افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#6390HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़रिश्ते अभी तक उनपर अपने परों से छाया किए हुए हैं।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- फ़रमाते हैं कि मेरे पिता को, जिनके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया गया था, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लाया गया और आपके सामने रखा गया। जब मैं उनके चेहरे से कपड़ा हटाने के लिए आगे बढ़ा, तो लोगों ने मुझे मना किया। इसपर नबी…

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#6391HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कभी किसी को अपने हाथ से नहीं मारा। इसी तरह किसी महिला तथा दास पर भी हाथ नहीं उठाया। यह और बात है कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद कर रहे हों।

आइशा -रज़ियल्लाहु अुन्हा- से मरफ़ूअन वर्णित है : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कभी किसी को अपने हाथ से नहीं मारा। इसी तरह किसी महिला तथा दास पर भी हाथ नहीं उठाया। यह और बात है कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद कर रहे हों। इसी तरह कभी ऐसा नहीं हुआ कि आपको कोई…

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#6406HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या आपपर कोई ऐसा दिन बीता है, जो उहद के दिन से अधिक कठोर रहा हो? तो आपने उत्तर दिया : तुम्हारी क़ौम की ओर से मुझे इससे भी कठोर दिन का सामना करना पड़ा है। वैसे, उनकी ओर से मुझे जो सबसे कठोर दिन झेलना पड़ा, वह अक़बा का दिन था।

आइशा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का वर्णन है कि उन्होंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा : क्या आपपर कोई ऐसा दिन बीता है, जो उहद के दिन से अधिक कठोर रहा हो? तो आपने उत्तर दिया : "तुम्हारी क़ौम की ओर से मुझे इससे भी कठोर दिन का सामना करना पड़ा है। वैसे, उनकी ओर से मु…

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#6610HadeethEnc[सह़ीह़]

अम्र बिन अबसा के इस्लाम लाने की घटना और नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का उन्हें नमाज़ और वज़ू सिखाने का वर्णन।

अम्र बिन अबसा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि मैं जाहिलियत काल में यह समझता था कि लोग गुमराह हैं और वे किसी सही पथ पर नहीं हैं। लोग मुर्तियों की पूजा किया करते थे। इसी बीच मैंने सुना कि एक व्यक्ति मक्का में कुछ बातें बता रहा है। अतः, अपनी सवारी पर बैठकर उसके पास पह…

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#6613HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है?

अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि अबू तलहा –रज़ियल्लाहु अनहु- ने उम्मे सुलैम –रज़ियल्लाहु अनहा- से कहा : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है? उन्होंने कहा : हाँ! फिर उन्…

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#6967HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं सोया हुआ था कि इसने मेरी तलवार मुझपर उठा ली। मेरी आँख खुली, तो तलवार उसके हाथ में चमक रही थी। उसने मुझसे कहा : तुम्हें मुझेस कौन बचाएगा? मैंने कहा : अल्लाह –तीन बार-!

जाबिर -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि उन्होंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ नज़्द की ओर एक युद्ध में भाग लिया। जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- वापस लौटे, तो वह भी साथ में वापस लौटे। इसी बीच एक काँटेदार पेड़ों वाली घाटी में दोपहर के खाने के बाद…

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#8262HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आपके लिए क्षमायाचना की है? उन्होंने कहा : हाँ, और तुम्हारे लिए भी! फिर यह आयत पढ़ी : {अपने गुनाहों की क्षमायाचना कीजिए तथा मोमिन मर्दों और मोमिन स्त्रियों के लिए भी।}

आसिम अहवल का वर्णन है कि अब्दुल्लाह बिन सर्जिस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह आपको क्षमा करे! यह सुन आपने फ़रमाया : "और तुम्हें भी।" आसिम कहते हैं कि मैंने अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु)…

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#8265HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का चरित्र क़ुरआन था।

साद बिन हिशाम बिन आमिर जब आइशा रज़ियल्लाहु अनहा के पास गए, तो उनसे कहा : ऐ मोमिनों की माता! आप मुझे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चरित्र के बारे में बताइए। यह सुन उन्होंने पूछा : क्या तुम क़ुरआन नहीं पढ़ते? उनका कहना है कि मैंने उत्तर दिया : पढ़ता तो अवश्य…

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#8267HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हुनैन के दिन उपस्थित था। मैं और अबु सुफ़यान बिन हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहे और आपसे अलग नहीं हुए।

अबुल फ़ज्ल अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हुनैन के दिन उपस्थित था। मैं और अबु सुफ़यान बिन हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहे और…

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#8298HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हुए, तो पहाड़ ने एक टुकड़े को परदे में कर दिया और दूसरा टुकड़ा पहा़ड़ के ऊपर था। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “ऐ अल्लाह! तू गवाह रह!”

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफ़ूअन रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हुए, तो पहाड़ ने एक टुकड़े को परदे में कर दिया और दूसरा टुकड़ा पहा़ड़ के ऊपर था। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ…

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#8308HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह से भय करो और अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) शिकायत लेकर आए, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह से भय करो और अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो।” अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि यदि अल्लाह के रसू…

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#8367HadeethEnc[सह़ीह़]

हम लोग एक सफर में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। हम रात भर चलते रहे, यहाँ तक कि रात का अंतिम पहर हुआ, तो कुछ देर के लिए सो गए। वैसे भी, मुसाफिर के लिए सोने से उत्तम कोई वस्तु नहीं होती। हम सोए रहे, यहाँ तक कि सूरज की गरमी से ही जागे। सबसे पहले जागने वाले व्यक्ति अमुक, फिर अमुक, फिर अमुक, फिर उमर बन खत्ताब थे।

इमरान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि हम लोग एक सफर में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। हम रात भर चलते रहे, यहाँ तक कि रात का अंतिम पहर हुआ, तो कुछ देर के लिए सो गए। वैसे भी, मुसाफिर के लिए सोने से उत्तम कोई वस्तु नहीं होती। ह…

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