افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

12 hadeeths in this category
#58208HadeethEnc[ह़सन]

जो किसी मोमिन को जान-बूझकर क़त्ल करेगा, उसे मृतक के घर वालों के हवाले किया जाएगा। वह चाहें तो उसे क़त्ल कर दें और चाहें तो उससे दियत लें, जो इस प्रकार है : 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो तीन साल पूरे करके चौथे साल में प्रवेश कर चुकी हों, 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो चार साल पूरे करके पाँचवें साल में प्रवेश कर चुकी हों और 40 गाभिन ऊँटनियाँ। साथ ही दोनों पक्ष के लोग जिसपर सुलह कर लें, वह मृतक के परिजनों के लिए है।

अम्र बिन शुऐब से वर्णित है, वह अपने पिता से वर्णन करते हैं, तथा वह अपने दादा से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो किसी मोमिन को जान-बूझकर क़त्ल करेगा, उसे मृतक के घर वालों के हवाले किया जाएगा। वह चाहें तो उसे क़त्ल कर दें और च…

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#58210HadeethEnc[सह़ीह़]

याद रहे, रक्त एवं धन से संबंधित जाहिलियत के समय की वह सारी बातें जो गौरवपूर्ण तरीक़े से बयान की जाती हैं और जिनके दावे किए जाते हैं, मेरे पाँव तले हैं, सिवाय हाजियों को पानी पिलाने एवं काबा की सेवा के कार्य के।

अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मक्का विजय के दिन खुतबा (भाषण) दिया तथा फ़रमाया : “याद रहे, रक्त एवं धन से संबंधित जाहिलियत के समय की वह सारी बातें जो गौरवपूर्ण तरीक़े से बयान की जाती हैं और जिनके दा…

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#58212HadeethEnc[ह़सन]

जिसने दवा-इलाज से अवगत होने का दावा किया, जबकि उसके इस विद्या को सीखने का कुछ अता-पता न हो, तो (कोई क्षति होने की सूरत में) वह ख़ुद उत्तरदायी होगा।

अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जिसने दवा-इलाज से अवगत होने का दावा किया, जबकि उसके इस विद्या को सीखने का कुछ अता-पता न हो, तो (कोई क्षति होने की सूरत में) वह ख़ुद उत्तरदायी ह…

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#58215HadeethEnc[ह़सन]

शिब्ह-ए-अमद (वह क़त्ल, जिसे जानबूझ-कर किए गए क़त्ल के समान माना गया है) की दियत क़त्ल-ए-अमद (जान-बूझकर किए गए क़त्ल) की तरह सख़्त है। लेकिन इसमें क़ातिल को क़त्ल नहीं किया जाएगा। उसकी सूरत यह है कि शैतान लोगों को इस तरह बहकाए कि बिना सोचे-समझे रक्तपात हो जाए, जबकि न आपसी द्वेष रहा हो और न हथियार का प्रयोग हुआ हो।

अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “शिब्ह-ए-अमद (वह क़त्ल, जिसे जानबूझ-कर किए गए क़त्ल के समान माना गया है) की दियत क़त्ल-ए-अमद (जान-बूझकर किए गए क़त्ल) की तरह सख़्त है। लेकिन इसमें क़ातिल को क़त्ल नहीं…

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#58217HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं अपने पिता के साथ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास गया। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे पिता से फ़रमाया : “क्या यह तुम्हारा बेटा है?” उन्होंने कहा : हाँ, काबा के रब की क़सम।

अबू रिमस़ा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं अपने पिता के साथ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास गया। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे पिता से फ़रमाया : “क्या यह तुम्हारा बेटा है?” उन्होंने कहा : हाँ, काबा के रब की क़सम। आपने फ…

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#58224HadeethEnc[सह़ीह़]

जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपने घर वालों की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपनी जान की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी शहीद है और जो अपने धर्म की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी शहीद है।

सईद बिन ज़ैद -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपने घर वालों की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपनी जान की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी श…

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#58226HadeethEnc[सह़ीह़]

जो स्वयं किसी कार्य को करने के लिए लालायित हो हम उसको अपने किसी कार्य के लिए उपयोग नहीं करते। परन्तु ऐ अबू मूसा, अथवा ऐ अब्दुल्लाह बिन क़ैस (यह अबू मूसा अशअरी का ही नाम है), तुम यमन चले जाओ।

अबू मूसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया। मेरे साथ अशअरी क़बीले के दो आदमी और थे। एक मेरे दायीं ओर था तो दूसरा बायीं ओर। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिसवाक कर रहे थे। उन दोनों ने आपसे कुछ माँगा…

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#58227HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के अज़ाब (आग) से किसी को अज़ाब न दो।

इकरिमा से वर्णित है : अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने कुछ लोगों को आग में जला दिया, तो यह ख़बर जब इब्ने-ए-अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को पहुंची तो उन्होंने कहा : अगर मैं होता तो उन्हें हरगिज़ न जलाता, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "अल्लाह के अज़ाब (आग)…

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#58229HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझसे सीख लो, मुझसे सीख लो। अल्लाह ने उनके लिए राह निकाल दी है (यानी व्यभिचारियों की समस्या का समाधान कर दिया है)। कुँवारा यदि कुँवारी के साथ व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा एक साल के लिए उसके नगर से निकाल दिया जाएगा और विवाहित पुरुष यदि विवाहिता के संग व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा संगसार किया जाएगा।

उबादा बिन सामित (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “मुझसे सीख लो, मुझसे सीख लो। अल्लाह ने उनके लिए राह निकाल दी है (यानी व्यभिचारियों की समस्या का समाधान कर दिया है)। कुँवारा यदि कुँवारी के साथ व्यभिचा…

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#58230HadeethEnc[सह़ीह़]

जब माइज़ बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए (तथा अपने व्यभिचार व दुष्कर्म का इक़रार किया) तो आपने उनसे कहा : “हो सकता है तुमने चुंबन लिया हो अथवा उसको छुआ हो अथवा उसकी ओर देखा हो।” उन्होंने कहा : नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल (ऐसी बात नहीं है)। तो आपने उनसे बिना किसी लाग-लपेट के पूछा : “क्या तुमने उसके संग संभोग किया है?” (जब उन्होंने इसका इक़रार कर लिया तो) आपने उनको संगसार करने का आदेश दिया।

अब्दुल्लाग बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह कहते हैं कि जब माइज़ बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए (तथा अपने व्यभिचार व दुष्कर्म का इक़रार किया) तो आपने उनसे कहा : “हो सकता है तुमने चुंबन लिया हो अथवा उसको छुआ हो अथव…

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