افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें

12 hadeeths in this category
#5840HadeethEnc[ह़सन]

तुममें से जो व्यक्ति इस अवस्था में सुबह करे कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, उसकी जान सुरक्षित हो और उसके पास दिन भर के खाने की वस्तु हो, तो यह ऐसा है, जैसे उसे पूरी दुनिया दे दी गई हो।

अब्दुल्लाह बिन मिहसन अंसारी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से जो व्यक्ति इस अवस्था में सुबह करे कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, उसकी जान सुरक्षित हो और उसके पास दिन भर के खाने की वस्तु हो,…

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#5942HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या तुम जानते हो कि झूठ तथा मिथ्यारोपन क्या है? यह लोगों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करते फिरना है।

अबदुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाय…

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#5949HadeethEnc[सह़ीह़]

दीनार के बंदे का विनाश हो। दिरहम के बंदे का सर्वनाश हो। रेशमी कपड़े के बंदे का विनाश हो। रुएँदार कपड़े के बंदे का विनाश हो। अगर दिया गया तो प्रसन्न और न दिया गया तो अप्रसन्न। वह हलाक हो और नाकाम हो। अगर किसी परेशानी में पड़े तो कोई उसे सहारा देने वाला न हो।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः दीनार के बंदे का विनाश हो। दिरहम के बंदे का विनाश हो। रेशमी कपड़े के बंदे का विनाश हो। रुएँदार कपड़े के बंदे का विनाश हो। अगर दिया गया तो प्रसन्न और न दिया गया तो अप्रसन्न…

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#5951HadeethEnc[सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़)]

तीन आदमी जन्नत में प्रवेश नहीं करेंगेः शराब का रसिया, रिश्ते-नाते को काटने वाला और जादू को सच मानने वाला।

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#5952HadeethEnc[सह़ीह़]

तीन व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे अल्लाह न बात करेगा और न उन्हें गुनाहों से पवित्र करेगा तथा उनके लिए दुखदायी यातना हैः बूढ़ा व्यभिचारी, कंगाल अभिमानी और ऐसा व्यक्ति जिसने अल्लाह को अपना सामान बना लिया हो; उसी की क़सम खाकर ख़रीदता हो और उसी की क़सम खाकर बेचता हो।

सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तीन व्यक्ति ऐसे हैं, जिनसे अल्लाह न बात करेगा और न उन्हें गुनाहों से पवित्र करेगा तथा उनके लिए दुखदायी यातना हैः बूढ़ा व्यभिचारी, कंगाल अभिमानी और ऐसा व्यक्ति जिसने अल्…

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#6187HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास एक गुलाम था, जो उन्हें प्रत्येक दिन अपनी कमाई का कुछ भाग दे दिया करता था और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) उसमें से खाया करते थे।

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास एक गुलाम था, जो उन्हें प्रत्येक दिन अपनी कमाई का कुछ भाग दे देता था और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) उसमें से खाते थे। एक दिन वह कोई वस्तु लाया और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु) ने उसमें से खा लिया। इतने…

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#6204HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ऊँटनी अ़ज़बा से कोई आगे नहीं जा सकता था

अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक ऊँटनी थी, जिसे अ़ज़बा कहा जाता था । कोई ऊँटनी उसके आगे नहीं बढ़ सकती थी। आख़िर एक देहाती नौजवान ऊंट पर सवार होकर आया और उससे आगे निकल गया । मुसलमानों को यह बात अरुचिकर लग…

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#6329HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह किसी समुदाय को अज़ाब में लिप्त करना चाहता है, तो प्रत्येक व्यक्ति को उस यातना से ग्रस्त करता है, फिर हर एक अपने कर्मों के अनुसार उठाया जाएगा

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़र…

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#6334HadeethEnc[सह़ीह़]

जहन्नम तथा जन्नत में तर्क-वितर्क हुआ, तो जन्नत ने कहा : मेरे भीतर केवल दुर्बल एवं निर्धन लोग ही प्रवेश करेंगे। जबकि जहन्नम ने कहा : मेरे भीतर ज़ालिम और घमंडी लोग प्रवेश करेंगे। यह सुन अल्लाह ने जहन्नम से कहा : तुम मेरी यातना हो, तुम्हारे माध्यम से मैं जिससे चाहता हूँ, इंतेक़ाम लेता हूँ, जबकि जन्नत से कहा : तुम मेरी दया हो, तुम्हारे माध्यम से मैं जिसपर चाहता हूँ, दया करता हूँ।

अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जहन्नम तथा जन्नत में तर्क-वितर्क हुआ, तो जन्नत ने कहा : मेरे भीतर केवल दुर्बल एवं निर्धन लोग ही प्रवेश करेंगे। जबकि जहन्नम ने कहा : मेरे भीतर ज़ालिम और घमंडी लोग प्रव…

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#6367HadeethEnc[दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़]

लोग सोने चाँदी के खदान की तरह खदान हैं। जो लोग जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि इस्लाम की समझ प्राप्त कर लें। सारे प्राण एकत्र सेना थे; जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे को पहचाना, वह दुनिया में एक-दूसरे से प्रेम रखते हैं, और जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे की पहचान न की, वह यहाँ एक-दूसरे से बेगाना रहते हैं।

अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "लोग सोने चाँदी के खदान की तरह खदान हैं। जो लोग जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि इस्लाम की समझ प्राप्त कर लें। सारे प्राण एकत्र सेना थे; जिस-जिस न…

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#6455HadeethEnc[सह़ीह़]

उस अल्लाह की क़सम, जिसके हाथ में मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की जान है, मुझे आशा है कि जन्नत में तुम्हारी संख्या आधी होगी। इसका कारण यह है कि जन्नत में केवल मुसलमान ही प्रवेश करेंगे। जबकि बहुदेववादियों की तुलना में तुम्हारा अनुपात ऐसे है, जैसे काले बैल की खाल में सफ़ेद बाल हों।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ एक शिविर में थे और हमारी संख्या लगभग चालीस थी। इसी बीच आपने कहाः "क्या तुम चौथाई जन्नत वाले होने पर संतुष्ट हो?" हमने कहाः हाँ। फ़रमायाः "क्या तुम इस बात से संतुष्ट हो…

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