Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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हुदूद (शरई दंड)
अगर मैं किसी को शरई हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो मुझे कोई अफ़सोस न होगा। लेकिन अगर शराबी को हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो उसकी दियत (हरजाना) दूँगा। क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके बारे में कोई ख़ास हद मुक़र्रर नहीं फरमाई है।
अली बिन अबी तालिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि अगर मैं किसी को शरई हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो मुझे कोई अफ़सोस न होगा। लेकिन अगर शराबी को हद लगाऊँ और वह मर जाए, तो उसकी दियत (हरजाना) दूँगा। क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके…
उक्ल एवं उरैना क़बीलों के कुछ लोग (मदीना) आए और मदीने की आब व हवा रास न आने के कारण बीमार हो गए।
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : उक्ल एवं उरैना क़बीलों के कुछ लोग (मदीना) आए और मदीने की आब व हवा रास न आने के कारण बीमार हो गए। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको ऊँटों के रेवड़ के पास जाने और उनका पेशाब तथा दूध पीने का आद…
जिसने ख़ुद को शरई दंड का हक़दार बना लिया और उसे दुनिया में दंड दे दिया गया, तो अल्लाह का न्याय इस बात की अनुमति नहीं देता कि अपने बंदे को आख़िरत में दोबारा दंड दे।
अली -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने ख़ुद को शरई दंड का हक़दार बना लिया और उसे दुनिया में दंड दे दिया गया, तो अल्लाह का न्याय इस बात की अनुमति नहीं देता कि अपने बंदे को आख़िरत में दोबारा दंड दे। तथा जिसने…
उसपर लानत न भेजो, अल्लाह की क़सम! मुझे मालूम है कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।
उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में एक आदमी था जिसका नाम अब्दुल्लाह था, और उसे हिमार का लक़ब दिया गया था। वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हंसाया करता था, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे शराब पीने पर…
अल्लाह तआला ने कुछ चीज़ें फ़र्ज़ की हैं; उन्हें नष्ट न करो, कुछ शरई दंड निर्धारित किए हैं; उनका उल्लंघन न करो, कुछ चीज़ें हराम की हैं; उनके निकट न जाओ और कुछ चीज़ों से जान-बूझकर, तुम्हारे ऊपर दयास्वरूप खामोशी बरती है; अतः उन्हें मत कुरेदो।
अबू सालबा ख़ुशनी जुरसूम बिन नाशिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है : "अल्लाह तआला ने कुछ चीज़ें फ़र्ज़ की हैं; उन्हें नष्ट न करो, कुछ शरई दंड निर्धारित किए हैं; उनका उल्लंघन न करो, कुछ चीज़ें हराम की हैं; उनके निकट न जाओ…

