افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#10013HadeethEnc[सह़ीह़]

यहूदियों का मामला यह था कि जब उनके बीच किसी स्त्री को माहवारी आती, तो न उसके साथ खाते- पीते और न घरों में साथ रहते थे

अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं: यहूदियों का मामला यह था कि जब उनके बीच किसी स्त्री को माहवारी आती, तो न उसके साथ खाते- पीते और न घरों में साथ रहते थे। अतः, अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथियों ने आपसे इसके संबंध में पूछा, तो अल्लाह तआला…

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#10555HadeethEnc[सह़ीह़]

बद्र के दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम) ने मुश्रिकों की ओर देखा, जिनकी संख्या एक हज़ार थी, जबकि आपके साथी केवल तीन सौ उन्नीस

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि बद्र के दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम) ने मुश्रिकों की ओर देखा, जिनकी संख्या एक हज़ार थी, जबकि आपके साथी केवल तीन सौ उन्नीस। इसलिए अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने क़िबले की ओर मुँह किया, अप…

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#10556HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब ख़नदक़ युद्ध से लौटे और हथियार उतारने के बाद स्नान कर लिया, तो जिबरील (अलैहिस्सलाम) आपके पास आए और बोले: आपने हथियार उतार दिया है? अल्लाह की क़सम! हमने अभी तक नहीं उतारा है! आप उनकी ओर चलें

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब ख़नदक़ युद्ध से लौटे और हथियार उतारने के बाद स्नान कर लिया, तो जिबरील (अलैहिस्सलाम) आपके पास आए और बोले: आपने हथियार उतार दिया है? अल्लाह की क़सम! हमने अभी तक नहीं उतारा है! आप उनकी ओर चलें!…

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#10557HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐसा लगता है कि आज भी मैं बनी ग़नम की गली में वह उड़ती हुई धूल देख रहा हूँ, जो जिबरील (सलवातुल्लाहि अलैहि) के क़ाफ़िले से उठी थी, जब वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ बनू क़ुरैज़ा की ओर चले थे

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#10558HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर वह मेरे निकट आता, तो फ़रिश्ते उसकी बोटी- बोटी उचक लेते

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अबू जह्ल ने कहा: क्या मुहम्मद तुम्हारे सामने ज़मीन पर अपना चेहरा रखता है? वर्णनकर्ता का कहना है कि उससे कहा गया: हाँ। इसपर उसने कहा: लात तथा उज़्ज़ा की क़सम! यदि मैंने उसे ऐसा करते देखा, तो उसकी गर्दन पर पाँव रख दूँगा या उसके…

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#10566HadeethEnc[सह़ीह़]

उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेता है

साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि उमर (रज़ियल्लाहु अनहु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी। उस समय आपके पास क़ुरैश की कुछ स्त्रियाँ मौजूद थीं, जो आपसे ज़ोर- ज़ोर से बातें कर रही थीं और आपसे अधिक (तवज्जो अथवा नान- न…

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#10653HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नमाज़ पढ़ते समय देखा कि आपके सीने से रोने के कारण चक्की के चलने की तरह आवाज़ निकल रही है। आपपर अल्लाह की कृपा हो और शांति की धारा बरसे।

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#10837HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में तेरह वर्षों तक रहे, आपपर क़ुरआन उतरता रहा, तथा मदीने में दस वर्ष।

आइशा तथा अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाु अन्हुम) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का…

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#10846HadeethEnc[सह़ीह़]

“ऐ अंसारियो!” उन्होंने उत्तर दियाः हम उपस्थित हैं ऐ अल्लाह के रसूल! आपने कहाः “तुम लोग कहते हो कि इस व्यक्ति पर अपने वतन का प्रेम हावी हो गया है?” उन्होंने उत्तर दियाः हाँ हमने ऐसा कहा है। आपने कहाः “कतई नहीं! मैं अल्लाह का बंदा तथा उसका रसूल हूँ। मैंने अल्लाह की ओर तथा तुम्हारी ओर हिजरत की है। अब हमारा जीना भी तुम्हारे साथ है और हमारा मरना भी तुम्हारे साथ है।“

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि रमज़ान में मुआविया (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास कई प्रतिनिधि मंडल आए। हममें से कुछ लोग दूसरे लोगों के लिए भोजन तैयार करते थे। चुनांचे अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) अकसर हमें अपने आवास पर बुलाते थे। एक दिन मैंने स…

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#10862HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बच्चों के साथ खेल रहे थे कि आपके पास जिबरील (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आए और आपको पकड़कर चित लिटा दिया तथा आपके सीने को चीरकर हृदय निकाला, फिर उसमें से जमे हुए रक्त का एक लोथड़ा निकाला और फरमायाः यह आपके शरीर में शैतान का भाग था।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बच्चों के साथ खेल रहे थे कि आपके पास जिबरील (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आए और आपको पकड़कर चित लिटा दिया तथा आपके सीने को चीरकर हृदय निकाला, फिर उसमें से जमे हुए रक्त का एक लोथड़…

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#10893HadeethEnc[सह़ीह़]

ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके लिए मस्जिद में एक ख़ेम लगा दिया था, ताकि निकट से उनकी देखभाल कर सकें।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल…

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#10953HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँव पर, उसके काटे जाने के समय ,थूका, तो वह ठीक हो गए।

बुरैदा-रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँ…

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