तुम कहते रहा करो : لا إله إلا الله وحده لا شريك له، الله أكبر كبيرًا، والحمد لله كثيرًا، وسبحان الله رب العالمين، ولا حول ولا قوة إلا بالله العزيز الحكيم" (अर्थात, अल्लाह के अतिरिक्त कोई वास्तविक पूज्य नहीं है। वह अकेला है। उसका कोई साझी नहीं है। अल्लाह सबसे बड़ा है। उस अल्लाह के लिए अत्याधिक प्रशंसा है। पवित्र है वह अल्लाह, जो सारे जहानों का रब है। पाप से दूर रहने की शक्ति एवं नेकी का सामर्थ्य केवल उसी शक्तिशाली एवं हिकमत वाले अल्लाह से प्राप्त होती है।)
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Hadeeth text
साद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक देहाती, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और बोला : मुझे कोई ऐसी बात सिखा दीजिए, जो मैं कहता रहूँ। आपने फ़रमाया : तुम कहते रहा करो : لا إله إلا الله وحده لا شريك له، الله أكبر كبيرًا، والحمد لله كثيرًا، وسبحان الله رب العالمين، ولا حول ولا قوة إلا بالله العزيز الحكيم" (अर्थात, अल्लाह के अतिरिक्त कोई वास्तविक पूज्य नहीं है। वह अकेला है। उसका कोई साझी नहीं है। अल्लाह सबसे बड़ा है। उस अल्लाह के लिए अत्याधिक प्रशंसा है। पवित्र है वह अल्लाह, जो सारे जहानों का रब है। पाप से दूर रहने की शक्ति एवं नेकी का सामर्थ्य केवल उसी शक्तिशाली एवं हिकमत वाले अल्लाह से प्राप्त होती है।) उसने कहा : यह शब्द तो मेरे रब के लिए हैं, मेरे लिए क्या है? आपने फ़रमाया : तुम कहा करो : اللهم اغفر لي وارحمني واهدني وارزقني" (अर्थात, ऐ अल्लाह! मुझे क्षमा कर दे, मुझपर दया कर, मुझे सीधा रास्ता दिखा और मुझे रोज़ी प्रदान कर।)
Explanation
Benefits
दुआ करने से पहले अल्लाह का ज़िक्र और प्रशंसा करना मुसतहब है।
मुसतहब यह है कि इन्सान बेहतरीन दुआओं द्वारा अल्लाह से दुआ माँगे। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वर्णित ऐसी सारगर्भित दुआओं का चयन करे, जो अपने अंदर दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयाँ समेटी हुई हों। इन्सान को अख़्तियार है कि वह जो दुआ चाहे, करे।
बंदे को ऐसी चीज़ें सीखने की कोशिश करनी चाहिए, जो दुनिया एवं आख़िरत में उसके हक़ में लाभकारी हों।
क्षमा, दया एवं आजीविका माँगने की प्रेरणा, क्योंकि इन्हीं चीज़ों से भलाई के स्रोत फूटते हैं।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की यह कोशिश कि उम्मत को ऐसी बातें सिखाई जाएँ, जो उसके हक़ में लाभकारी हों।
दया का ज़िक्र क्षमा के बाद इसलिए हुआ है कि इन्सान पूरे तौर पर स्वच्छ हो जाए। क्योंकि "المغفرة" (अल-मग़्फ़िरह) गुनाहों पर पर्दा डाल देने, उनको मिटा देने और जहन्नम से बचा लेने का नाम है, जबकि दया विभिन्न प्रकार की भलाई प्रदान करने और जन्नत में दाख़िल करने का नाम है और यही सबसे बड़ी सफलता है।
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