افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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#4212HadeethEnc[ह़सन]

एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।

वहशी बिन हर्ब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथियों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! हम खाते हैं लेकिन संतुष्ट नहीं होते? आपने कहाः शायद तुम अलग-अलग खाते हो? उन्होंने कहाः हाँ! फ़रमायाः एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम ल…

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#4216HadeethEnc[अल्लामा नववी रह़िमहुल्लाह कहते हैं : ह़दीस़ ह़सन है।]

अल्लाह ने मेरे लिए, मेरी उम्मत के गलती से तथा भूलवश किए हुए और ज़बरदस्ती कराए गए कार्यों को क्षमा कर दिया है।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ…

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#4217HadeethEnc[सह़ीह़]

प्रभुत्वशाली एवं महान अल्लाह ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु से पहले लगातार वह्य उतारी, यहाँ तक कि जब आपने अंतिम साँस ली तो वह्य (प्रकाशना) उतरने का सिलसिला चरम पर था।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः प्रभुत्वशाली एवं महान अल्लाह ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु से पहले लगातार वह्य उतारी, यहाँ तक कि जब आपने अंतिम साँस ली तो वह्य (प्रकाशना) उतरने का सिलसिला च…

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#4219HadeethEnc[सह़ीह़]

दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो खुजूरों को एक साथ मुँह में डालने से मना किया है। फिर कहने लगेः हाँ, यदि साथ में खाने वाला अपने भाई को अनुमति दे दे तो कोई बात नहीं है।

जबला बिन सुहैम कहते हैं कि एक बार हमें अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर के साथ अकाल का सामना करना पड़ा। इसी बीच हमें खाने को कुछ खुजूरें दी गईं। हम खाने लगे तो अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- हमारे आस-पास टहलने लगे और कहने लगेः दो खुजूरों को एक साथ मुँह में न डालो, क्योंक…

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#4220HadeethEnc[स़ह़ीह़]

क़यामत के दिन जहन्नमियों में से सबसे कम अज़ाब उस व्यक्ति को हो रहा होगा, जिसके पास आग की दो पट्टियाँ और आग ही के दो जूते होंगे, जिनके कारण उसका मस्तिष्क खौल रहा होगा। वह समझेगा कि उससे ज़्यादा सख़्त अज़ाब किसी को नहीं हो रहा है। हालाँकि उसे सबसे हल्का अज़ाब दिया जा रहा होगा।

नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "क़यामत के दिन जहन्नमियों में से सबसे कम अज़ाब उस व्यक्ति को हो रहा होगा, जिसके पास आग की दो पट्टियाँ और आग ही के दो जूते होंगे, जिनके कारण उसका मस्तिष्…

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#4221HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दूध पेश किया गया, जिसमें पानी मिला हुआ था। उस समय आपके दाएँ एक देहाती और बाएँ अबू बक्र- रज़ियल्लाहु अन्हुम- बैठे हुए थे। आपने दूध पिया और उसके बाद देहाती को देते हुए कहाः दाएँ वाले से शुरू किया करो।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दूध पेश किया गया, जिसमें पानी मिला हुआ था। उस समय आपके दाएँ एक देहाती और बाएँ अबू बक्र- रज़ियल्लाहु अन्हुम- बैठे हुए थे। आपने दूध पिया और उसके बाद देहाती को देते हुए कहाः दाएँ…

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#4222HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का विजय के दिन काले रंग की पगड़ी बाँधकर दाख़िल हुए।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का विजय के दिन काले रंग का साफा अर्थात पगड़ी बाँधकर दाख़िल हुए। अबू सईद अम्र बिन हुरैस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः गोया कि मैं अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देख रहा ह…

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#4223HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है अगर वह रात को नमाज़ पढ़ता।

सालिम बिन अब्दुल्लाह बिन उमर बिन ख़त्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हुम- अपने पिता से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है, यदि वह रात को नमाज़ पढ़ता। सालिम कहते हैंः इसके बाद (मेरे पिता) अब्दुल्लाह रात को कम ही सोया करत…

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#4224HadeethEnc[सह़ीह़]

यह जिबरील हैं, तुझे सलाम कह रहे हैं।

आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे कहाः यह जिबरील हैं, तुझे सलाम कह रहे हैं। उनका कहना है कि मैंने कहाः उनपर सलामती हो, अल्लाह की कृपा हो और उसकी बरकतें हों। बुख़ारी और मुस्लिम की कुछ रिवायतों में "وبركاته" शब्द आया ह…

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#4226HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ…

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#4227HadeethEnc[सह़ीह़]

आपका क्या ख़याल है कि यदि मैं अल्लाह के मार्ग में जिहाद करते हुए मारा जाऊँ तो मेरे गुनाह माफ़ हो जाएँगे?

अबू क़तादा हारिस बिन रिबई- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके बीच खड़े हुए और बताया कि अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना और अल्लाह पर ईमान लाना सबसे उत्तम कार्य हैं। यह सुन एक व्यक्ति खड़ा हुआ और कहने लगा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आ…

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