افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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#3496HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह के रसूल! क्या बात है कि लोगों ने उमरा करने के बाद एहराम खोल दिया है और आपने उमरा के बाद एहराम नहीं खोला? तो आपने फ़रमायाः मैंने अपने बाल जमा लिए थे और क़ुर्बानी के जानवरों को निशान लगा दिए थे। अतः, जब तक कुर्बानी न कर लूँ, एहराम नहीं खोल सकता।

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी हफ़सा- रज़ियल्लाह अन्हा- का वर्णन है कि उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या बात है कि लोगों ने उमरा करने के बाद एहराम खोल दिया है और आपने उमरा के बाद भी एहराम नहीं खोला? तो आपने फ़रमायाः मैंने अपने बाल जमा लिए थे और क़ु…

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#3502HadeethEnc[सह़ीह़]

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- की माँ ने कहाः देखो, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का भेद किसी के सामने न खोलना। अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहाः अल्लाह की क़सम, यदि मैं किसी को वह राज़ की बात बताता तो साबित! तुझे अवश्य बताता।

साबित रिवायत करते हैं कि अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः मैं बच्चों के साथ खेल रहा था कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरे पास आए और हमें सलाम किया तथा मुझे अपने एक काम से भेज दिया। अतः, मुझे अपनी माँ के पास जाने में देर हुई। जब मैं उनके पास पहुँचा तो उन्…

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#3503HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुझे पाँच चीज़ें ऐसी दी गई हैं, जो मुझसे पहले किसी नबी को दी नहीं गई थीं।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुझे पाँच चीज़ें ऐसी दी गई हैं, जो मुझसे पहले किसी नबी को दी नहीं गई थीं। एक महीने की मसाफ़त तक जाने वाले प्रताप द्वारा मेरा सहयोग किया गया है। मेरे लिए धरती को न…

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#3504HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने ( घर से निकलते समय) कहाः 'بِسم الله تَوَكَّلتُ على اللهِ، وَلاَ حول ولا قُوَّة إِلَّا بالله' (अर्थात, अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया तथा अल्लाह के सिवा कोई शक्ति और कोई ताक़त नहीं है।) उससे कहा जाता हैः तुझे मार्ग दिखा दिया गया, तुझे राहत दे दी गई तथा तुझे सुरक्षित कर दिया गया तथा शैतान उससे दूर हट जाता है।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने (घर से निकलते समय) कहाः 'بِسم الله تَوَكَّلتُ على اللهِ، وَلاَ حول ولا قُوَّة إِلَّا بالله' (अर्थात, अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया तथा अल्लाह के सि…

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#3506HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने इस्लाम में कोई अच्छा तरीका जारी किया, उसे खुद अपनी नेकी तथा बाद में उसपर अमल करने वाले तमाम लोगों की नेकी मिलेगी। हाँ, मगर उनकी नेकियाँ तनिक भी घटाई नहीं जाएँगी। और जिसने इस्लाम में कोई बुरा तरीका प्रचलित किया, उसपर उसका गुनाह होगा तथा बाद में उसपर अमल करने वाले तमाम लोगों का गुनाह होगा और उसके गुनाह कुछ भी घटाए नहीं जाएँगे।

जरीर बिन अब्दुल्लाह- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हम पहले दिन की पहली पहर को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास थे कि कुछ लोग आपके पास आए, जो नंगे शरीर थे। अपने ऊपर धारीदार चादरें या चोगे डाले हुए थे। तलवार लटकाए हुए थे। अधिकतर लोग मुज़र क़बीले से थे, बल…

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#3507HadeethEnc[सह़ीह़]

जब खाते समय अल्लाह का नाम न लिया जाए तो उस खाने में शैतान शामिल हो जाता है। वही इस बच्ची को लाया था, ताकि इसके माध्यम से खाने में शरीक हो जाए। अतः, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर इस देहाती को ले आया ताकि उसके बहाने शरीक हो जाए, परन्तु मैंने उसका हाथ भी पकड़ लिया। उस अल्लाह की क़सम! जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, शैतान का हाथ इन दोनों के हाथों के साथ मेरे हाथ में है।

हुज़ैफ़ा बिन यमान- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि हम जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ खाने में शरीक होते तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पहले खाने को हाथ नहीं लगाते थे। एक बार हम आपके साथ खाने बैठे थे कि अचानक एक लड़की आई। ऐसा लग रहा…

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#3508HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह तआला ने कहाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वालों के लिए नूर के मिंबर होंगे तथा उनपर नबी एवं शहीद भी रश्क करेंगे।

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#3512HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अल्लाह के अतिरिक्त किसी के सत्य पूज्य न होने और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अल्लाह के रसूल होने, नमाज़ पढ़ने, ज़कात देने, सुनने तथा मानने और हर मुसलमान का भला चाहने (के इक़रार) पर बैअत की।

जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अल्लाह के अतिरिक्त किसी के सत्य पूज्य न होने और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अल्लाह के रसूल होने, नमाज़ पढ़ने, ज़कात देने, सुनने तथा मानने और हर मुसल…

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#3516HadeethEnc[सह़ीह़]

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ज़ुहर की नमाज़ तेज़ धूप में पढ़ते थे, अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते थे जब सूरज साफ़ और रौशन रहता था, मगरिब की नमाज सूरज डूबने के बाद पढ़ते थे।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी कहते हैं कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ज़ुहर की नमाज़ तेज़ धूप में पढ़ते थे, अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते थे जब सूरज साफ़ और रौशन रहता था, मगरिब की नमाज सूरज डूबने के बाद पढ़ते थे, इशा की नमाज़ कभी जल्दी तो कभी देर से पढ़ते थे; जब देखते थे क…

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#3517HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह की क़सम! हम यह कार्य किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपते, जो माँगकर लेना चाहे अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपते, जो उसकी लालसा रखे।

अबू मूसा अशअरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं और मेरे चचा के बेटों में से दो व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचे। उनमें से एक ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! अल्लाह ने आपको जो कुछ सौंपा है, उसके कुछ भाग का हमें शासक बना दीजिए। दूसरे ने भी कुछ…

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#3518HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं तुमको वसीयत करता हूँ कि हर नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना हरगिज़ न छोड़ना : ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र करने, शुक्र करने और बेहतर अंदाज़ में अपनी इबादत करने में मेरी मदद फ़रमा।

मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनका हाथ पकड़ा और फ़रमाया : "ऐ मुआज़! अल्लाह की क़सम, मैं तुमसे मोहब्बत रखता हूँ।" आगे फ़रमाया : "ऐ मुआज़! मैं तुमको वसीयत करता हूँ कि हर नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना हरगिज़ न छोड़…

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#3520HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है, पाँच वक़्त की नमाज़ें पढ़ो, अपने महीने (अर्थाथ रमज़ान महीने) के रोज़े रखो, अपने धन की ज़कात दो तथा अपने शासकों की बात मानो, तुम अपने रब की जन्नत में दाख़िल हो जाओगे।

अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हज्जतुल वदा के अवसर पर ख़ुतबा देते समय कहते हुए सुना है : "अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है, पाँच वक़्त की नमाज़ें पढ़ो, अपने महीने (अर्थाथ रमज़ान महीने) के रोज़े रखो, अपने धन की ज़क…

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