह़]

सूरा “साद” का सजदा उन सजदों में नहीं है जो अनिवार्य हैं। अलबत्ता मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को इसमें सजदा करते देखा है।

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#11240HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सामने सूरा 'नज्म' तिलावत की, तो आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसमें सजदा नहीं किया।

ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सा…

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#11241HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि क्या सूरा 'हज्ज' में दो सजदे हैं? तो फ़रमायाः "हाँ, तथा जो दोनों सजदे न करना चाहे, वह उन दोनों आयतों को न पढ़े।"

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