Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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नमाज़
मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सामने सूरा 'नज्म' तिलावत की, तो आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसमें सजदा नहीं किया।
ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सा…
मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि क्या सूरा 'हज्ज' में दो सजदे हैं? तो फ़रमायाः "हाँ, तथा जो दोनों सजदे न करना चाहे, वह उन दोनों आयतों को न पढ़े।"
उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने जुमे के दिन ख़ुतबे में सूरा 'अन-नह़्ल' पढ़ी। जब सजदे की आयत में आए, तो नीचे उतरे और सजदा किया। लोगों ने भी आपके साथ सजदा किया।
रबीया बिन अब्दुल्लाह बिन हुदैर तैमी का वर्णन है, वह कहते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने जुमे के दिन ख़ुतबे में सूरा 'अन-नह़्ल' पढ़ी। जब सजदे की आयत में आए, तो नीचे उतरे और सजदा किया। लोगों ने भी आपके साथ सजदा किया। फिर जब अगला जुमा आया, तो वही सूरा पढ़ी।…
जब आपके पास कोई ख़ुशी की बात आती या आप को कोई खुशखबरी दी जाती, तो अल्लाह के शुक्राने के तौर पर सजदे में चल जाते।
अबू बकरा -रज़ियल्लाहु अंहु- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के बारे में कहते हैं कि जब आपके पास कोई ख़ुशी क…
दरअसल, मेरे पास जिबरील -अलैहिस्सलाम- आए थे और मुझे एक सुसमाचार सुनाते हुए कहा था कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह कहता हैः जो आप पर दरूद भेजेगा, मैं उस पर दया करूँगा और जो आप पर सलाम भेजेगा, मैं उस पर शांति उतारूँगा। अतः मैंने शुक्राने के तौर पर -सर्वशक्तिमान एवं महान- अल्लाह के सामने सजदा किया।
अब्दुर्रहमान बिन औफ़ -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- निकले और अपने दान किए हुए बाग की ओर गए। अंदर पहुँचे, तो क़िबले की ओर मुँह किया और सजदे में गिर गए। इतना लंबा सजदा किया कि मैं सोचने लगा कि कहीं सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने…
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ख़ालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु अन्हु को यमन की ओर भेजा कि यमन वालों को इसलाम का निमंत्रण दें। लेकिन यमन वालों ने उनकी बात नहीं मानी, तो आपने अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अन्हु- को भेजा।
बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ख़ालिद बिन वलीद -रज़ियल्लाहु अन्हु- को यमन की ओर भेजा कि यमन वालों को इसलाम का निमंत्रण दें। लेकिन यमन वालों ने उनकी बात नहीं मानी, तो आपने अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अन्हु- को भेजा तथा…
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़ज्र प्रकट होने के बाद दो हल्की रकातें पढ़ा करते थे।
हफ़सा -रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है, वह कहती हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़ज्र प्रकट होने के ब…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ज़ुहर से पहले की चार रकातें और फ़ज्र से पहले की दो रकातें नहीं छोड़ते थे।
जिसने ज़ुहर से पहले और ज़ुहर के बाद चार-चार रकातें पाबंदी से पढ़ीं, अल्लाह उसपर जहन्नम की आग हराम कर देगा।
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नी उम्म-ए-हबीबा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "जिसने ज़ुहर से पहले और ज़ुहर के बाद चार-चार रकातें पाबंदी से पढ़ीं, अल्लाह उसपर जहन्नम की आ…
अल्लाह उस आदमी पर रहम करे, जिसने अस्र से पहले चार रकात पढ़ी।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व…
मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो।
अब्दुल्लाह बिन मुग़फ़्फ़ल मुज़नी -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो।" फिर फ़रमायाः "मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो। यह आदेश उसके लिए है, जो स्वेच्छा से ऐसा करना चाहे।" आपने ऐ…

