افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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#6094HadeethEnc[सह़ीह़]

"कोई पड़ोसी अपने पड़ोसी को अपनी दीवार में लकड़ी गाड़ने से न रोके।" फिर अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) फ़रमातेः क्या बात है किे मैं तुम्हें इस आदेश से मुँह फेरते हुए देखता हूँ? अल्लाह की क़सम! मैं इस आदेश को तुम्हारे बीच आम करके रहूँगा।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः कोई पड़ोसी अपने पड़ोसी को अपनी दीवार में लकड़ी गाड़ने से न रोके। फिर अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) फ़रमातेः क्या बात है किे मैं तुम्हें इस आदेश से मुँह फेरते हुए देखता हू…

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#6097HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لمن حمده' (समिअल्लाहु लिमन ह़मिदहु) कहते तो हममें से कोई अपनी पीठ नहीं झुकाता, यहाँ तक कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सजदे में चले जाते, फिर हम आपके बाद ही सजदे में जाते थे।

अब्दुल्लाह बिन यज़ीद ख़त़्मी कहते हैं : मुझसे बरा ने हदीस बयान की -और वह झूठे नहीं हैं- उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لمن حمده' (समिअल्लाहु लिमन ह़मिदहु) कहते तो हममें से कोई अपनी पीठ नहीं झुकाता, यहाँ तक कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व स…

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#6102HadeethEnc[ह़सन]

हरदम अल्लाह का भय रखो और हर ऊँचाई पर चढ़ते समय 'अल्लाहु अकबर' कह लिया करो।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं यात्रा में निकलना चाहता हूँ, अतः आप मुझे वसीयत करें। आपने कहाः अल्लाह का भय हरदम रखो और हर ऊँचाई पर चढ़ते समय 'अल्लाहु अकबर' कह लिया करो।जब वह व्यक्ति जाने लगा तो आपने फ़रमायाः "ऐ अल्ल…

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#6103HadeethEnc[स़ह़ीह़]

भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की देखभाल करो और क़ैदी को रिहा कराओ।

अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल…

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#6106HadeethEnc[ह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)]

आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है।

अबू उमामा बाहिली (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़…

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#6107HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह तआला फरमाता हैः प्रतिष्ठा मेरा तहबंद और अभिमान मेरी चादर है। अतः, जो उन दोनों में से कोई भी चीज़ मुझसे खींचेगा, मैं उसे यातना में डालूँगा।

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#6108HadeethEnc[ह़सन]

एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले से लगा ले और बोसा दे? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः फिर क्या उसका हाथ पकड़े और उससे मुसाफ़हा करे? फ़रमायाः हाँ।

अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले से लगा ले और बोसा दे? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः फिर क्या उसका हाथ पकड़े और उससे मुसा…

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#6112HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम कहते रहा करो : لا إله إلا الله وحده لا شريك له، الله أكبر كبيرًا، والحمد لله كثيرًا، وسبحان الله رب العالمين، ولا حول ولا قوة إلا بالله العزيز الحكيم" (अर्थात, अल्लाह के अतिरिक्त कोई वास्तविक पूज्य नहीं है। वह अकेला है। उसका कोई साझी नहीं है। अल्लाह सबसे बड़ा है। उस अल्लाह के लिए अत्याधिक प्रशंसा है। पवित्र है वह अल्लाह, जो सारे जहानों का रब है। पाप से दूर रहने की शक्ति एवं नेकी का सामर्थ्य केवल उसी शक्तिशाली एवं हिकमत वाले अल्लाह से प्राप्त होती है।)

साद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक देहाती, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और बोला : मुझे कोई ऐसी बात सिखा दीजिए, जो मैं कहता रहूँ। आपने फ़रमाया : तुम कहते रहा करो : لا إله إلا الله وحده لا شريك له، الله أكبر كبيرًا، والحمد لله كثيرًا،…

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#6113HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नाम से, हमारी धरती की मिट्टी, हममें से किसी के मुँह के थूक से मिलकर, हमारे रब के आदेश से, हमारे मरीज़ के रोगमुक्त होने का ज़रिया होगी।

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि जब कोई व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपनी बीमारी के बारे में बताता या उसे कोई फोड़ा अथवा ज़ख्म होता, तो आप अपनी उंगली से इस तरह करते (सुफ़यान बिन उयैना जो कि इस हदीस के वर्णनकर्ता हैं ने अपनी उंगली को ज़मीन पर रख…

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#6141HadeethEnc[सह़ीह़]

मालदार व्यक्ति का कर्ज़ अदा करने में टाल-मटोल करना ज़ुल्म है और अगर तुममें से किसी को किसी मालदार के पीछे लगा दिया जाए तो वह पीछे लग जाए।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः मालदा…

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#6144HadeethEnc[सह़ीह़]

जिस आदमी ने (अपने पिता को जानते हुए) यह दावा किया कि उसका पिता कोई और है, वह काफ़िर हो गया तथा जिसने किसी ऐसी चीज़ का दावा किया जो उसकी नहीं है, वह हममें से नहीं है तथा वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले और जिसने किसी व्यक्ति को काफ़िर कहकर पुकारा या अल्लाह का दुश्मन कहा, हालाँकि वह वैसा नहीं है तो उसकी यह बात उसी की ओर लौट आएगी।

अबू ज़र्र (रज़ियल्लाहु अनहु) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि जिस आदमी ने (अपने पिता को जानते हुए) यह दावा किया कि उसका पिता कोई और है, वह काफ़िर हो गया तथा जिसने किसी ऐसी चीज़ का दावा किया जो उसकी नहीं है, वह हममें से नहीं है तथा वह अपना ठ…

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