افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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Prophetic Hadeeth Encyclopedia

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#10415HadeethEnc[सह़ीह़]

सर्वशक्तिमान अल्लाह ने सृष्टियों की रचना अंधेरे में की और उनके ऊपर अपना कुछ प्रकाश डाला। अतः, जिसे उस नूर का कुछ अंश प्राप्त हुआ, उसे सीधा मार्ग मिल गया और जिसे प्राप्त न हो सका, वह भटक गया। इसी लिए मैं कहता हूँ: क़लम अल्लाह के ज्ञान पर सूख गई है

अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है: सर्वशक्तिमान अल्लाह ने सृष्टियों की रचना अंधेरे में की और उनके ऊपर अपना कुछ प्रकाश डाला। अतः, जिसे उस नूर का कुछ अंश प्राप्त हुआ, उसे सीधा मार्ग मिल…

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#10416HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के निन्यानवे, एक कम सौ नाम हैं, जिसने उन्हें याद कर लिया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा, अल्लाह एक है और वह विषम संख्या को पसंद करता है

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#10417HadeethEnc[सह़ीह़]

तीन व्यक्ति कहीं जा रहे थे कि अचानक बारिश आ गई, वे पहाड़ की एक गुफा में जा छिपे, इतने में एक चट्टान लुढ़क कर आई

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: तीन व्यक्ति कहीं जा रहे थे कि अचानक बारिश आ गई। वे पहाड़ की एक गुफा में जा छिपे। इतने में एक चट्टान लुढ़क कर आई (और गुफा के द्वार को बंद कर दिया)। आप कहते हैं: ऐ…

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#10418HadeethEnc[ह़सन]

मैंने जिबरील को सिदरतुल मुनतहा के पास देखा, उनके छह सौ पर थे

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मैंने जिबरील (अलैहिस्सलाम) को सिदरतुल मुनतहा के पास देखा। उनके छह सौ पर थे। वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैंने आसिम से परों के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताने से इनकार कर…

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#10419HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने जिबरील को सिदरतुल मुनतहा के पास देखा, उनके छह सौ पर थे, उनके परों से विभिन्न रंगों के मोती और माणिक झड़ रहे थे

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि उन्होंने क़ुरआन की आयतः {ولقد رآه نَزْلَةً أُخرى} अर्थात, उन्होंने उसे एक बार और भी उतरते देखा) [सूरा अन-नज्मः 13] के बारे में कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मैंने जिबरील (अलैहस्सलाम) क…

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#10420HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अबू आइशा! तीन बातें ऐसी हैं कि जिसने उनमें से कोई एक बात कही, उसने अल्लाह पर बहुत बड़ा झूठ बाँधा

मसरूक़ कहते हैं कि मैं आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) के पास बैठा था कि उन्होंने कहा: ऐ अबू आइशा! तीन बातें ऐसी हैं कि जिसने उनमें से कोई एक बात कही, उसने अल्लाह पर बहुत बड़ा झूठ बाँधा। मैंने कहा: यह तीन बातें क्या हैं? तो उन्होंने कहा: जिसने यह धारणा रखी कि मुहम्मद (सल्लल्लाह…

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#10421HadeethEnc[सह़ीह़]

जिबरील (अलैहिससलाम) उतरे और मेरी इमामत की, तो मैंने उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी, फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी और फिर उनके पीछे नमाज़ पढ़ी

इब्ने शिहाब कहते हैं कि उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने अस्र की नमाज़ में कुछ विलंब किया, तो उरवा ने उनसे कहा: सुनिए, जिबरील उतरे और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के इमाम की हैसियत से नमाज़ पढ़ाई। इस पर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहा: ऐ उरवा! आप जो कह रहे हैं उस पर स…

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#10422HadeethEnc[ह़सन]

इसरा की रात जब मैं (फ़रिश्तों की) उच्चतम सभा में जिबरील के निकट से गुज़रा, तो (सर्वशक्तिमान) अल्लाह के भय के कारण उनकी हालत पतले पुराने कपड़े की तरह थी

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इसरा की रात जब मैं (फ़रिश्तों की) उच्चतम सभा में जिबरील के निकट से गुज़रा, तो पाया कि (सर्वशक्तिमान) अल्लाह के भय के कारण उनकी हालत पतले पुराने कपड़े की तरह जीर्ण थ…

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#10543HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी- कभी) जनाबत की हालत में पानी छूए बिना सो जाते थे

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (कभी- कभी) जना…

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#10545HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं कैसे चैन से रह सकता हूँ, जबकि सूर फूँकने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने सूर को मुँह से लगा रखा है और (सूर फूँकने की तैयारी के तौर पर) अपनी पेशानी को झुका रखा है और आदेश की प्रतीक्षा में कान लगा रखा है कि आदेश मिलते ही सूर फूँक दे

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मैं कैसे चैन से रह सकता हूँ, जबकि सूर फूँकने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने सूर को मुँह से लगा रखा है और (सूर फूँकने की तैयारी के तौर पर) अपनी पेशानी को झुका रखा है और आदेश की प्…

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#10546HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे इस बात की अनुमति दी गई है कि अर्श को उठाने वाले फ़रिश्तों में से एक फ़रिश्ते के बारे में बताऊँ, दरअसल, उसकी कर्णपाली (कान की लौ) से कंधे तक की दूरी सात सौ साल की मसाफ़त के बराबर है

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मुझे इस बात की अनुमति दी गई है कि अर्श को उठाने वाले फ़रिश्तों में से एक फ़रिश्ते के बारे में बताऊँ। दरअसल, उसकी कर्णपाली (कान की लौ) से कंधे तक की दूरी सात सौ साल…

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#10548HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या मैं उस व्यक्ति से लज्जा न करूँ, जिससे फ़रिश्ते लज्जा करते हैं?

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरे घर में लेटे हुए थे और आपकी दोनों रानें या पिंडलियाँ खुली हुई थीं। इसी बीच अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) ने अंदर आने की अनुमति माँगी, तो उनको उसी हाल में आने की अनुमति दे दी और उनसे बात की।…

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