افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़

12 hadeeths in this category
#4813HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों से रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो मस्जिद में फेंका गया हो और उसे साफ़ न किया गया हो।

अबू ज़र्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों में रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो म…

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#4829HadeethEnc[सह़ीह़]

जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे।

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#4830HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- और मुग़ीरा बिन शोबा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे। मैंने आपसे कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आप ऐसा क्यों करते हैं, जबकि अल्लाह ने आपक…

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#4850HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जिसने लहसुन या प्याज़ खाया हो वह हमसे दूर रहे - या फ़रमाया : - हमारी मस्जिद से दूर रहे और अपने घर में बैठा रहे।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने लहसुन या प्याज़ खाया हो वह हमसे दूर रहे - या फ़रमाया : - हमारी मस्जिद से दूर रहे और अपने घर में बैठा रहे।" अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास एक…

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#4853HadeethEnc[सह़ीह़]

सजदा सह्व के बारे में ज़ुल यदैन की हदीस।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें ज़ुहर अथवा अस्र की नमाज़ पढ़ाई। (इब्ने सीरीन कहते हैं कि अबू हुरैरा ने नमाज़ का नाम लेकर बताया था, लेकिन मुझे याद नहीं रहा) वह कहते हैं कि आपने हमें दो रकअत पढ़ाकर सलाम फेर दिया…

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#4933HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के निकट सबसे प्रिय स्थान मस्जिदें और सबसे अप्रिय स्थान, बाज़ार हैं।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्ला…

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#4968HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम्हारा क्या विचार है कि यदि तुममें से किसी के द्वार पर नहर प्रवाहित हो और वह उसमें प्रत्येक दिन पाँच बार स्नान करता हो, तो क्या उसके शरीर में मैल का कोई अंश बचेगा?

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, कि उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "तुम्हारा क्या विचार है कि यदि तुममें से किसी के द्वार पर नहर प्रवाहित हो और वह उसमें प्रत्येक दिन पाँच बार स्नान करता हो, तो क्या उसके शरीर में मैल का कोई…

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#5204HadeethEnc[सह़ीह़]

हम नमाज़ में बात कर लिया करते थे। आदमी अपने साथी से, जो उसके बगल में नमाज़ पढ़ रहा होता, बात कर लेता था। यहाँ तक कि क़ुरआन की यह आयतः "وقوموا لله قانتين" अवतरित हुई, तो हमें चुप रहने का आदेश दिया गया तथा बात करने से मना कर दिया गया।

ज़ैद बिन अरक़म (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि हम नमाज़ में बात कर लिया करते थे। आदमी अपने साथी से, जो उसके बगल में नमाज़ पढ़ रहा होता, बात कर लेता था। यहाँ तक कि क़ुरआन की यह आयतः "وقوموا لله قانتين" अवतरित हुई, तो हमें चुप रहने का आदेश दिया गया तथा बात करने से मना कर द…

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#5205HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन ख़ुतबा दे रहे थे कि एक व्यक्ति अंदर आया। आपने कहाः "ऐ अमुक क्या तूने नमाज़ पढ़ ली है?" उसने कहाः नहीं। फ़रमायाः "खड़े हो जाओ और दो रकात पढ़ लो।"

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन ख़ुतबा दे रहे थे कि एक व्यक्ति अंदर आया। आपने कहाः "ऐ अमुक क्या तूने नमाज़ पढ़ ली है?" उसने कहाः नहीं। फ़रमायाः "खड़े हो जाओ और दो रकात पढ़ लो।" तथा एक रिवायत में हैः "दो रक…

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#5206HadeethEnc[सह़ीह़]

ज़ातुर-रिक़ा युद्ध में पढ़ी गई भय की नमाज़ की तरीक़ा

सालेह़ बिन ख़व्वात बिन जुबैर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने एक ऐसे व्यक्ति से रिवायत किया है, जिसने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ज़ातुर-रिक़ा युद्ध में भय की नमाज़ पढ़ी थी कि एक गिरोह ने आपके साथ सफ़ बाँध लिया और एक गिरोह शत्रु के सामने खड़ा रहा। चुनांचे जो ल…

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#5207HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। चुनांचे आप सफ़र में दो रकात से अधिक नहीं पढ़ते थे तथा अबू बक्र, उमर और उसमान भी ऐसा ही करते थे।

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#5212HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सूरा नस्र उतरने के बाद जब भी कोई नमाज़ पढ़ी, उसके अंदर यह दुआ ज़रूर पढ़ी : (ऐ अल्लाह, ऐ हमारे रब, तू अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे।)

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सूरा नस्र उतरने के बाद जब भी कोई नमाज़ पढ़ी, उसके अंदर यह दुआ ज़रूर पढ़ी : (ऐ अल्लाह, ऐ हमारे रब, तू अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे।…

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